• खरपतवार प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय कैम्पस प्रशिक्षण का आयोजन
• धान की सीधी बुआई कम लागत में अधिक आय- ई.निधि कुमारी

दरभंगा कृषि विज्ञान केन्द्र के कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक ई.निधि कुमारी ने जाले प्रखंड के नगरडीह गांव में धान की सीधी बुआई के लाभ एवं इसमें प्रयोग होने वाले यंत्र एवं खरपतवार प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय ऑफ कैम्पस प्रशिक्षण का आयोजन किया।
• उन्होंने बताया कि सही विधि एवं सही समय से धान की बुआई जलवायु अनुकूल परिवेश में खेती से किसान लाभ उठा सकते हैं।
इस कार्यक्रम के तहत धान में खेत का समतलीकरण, बीज दर,बीज की गहराई,सही किस्मों का चयन,खेत की तैयारी एवं बुआई,बुआई की तकनीकी,बुआई के यंत्र जैसे कि जीरो टिल सीड ड्रिल,मल्टी क्रॉप प्लांटर,राइस व्हीट सीडर, ड्रम सीडर इत्यादि के बारे में जानकारी दी।
बुआई का समय,बीज उपचार,उर्वरक प्रबंधन,खरपतवार नियंत्रण के बारे में भी बताया।
उन्होंने बताया कि धान की सीधी बुआई संसाधन संरक्षित खेती की एक तकनीक है,जिससे 20 प्रतिशत जल तथा श्रम की बचत होती है।
वर्तमान समय में धान की सीधी बुआई के लिए कई मशीनें उपलब्ध हैं एवं व्यापक खरपतवार प्रबंधन की तकनीकें भी उपलब्ध हैं।
इस तकनीक की सफलता के लिए सही विधि एवं सही समय से बुआई करनी चाहिए। इस तकनीक से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार के साथ उत्पादन लागत घटाते हुए किसान अधिक लाभ प्राप्त कर सकते है।
धान की अच्छी फसल के लिए बीज दर,बीज की गहराई, बुआई का समय,बीजोपचार एवं खरपतवार नियंत्रण इत्यादि क्रियाएं महत्वपूर्ण हैं।
साथ ही इससे अधिक उपज के साथ धन,जल एवं श्रमिकों की बचत होती है। सीड ड्रिल द्वारा धान की सीधी बुआई में पलेवा एवं खेत की तैयारी में लगने वाले समय की बचत होती है एवं धान की फसल 10 से 15 दिनों पहले ही तैयार हो जाती है।
धान की सीधी बुआई कम लागत में अधिक उत्पादन देती है।
प्लान्टर द्वारा बुआई करने पर मध्यम प्रकार के दानों के लिए बीज दर 15-20 कि.ग्रा./हैक्टर तथा बड़े दानों के लिए बीज दर 20-25 कि.ग्रा./हैक्टर रखें।
बीज की गहराई,धान की सीधी बुआई में बीज की गहराई महत्वपूर्ण है,बीज की गहराई 2-3 सेंटीमीटर रखें। अधिक गहरी या उथली बुआई से जमाव प्रभावित होता है। अधिकतर ड्रिल मशीन या प्लान्टर में बीज नियंत्रक पहिया होता है, जिसके द्वारा बीज की गहराई को समायोजित किया जाता है। बुआई करके पाटा लगाएं,जिससे नमी संरक्षित रह सके और बीज का अच्छा जमाव हो सके।
उन्होंने कहा कि सही किस्मों का चयन करें यथा- ऐसे प्रभेद जिनकी शुरुआती बढ़वार तीव्र गति से हो,गहरी जड़ें हों तथा जिनको पानी की आवश्यकता कम हो।
खेत की तैयारी एवं बुआई अगर पूर्व फसल के खरपतवार हैं तो ग्लाइफोसेट खरपतवारनाशक का छिड़काव करें।
1.5 लीटर मात्रा को 100 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ में प्रयोग करें। ग्लाइफोसेट छिड़काव से पहले ध्यान रखें कि उपयोग किए जाने वाला पानी बिल्कुल साफ हो तथा फ्लैट-फैन नोजल का उपयोग करें।
ग्लाइफोसेट के साथ 2,4-डी 2 मि.ली./लीटर पानी में मिलाने पर खरपतवार का अच्छा नियंत्रण होता है।
उन्होंने बुआई की तकनीकी माध्यम से करने को कहा जैसे खेत में बीजों की सटीक मात्रा के लिए समान बीज वितरण प्रणाली (झुकी प्लेटें,कपनुमा मापक या खड़ी प्लेटें) वाली मशीनों का उपयोग करें।
बुआई से पूर्व सिंचाई के बाद पाटा/चैकी चलाने से मृदा में नमी संरक्षित रहती है और बीजों का जमाव अच्छा होता है।
बुआई के यंत्र छोटे ट्रैक्टरों (35 हॉर्स पॉवर) से भी चलाया जा सकता है।
खरीफ में धान की सीधी बुआई मानसून आने से 10-12 दिनों पूर्व करें। धान के अच्छे अंकुरण के लिए एवं कम वर्षा होने पर सिंचाई के बाद ही बुआई करें अथवा बुआई के तुरन्त बाद सिंचाई करें।अधिक वर्षा होने पर धान की पौध को पानी में डूबने से बचाने के लिए धान की पौध का वर्षा से पूर्व विकसित होना जरूरी है।
बीज उपचार बुआई के 10-12 घंटे पूर्व बीजों को पानी में भिगोकर बुआई करने पर अंकुरण अच्छा होता है,उपचारित बीजों को बुआई से पूर्व छाया में सुखाएं।
बीजोपचार से बीजों में कई प्रकार के जैव-रासायनिक परिवर्तन होते हैं,जो कि बीजों के अंकुरण और पौध की बढ़वार को बढ़ाते हैं।
• कार्यक्रम में महिला कृषकों एवं किसान भाइयों ने भाग लिया।
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