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‘सन ऑफ द सॉइल’ पर राष्ट्रीय स्तर की ऑनलाइन पुस्तक-चर्चा आयोजित

‘सन ऑफ द सॉइल’ पर राष्ट्रीय स्तर की ऑनलाइन पुस्तक-चर्चा आयोजित

वर्ल्ड एसोसिएशन ऑफ ऑथर्स एंड रिसर्चर्स (वार), दरभंगा चैप्टर द्वारा रविवार की देर शाम गूगल मीट के माध्यम से मैथिली के चर्चित उपन्यास ‘पृथ्वीपुत्र’ एवं उसके अंग्रेज़ी अनुवाद ‘सन ऑफ द सॉइल’ पर राष्ट्रीय स्तर की ऑनलाइन पुस्तक-चर्चा आयोजित की गई। इस उपन्यास का अंग्रेज़ी अनुवाद सी. एम. साइंस कालेज के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. युगेश्वर साह ने किया है। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से शिक्षाविदों, साहित्यकारों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं साहित्य-प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय अंग्रेजी विभाग की प्रो. (डॉ.) पुनिता झा ने की। उन्होंने कहा कि अनुवाद क्षेत्रीय साहित्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का सशक्त माध्यम है। मुख्य अतिथि अतुल के. ठाकुर ने कहा कि अब समय आ गया है कि ‘पृथ्वीपुत्र’ को वैश्विक मंच मिले। उन्होंने इसे वंचित एवं श्रमिक वर्ग की सशक्त आवाज़ बताते हुए डॉ. युगेश्वर साह के अनुवाद की सराहना की।

मुख्य वक्ता डॉ. ललित कुमार ने कहा कि जिस प्रकार प्रेमचंद ने हिंदी साहित्य में आमजन की आवाज़ को स्वर दिया, उसी प्रकार ललित ने मैथिली साहित्य में श्रम, संघर्ष और ग्रामीण जीवन को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया है। डॉ. सत्येन्द्र कुमार झा ने कहा कि अनुवादक ने मूल कृति की आत्मा और सांस्कृतिक संवेदना को अक्षुण्ण बनाए रखा है।उन्होंने कहा कि साहित्यिक अनुवाद केवल शब्दों का नहीं, बल्कि भाव, संस्कृति और संवेदना का रूपांतरण होता है। उनके अनुसार, इस कृति में श्रम, सौंदर्य और उदात्त प्रेम का सुंदर समन्वय है।

डॉ. कृष्णानंद मिश्र ने कहा कि मैथिली साहित्य के अंग्रेज़ी अनुवाद से उसे वैश्विक पहचान मिलने के साथ-साथ अंतर्विषयी शोध को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि अनुवाद केवल भाषा का परिवर्तन नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति के आदान-प्रदान का सशक्त माध्यम है। डॉ. शैलजा ने ‘सन ऑफ द सॉइल’ को पहचान, संस्कृति और मिट्टी से जुड़ाव की कहानी बताया, जबकि डॉ. घनश्याम कुमार ने इसे भूमि, श्रम और आत्मसम्मान का सशक्त आख्यान बताते हुए इसके यथार्थवादी दृष्टिकोण की सराहना की।

कार्यक्रम का संचालन तृप्ति शर्मा ने किया। मुस्कान ठाकुर ने स्वागत भाषण तथा रजनंदिनी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में 75 से अधिक प्रतिभागियों ने सहभागिता की। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि ‘पृथ्वीपुत्र : सन ऑफ द सॉइल’ का अंग्रेज़ी अनुवाद मैथिली साहित्य को विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण और सराहनीय पहल है।

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