PAT-2024 रद्द करने के निर्णय के विरोध में शोधार्थियों का हुंकार, शीघ्र साक्षात्कार व नामांकन की मांग

मिथिला विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय परिसर स्थित बाबा नागार्जुन स्मारक के समीप रविवार को PAT-2024 के शोधार्थियों एवं छात्र प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजभवन द्वारा PAT-2024 को निरस्त किए जाने के निर्णय का कड़ा विरोध करते हुए इसे हजारों शोधार्थियों के शैक्षणिक भविष्य के साथ अन्याय बताया गया। वक्ताओं ने मांग की कि PAT-2024 को निरस्त करने का आदेश तत्काल वापस लिया जाए तथा बिना किसी विलंब के साक्षात्कार आयोजित कर योग्य अभ्यर्थियों का नामांकन सुनिश्चित किया जाए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि PAT-2024 की अधिसूचना 24 नवंबर 2025 को जारी हुई थी और पूरी चयन प्रक्रिया उसी समय प्रभावी UGC Regulation-2016 के अनुरूप प्रारंभ की गई थी। परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद प्रक्रिया को बीच में रोकना या निरस्त करना न केवल प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है, बल्कि हजारों अभ्यर्थियों की वर्षों की मेहनत और शोध के सपनों पर भी आघात है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से वर्ष 2024 में NET उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के लिए यह निर्णय अत्यंत नुकसानदायक साबित होगा।
संदीप चौधरी ने कहा कि “जब परीक्षा पूरी पारदर्शिता और वैधानिक प्रक्रिया के तहत संपन्न हो चुकी है, तब उसे निरस्त करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। हम चाहते हैं कि विश्वविद्यालय और राजभवन छात्रों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए तत्काल साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू करें।”
कुणाल पाण्डेय ने कहा कि “यह केवल PAT-2024 का मुद्दा नहीं, बल्कि शोध और उच्च शिक्षा में विश्वास बनाए रखने का प्रश्न है। यदि एक पूरी प्रक्रिया को बीच में समाप्त किया जाएगा तो भविष्य में छात्रों का संस्थागत प्रक्रियाओं पर भरोसा कमजोर होगा। इसलिए न्यायोचित निर्णय लेते हुए नामांकन प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जानी चाहिए।”
प्रिंस राज ने कहा कि “शोधार्थी लगातार लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। हमारी मांग केवल इतनी है कि जिस नियमावली के तहत प्रक्रिया शुरू हुई, उसी के अनुसार उसे पूरा किया जाए। यदि छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय हुआ तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी।”
मयंक कुमार ने कहा कि “PAT-2024 में शामिल हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर लगा है। इस प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब से योग्य छात्रों का शैक्षणिक और शोध जीवन प्रभावित हो रहा है। हम सभी संबंधित पक्षों से शीघ्र सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा करते हैं।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शोधार्थियों ने कहा कि वे न्याय मिलने तक लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से अपना संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन एवं राजभवन से छात्रों के हित में संवेदनशील निर्णय लेने की अपील की।
• बैठक में 21 जुलाई 2026 (मंगलवार) को विश्वविद्यालय प्रांगण में एक दिवसीय धरना कार्यक्रम करने का निर्णय लिया गया।
जिसमें पैट-2026 के अभ्यर्थियों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचने की अपील की गई।
वही राज्यपाल से भी मिलकर ज्ञापन सौपने का निर्णय लिया गया।
बैठक एवं प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजेश रंजन, रचना कुमारी, सचिन कुमार, मो. कबीर, सुनील यादव, मो. मुनीब, भाई नसरूल्लाह, अभिषेक कुमार झा, प्रदीप पासवान, मिथिलेश कुमार, सुभाष कुमार, बब्लू कुमार, रामनारायण पंडित सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं अभ्यर्थी उपस्थित थे।
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