आंदोलन की आग में झोंकना शिक्षा जगत के भविष्य पर कुठाराघात : डॉ बैजू

कोरोना महामारी में भी पूरी निष्ठा के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने वाले शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों के तीन माह के वेतन एवं वेतनांतर मद की बकाया राशि के भुगतान में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गतिरोध उत्पन्न किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उक्त बातें विद्यापति सेवा संस्थान के महासचि एवं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के सिंडीकेट सदस्य डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने शुक्रवार को कही। उन्होंने बयान जारी कर कहा कि विगत कई माह से आस लगाए शिक्षकों एवं कर्मियों के वेतन, पेंशन व वेतनांतर मद की बकाया राशि के भुगतान को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा नित नए आदेश जारी कर शिक्षकों एवं कर्मियों को आंदोलन की आग में झोंकना शिक्षा जगत के भविष्य पर कुठाराघात है।
उन्होंने वेतन भुगतान में हो रही देरी के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन खासकर कुलसचिव, एफओ एवं एफए के प्रति गहरा आक्रोश जताते हुए कहा कि ऐसा करने से शिक्षकों एवं कर्मचारियों के प्रति उनकी मानसिक शोषण की प्रवृत्ति विशेष रूप से मुखर हुई है। अपने बयान में उन्होंने कुलपति, कुलाधिपति एवं बिहार सरकार से इस मामले में अविलंब हस्तक्षेप कर निराकरण करने की मांग की है।
अपने बयान में उन्होंने पटना उच्च न्यायालय के वर्ष 2015 के फैसले का हवाला देते हुए कहा है कि इस फैसले के अनुसार वेतन सत्यापन कोषांग की भूमिका मात्र अंकेक्षक की है जबकि वेतन निर्धारण की शक्ति विश्वविद्यालय के स्टेच्यूटरी बाॅडी में सन्निहित है। बावजूद इसके न्यायादेश को धत्ता बताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा किया जाना निन्दाजनक है। उन्होंने कहा कि हक और हुकूक की इस लड़ाई में वे शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के साथ हैं।
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