डेंगू एवं चिकनगुनिया के नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट : डॉ एस पी सिंह
• एसपीओ

ने सिविल सर्जन को जारी किया दिशा निर्देश
• सदर अस्पताल में 5 वर्ड का बनाया जाएगा विशेष डेंगू वार्ड
•डेंगू एवं चिकनगुनिया के पुष्टि होने पर मरीज के निवास स्थान पर टेक्निकल मलाथियौन का होगा फॉगिंग
डेंगू चिकनगुनिया प्रायः जून-जुलाई में बरसात के साथ प्रारंभ होता है डेंगू मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में पनपता है।डेंगू और चिकनगुनिया के प्रसार को रोकने के लिए विगत वर्षों की भांति तत्परता से कार्य करने के आवश्यक निर्देश अपर निदेशक राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम डॉक्टर एम.पी. शर्मा ने सिविल सर्जन को पत्र लिख कर दिया है पत्र में बताया गया है सदर अस्पताल में 5 बेड का एक विशेष डेंगू वार्ड तैयार रखा जाए डेंगू वार्ड में सभी बेडों को मच्छरदानी युक्त करना सुनिश्चित किया जाए. जिले के प्राइवेट हॉस्पिटल में भी यही व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाए अपने जिला अंतर्गत सभी निजी अस्पतालों एवं चिकित्सकों आदि को प्रत्येक डेंगू एवं चिकनगुनिया मरीज को अधिसूचित करने के संबंध में दिशा निर्देश निर्गत किया जाए। मेडिकल पैरामेडिकल एवं अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को डेंगू चिकनगुनिया बुखार के संबंध में जागरूक किया जाए. ताकि मरीजों की पहचान कर ससमय उपचार सुनिश्चित किया जा सके डेंगू चिकनगुनिया के उपचार हेतु दवा आदि की व्यवस्था सभी सरकारी अस्पताल में हमेशा उपलब्ध रखें। डेंगू एवं चिकनगुनिया बुखार के लक्षण एवं बचाव के उपाय जैसे कूलर फ्रिज के ट्रे में 1 सप्ताह से अधिक पानी न रहने देना, प्रयोग में लाए जाने वाले नारियल के खोखे आदि नष्ट करना, सोते वक्त मच्छरदानी का प्रयोग करना, दिन के वक्त मच्छर से बचने के लिए पूरी आस्तीन वाले व शरीर को ढकने वाले वस्त्र पहनना, घर के आस-पास साफ-सफाई एवं पानी की टंकियों पात्र आदि को ढककर रखने आदि से लोगों को अवगत कराने हेतु प्रचार सामग्री राज्य स्वास्थ्य समिति पटना द्वारा सभी जिलों को अति शीघ्र उपलब्ध कराया जाएग।
सभी संभावित डेंगू मरीजों को सेंटिनल सर्विलांस हॉस्पिटल रेफर न किया जाए बल्कि संभावित डेंगू मरीजों के खून की जांच कर डिफरेंशियल अकाउंट ऑफ डब्ल्यूबीसी कर उनके प्लेटलेट्स की संख्या पर नजर रखी जाए। तथा यदि मरीज के शरीर पर लाल चकत्ते दिखता दिखाई दे, मसूड़े से खून आए, पेट में दर्द एवं पैखाना काला होने लगे तो ऐसी स्थिति में उन्हें निशुल्क सरकारी एंबुलेंस सेवा 102 द्वारा नजदीक के सेंटिनल सर्विलांस हॉस्पिटल में भेजने की व्यवस्था की जाए अथवा मरीज के खून का नमूना नजदीक सेंटिनल सर्विलांस हॉस्पिटल भेजा जाए।
डेंगू चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छर एडीज के लार्वा को नष्ट करने के लिए जिला स्तर पर कार्यरत फैलेरिया इकाई द्वारा लार्वासाईडल का छिड़काव जलजमाव वाले स्थानों नालो आदि में कराना सुनिश्चित किया जाए तथा स्थानीय निकायों से मच्छर नियंत्रण के कार्य में सहयोग प्राप्त किया जाए।
लक्षणों के प्रति सावधान रहने की जरूरत :
डीएमओ डॉ एस पी सिंह ने बताया कि डेंगू एवं चिकनगुनिया की बीमारी संक्रमित एडीस मच्छर के काटने से होती है। यह मच्छर सामान्यता दिन में काटता है एवं यह स्थिर पानी में पनपता है। डेंगू का असर शरीर में 3 से 9 दिनों तक रहता है। इससे शरीर में अत्यधिक कमजोरी आ जाती है और शरीर में प्लेटलेट्स लगातार गिरने लगती है। वहीँ चिकनगुनिया का असर शरीर में 3 माह तक होती है। गंभीर स्थिति में यह 6 माह तक रह सकती है। डेंगू एवं चिकनगुनिया के लक्षण तक़रीबन एक जैसे ही होते हैं। इन लक्षणों के प्रति सावधान रहने की जरूरत है।
क्या है लक्षण:
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार नीरज कुमार सिंह ने बताया तेज बुखार, बदन, सर एवं जोड़ों में दर्द ,जी मचलाना एवं उल्टी होना ,आँख के पीछे दर्द. त्वचा पर लाल धब्बे/ चकते का निशान ,नाक, मसूढ़ों से रक्त स्त्राव ,काला मल का आना डेंगू एवं चिकनगुनिया के लक्षण है।
ऐसे करें बचाव:
• घर में साफ सफाई पर ध्यान रखें ,कूलर एवं गमले का पानी रोज बदलें
• सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें. मच्छर भागने वाली क्रीम का इस्तेमाल दिन में करें
• पूरे शरीर को ढंकने वाले कपडे पहने एवं कमरों की साफ़-सफाई के साथ उसे हवादार रखें
• आस-पास गंदगी जमा नहीं होने दें. जमा पानी एवं गंदगी पर कीटनाशक का प्रयोग करें
• खाली बर्तन एवं समानों में पानी जमा नहीं होने दें. जमे हुए पानी में मिट्टी का तेल डालें
• डेंगू के लक्षण मिलने पर तुरंत ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में संपर्क करें।

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