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बाढ़ भी ना रोक पाए मुनचुन के कदम, घर-घर जाकर लोगों को कोरोना से कर रही जागरूक

बाढ़ भी ना रोक पाए मुनचुन के कदम, घर-घर जाकर लोगों को कोरोना से कर रही जागरूक

•पानी से घिरे गांव में जाकर गर्भवती महिलाओं को कर रही चिन्हित

•कोरोना से बचाव के बारे में लोगों को कर रही जागरूक

मधुबनी/10 अगस्त

प्रलयकारी बाढ़ की चपेट में आए विस्फी प्रखंड के ग्राम बलहा के वार्ड नंबर -14 बाढ़ पीड़ितों को कोरोना के साथ बाढ़ जैसी दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ा रहा है। जिले में बाढ़ के बढ़ते खतरे के मद्देनजर के बीच स्वास्थ्य प्रशासन के सामने कोरोना के साथ बाढ़ की संभावनाओं के बीच स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की चुनौती भी बढ़ी है. वर्तमान समय में बिस्फी प्रखंड के अधिकांश गांव पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। इस दौरान सबसे अधिक परेशानियां गर्भवती महिला के सामने आई है. ऐसे में आशा कार्यकर्ता मुनचुन देवी अपने क्षेत्र में विगत कई वर्षों से बाढ़ जैसी चुनौतियों के बीच निरंतर अपनी सेवा दे रही है. कोरोना काल आए बाढ़ के कारण मुनचुन देवी दोहरी जिम्मेदारी निभा रही है. एक तरफ जहाँ वह कोरोना के प्रति लोगों को जागरूक कर रही है तो दूसरी तरफ वह बाढ़ जैसे हालात में भी वह अपने क्षेत्र में परिवार नियोजन के अस्थायी साधनों एवं गर्भवती महिला के लिए आयरन एवं कैल्शियम की गोली घर-घर जाकर उपलब्ध करा रही हैं.

टीकाकरण पर दे रही है बल:
मुनचुन देवी ने बताया कोरोना संक्रमण में टीकाकरण बाधित हुआ है. लेकिन अब धीरे-धीरे इसे पुनः सुचारू रूप से किया जा रहा है. उन्होंने बताया नियमित टीकाकरण के साथ वह बच्चों को जेई( जापानी इन्सेफ़लाईटिस) का भी टीका लगवाने में सहयोग कर रही है. उनके क्षेत्र में बाढ़ जैसी गंभीर समस्या होने के बावजूद भी वह 150 से अधिक बच्चों का जेई का टीकाकरण करवाया है.

गर्भवती महिला पर दे रही विशेष ध्यान:
मुनचुन ने बताया कोरोना एवं बाढ़ के खतरे के बीच गर्भवती महिला को अधिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है. बाढ़ के कारण प्रसव पूर्व जाँच कराने में गर्भवती महिला को समस्या का सामना करना पड़ रहा है. इसलिए वह घर-घर जाकर चिन्हित गर्भवती महिला का सामान्य प्रसव पूर्व जांच कर रही है एवं उनके संस्थागत प्रसव को लेकर तैयारियों पर जोर दे रही है. मुनचुन बताती हैं बड़ी समस्या तब होती है जब किसी गर्भवती को इस बाढ़ के पानी के बीच गर्भवती को प्रसव के लिए अस्पताल ले जाना पड़ता है। पानी के बीच प्रसूता को लेकर सड़क तक पहुंचते फिर वहां से एंबुलेंस, नीजी गाड़ी के माध्यम से अस्पताल तक ले जाते हैं। पानी के बीच सड़क तक ले जाने में कई तरह के खतरों का डर बना रहता है। लेकिन इन तमाम मुश्किलों के बाद भी वह संस्थागत प्रसव पर ही जोर देती है ताकि जच्चा एवं बच्चा स्वस्थ रहें.

कोरोना के प्रति लोगों को कर रही जागरूक:

इस दोहरी चुनौती के बीच भी स्वास्थ्यकर्मी दिन-रात लोगों को जागरूक करने तथा संक्रमण का फैलाव रोकने में लगे हुए हैं मुनचुन देवी विषम परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ रही हैं. कोरोना काल की जब शुरुआत हुई थी तो उस समय से वह लोगों को जागरूक कर रही थी. कोरोना संक्रमण के शुरुआती दौर में इनके गांव में दर्जन से ज्यादा प्रवासी मजदूर आए थे जिन्हें गांव में बने क्वॉरेंटाइन सेंटर में उन्होंने भेजा। अभी वर्तमान समय में वह घर-घर जाकर लोगों से कोरोना से बचाव तथा की जानकारी दे रही है. संक्रमित पाए गए मरीजों की होम आइसोलेशन में उनकी निगरानी एवं जरूरत पड़ने पर उनकी देखभाल भी वह करती है. साथ ही वह प्रतिदिन अपने कार्यक्षेत्र में लोगों को शारीरिक दूरी के महत्व के बारे में बताती हैं. लोगों को भीड़ वाली जगहों पर नहीं जाने की सलाह देती हैं. वह कहती हैं, लोगों को हाथों की सफाई का सही तरीका बताना एक अहम कार्य है. गांव में लोग अधिक हाथ साफ करने के आदि नहीं हैं.लेकिन धीरे-धीरे लोगों में बदलाव दिख रहे हैं. लोग अपने मुंह एवं नाक को ढंकने के साथ हाथों की भी सफाई कर रहे हैं.

बीमार होने पर भी उत्साह में नहीं आई कमी:

मुनचुन देवी को हौसला देखकर गांव वाले उनके हौसले की प्रशंसा कर रहे हैं. मुनचुन ने बताया लगातार बाढ़ में फील्ड विजिट करने के क्रम में वह बीमार पड़ गई एवं अभी तक वह बीमारी से उबर नहीं पाई हैं. वह कहती हैं उन्हें डर हो रहा था कि कहीं वह कोरोना से संक्रमित तो नहीं हो गयी. यद्यपि कोरोना की जाँच में रिपोर्ट नेगेटिव आई है. उन्होंने बताया बीमार होने के बाद भी उनका हौसला कमा नहीं है. वह जैसे ही स्वस्थ होंगी फिर अपने कार्य में जुट जाएंगी.

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