कोरोना महामारी में मन रहेगा स्वस्थ, तभी बच्चे की सेहत रहेगी दुरुस्त
• संक्रमण
के मद्देनजर गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं को रखना होगा विशेष ध्यान
• बीमार होने की स्थिति में निकटवर्ती सरकारी अस्पताल मैं डॉक्टर से ले सलाह
दरभंगा/ 12, अगस्त: गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद मानसिक स्वास्थ्य का बेहतर रहना स्वस्थ मां और शिशु दोनों के लिए जरूरी है। कोरोना के तेजी से बढ़ते प्रकोप के बीच गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं की मानसिक तकलीफें बढ़ी हैं। इससे गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर बढ़ने की संभावना भी बढ़ी है. साथ में स्तनपान कराने वाली माताओं के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है. इस लिहाज से गर्भवती महिलाओं एवं धात्री माताओं को अपने मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है.
संक्रमण से डरे नही, रहें सावधान:
कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण गर्भवती महिलाओं की मानसिक परेशानियाँ बढ़ी है. गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य पर संक्रमण का प्रभाव, संस्थागत प्रसव कराने एवं प्रसव पूर्व जाँच के लिए अस्पताल जाने में भय जैसी समस्याओं के ही कारण उनका मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ रहा है. यद्यपि, आम लोगों की तरह संक्रमण फैलने का खतरा गर्भवती महिलाओं को भी है. लेकिन अभी तक किसी प्रमाणिक शोध से इस बात की पुष्टि नहीं हुयी है कि गर्भस्थ शिशु को माँ के जरिये संक्रमण फैल सकता है. इसलिए गर्भवती महिलाओं को अधिक डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि कोरोना से बचाव के उपायों का सतर्कता से पालन करने की जरूरत है.
खुद को प्रोत्साहित करना होगा:
मनोचिकित्सक डॉ सुनील कुमार ने बताया गर्भवती महिलाओं को अधिक सकारात्मक सोच रखने की जरूरत है. ऐसे दौर में जहाँ प्रत्येक दिन कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं, उन्हें बढ़ते मामलों की जगह कोरोना से ठीक होने वाले लोगों के आंकड़ों को जानने का प्रयास करना चाहिए. इससे उन्हें खुद को सकारात्मक रखने में मदद मिलेगी. साथ ही कोरोना काल में भी अधिकांश प्रसव सुरक्षित ही हो रहे हैं. इसलिए उन्हें प्रसव को लेकर भी डरने की जरूरत नहीं है. गर्भवती महिलाओं को चाहिए कि वे घर में लोगों से संवाद करती रहें. न्यूज़ चैनल पर कोरोना की ख़बरों को अधिक देखने से बचें एवं पौष्टिक आहार का सेवन जारी रखें. गर्भावस्था के दौरान योग एवं ध्यान भी मानसिक परेशानियों को दूर करने में सहायक हो सकता है.
ज़रूरी होने पर अस्पताल जाएं:
गर्भावस्था के दौरान बेवजह महिलाओं को अस्पताल जाने से बचना चाहिए. इस दौरान महिलाएं चिकित्सक के संपर्क में रहें एवं उनसे कॉल पर भी बात करते रहें. यदि कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो तभी अस्पताल जाएं. प्रसव पूर्व जाँच गर्भावस्था के दौरान जरुरी है. इसके लिए आशा एवं एएनएम के संपर्क में रहें एवं नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या आरोग्य दिवस पर प्रसव पूर्व जाँच जरुर कराएँ.अस्पताल में संक्रमण के मद्देनजर सावधान रहें। बिना मास्क पहने अस्पताल न जाएँ. संभव हो तो साथ में सैनिटाइजर भी रखें एवं इसका इस्तेमाल करते रहें. अन्य मरीज़ों से दूरी बनाकर रखे। अनावश्यक चीजों को मत छुए। डॉक्टर से मिलने के बाद तुरंत घर लौट जाएं।घर वापस आने के बाद साबुन एवं पानी से 30 सेकंड तक हाथों को अच्छी तरह साफ़ करें. उसके बाद ही सामान्य कार्य करें.
संस्थागत प्रसव की पूर्व में करें तैयारी:
कोरोना संक्रमण के इस दौर में संस्थागत प्रसव की पूर्व में तैयारी करना काफ़ी जरुरी है. इसके लिए गर्भवती महिला के परिवार को अधिक सजग रहने की जरूरत है. आशा एवं एएनएम को प्रसव की संभावित तिथि के बारे में पहले से सूचित करें यदि उन्हें इसकी जानकारी नहीं हो तो. साथ ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में भी आशा एवं एएनएम के सहयोग से प्रसव सेवाओं की जानकारी भी प्राप्त कर लें. कोरोना के मद्देनजर सरकार ने गर्भवती महिलाओं को एम्बुलेंस की विशेष सुविधा उपलब्ध करा रही है. इसके विषय में भी पूरी जानकारी रखें. एम्बुलेंस का नंबर एवं क्षेत्र की आशा एवं एएनएम का मोबाइल नंबर अपने पास जरुर रखें।

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