जिले में चलाया जा रहा जेई टीकाकरण अभियान, शत प्रतिशत लक्ष्य पूरा होने के बाद नियमित टीकाकरण अभियान में किया जाएगा शामिल
• 17.47 लाख के विरुद्ध 5 लाख 03 हजार 499 बच्चों को किया गया है प्रतिरक्षित.
• 1 वर्ष से 15 वर्ष तक के सभी बच्चों को दिया जा रहा है टीका
मधुबनी ,12 अगस्त:
जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस टीकाकरण अभियान सुचारू रूप से चलाया जा रहा है. इसके अंतर्गत 01 वर्ष से 15 वर्ष तक के सभी बच्चों का टीकाकरण किया जा रहा है. विदित हो कि जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस टीकाकरण अभियान की शुरुआत सिविल सर्जन डॉ. सुनील कुमार झा द्वारा 17 जून से बच्चे को टीका लगाकर की गई थी. जिले में अबतक कुल 5.03 लाख से अधिक बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है. अन्य बच्चों के लिए टीकाकरण कार्यक्रम जारी है.
5.03 लाख से अधिक बच्चों का हुआ है टीकाकरण :
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. एस. के. विश्वकर्मा ने बताया 17 जून से कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी. जिले में अब तक कुल 5.03 लाख बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है, जिसमें 2.56 लाख किशोर तथा 2.46 लाख किशोरी के टीकाकरण हुआ है. इनमें 1 से 5 वर्ष तक के 2.87 लाख बच्चे, 5 वर्ष से 10 वर्ष के 1.37 लाख बच्चे तथा 10 वर्ष से 15 वर्ष के कुल 78336 बच्चे शामिल हैं. इन सभी बच्चों के टीकाकरण हेतू कुल 5.04 लाख वेक्सीन का इस्तेमाल किया गया है. टीकाकरण के लिए आंगनवाड़ी केंद्र के साथ-साथ अन्य टीकाकरण स्थलों का उपयोग किया जा रहा है.
टीकाकरण के दौरान रखा जा रहा कोविड-19 से बचाव का खयाल :
जापानी इंसेफेलाइटिस टीकाकरण अभियान के दौरान कोविड-19 से बचाव का भी खयाल रखा जा रहा है. टीकाकरण के समय बच्चों को सोशल डिस्टेनसिंग नियम का पालन करते हुए दूरी बनाकर पंक्तियों में रखा जाता है. टीकाकरण के अधिकारियों व आशा कर्मियों द्वारा मास्क, ग्लव्स का प्रयोग करने आदि का विशेष तौर से खयाल रखा जा रहा है. टीकाकरण में शामिल सभी अधिकारी व कर्मी प्रशिक्षित हैं एवं उन्हें टीकाकरण संबंधित सभी जानकारी जैसे टीका के रख-रखाव एवं दिए जाने वाले डोज आदि की जानकारी दी गयी है.
क्या है जापानी इंसेफेलाइटिस:
यूनिसेफ एसएमसी प्रमोद कुमार झा ने बताया इन्सेफेलाइटिस को जापानी बुखार के नाम से भी जाना जाता है, यह एक प्रकार का दिमागी बुखार है जो वायरल संक्रमण के कारण होता है यह संक्रमण ज्यादा गंदगी वाली जगह पर पनपता है साथ हा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। हर साल बिहार समेत कई राज्यों में इस बिमारी के कारण नवजात शिशुओं के साथ बच्चों की मृत्यु हो जाती है ।
जपानी इन्सेफेलाइटिस के लक्षण:
जापानी इन्सेफेलाइटिस में बुखार होने पर बच्चे की सोचने, समझने, और सुनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है. तेज बुखार के साथ बार- बार उल्टी होती है. यह बिमारी अगस्त , सितंबर और अक्टूबर माह में ज्यादा फैलता है और 1 से 15 साल की उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में लेता है.
ज़िला प्रतीक्षण पदाधिकारि डॉ. एस. के. विश्वकर्मा ने बताया जहां जे.ई. कैंपेनिंग नहीं हुआ है वहां नियमित टीकाकरण के दिन सत्र स्थल पर टीके लगेंगे कंटेंटमेंट जोन में जहां कैंपेनिंग नहीं चलाया गया था वहां कंटेंटमेंट खत्म होने के बाद कैंपेनिंग किया जाएगा। लक्ष्य 100% पूरा होने के बाद जेई टीकाकरण को नियमित टीकाकरण में सम्मिलित किया जाएगा। विश्वकर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि यूनिसेफ एसएमनेट के द्वारा इसमें व्यापक सहयोग दिया जा रहा है । एफएलडब्ल्यू को प्रशिक्षण देने , सहयोगातमक पर्यवेक्षण कार्य करने तथा समुदाय को विशेष रूप से टीकाकरण के प्रति जागरूकता लाने में यूनिसेफ की टीम सक्रिय भागीदारी निभा रहा है ।

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