बोतल मुक्त परिसर है सदर अस्पताल, स्तनपान के लिए जागरुकता जरूरी
– प्रसव कक्ष में उपलब्ध है स्तनपान कक्ष
– स्तनपान कक्ष में महिलाएँ सुरक्षित रूप से करा सकती हैं स्तनपान
– प्रसव के 1 घंटे के अंदर मां का दूध पिलाना जरूरी
– मां

को स्तनपान के लिए किया जाता है प्रेरित
मधुबनी/14 अगस्त।
नवजात शिशुओं के सर्वांगीण और बौद्धिक क्षमता के विकास के लिए स्तनपान बहुत जरूरी है। स्तनपान नवजात व शिशु मृत्यु दर में कमी लाता है। साथ ही स्तनपान डायरिया, निमोनिया व कुपोषण से बच्चों को सुरक्षित रखने में कारगर साबित होता है। स्तनपान का मुख्य उद्देश्य नवजात एवं शिशुओं में बेहतर पोषण को सुनिश्चित कराना है। साथ ही उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर उन्हें संक्रामक रोगों के प्रति सुरक्षित करना है। जिला योजना समन्वयक मनीष भास्कर ने बताया, बोतल से दूध पिलाने से बच्चों को कई प्रकार के संक्रमण का खतरा रहता है। स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए सदर अस्पताल में नवजात शिशु को बोतल से दूध पिलाने के लिए रोक लगाई गई है। साथ ही बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं नवजात शिशु मृत्यु दर में कमी लाने एवं कुपोषण से बचाने में स्तनपान के महत्व को बताने के लिए सदर अस्पताल में स्तनपान कक्ष बनाया गया है।
अस्पताल परिसर को बोतल दूध मुक्त घोषित किया गया:
जिला योजना समन्वयक मनीष भास्कर ने बताया यदि विशेष परिस्थिति में बच्चे को स्तनपान नहीं कराया जा सके तो चम्मच कटोरी की मदद से बच्चे को माँ का दूध पिलाना चाहिए ना की बोतल से। स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए सदर अस्पताल को बोतल दूध मुख्य परिसर घोषित किया गया है। अस्पताल में आने वाली महिलाओं व परिजनों को स्तनपान के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने बताया, सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष में स्तनपान कक्ष उपलब्ध है। तथा प्रत्येक पीएचसी में स्तनपान कक्ष का स्थापना किया जाएगा।
स्तनपान कक्ष में महिलाएँ सुरक्षित रूप से करा सकती हैं स्तनपान:
मनीष भास्कर ने बताया स्तनपान कक्ष सुविधा उपलब्ध होने के बाद महिलाएँ अपने शिशु को सुरक्षित रूप से स्तनपान करा सकती हैं। स्तनपान कक्ष में किसी प्रकार का संक्रमण भय नहीं रहता है। इसके लिए कक्ष के अंदर स्तनपान कॉर्नर बनाया गया है जहां महिलाएँ अपने शिशु को पूरी सुरक्षा के साथ स्तनपान करा सकती हैं।
नवजात को 1 घंटे के अंदर स्तनपान कराना जरूरी :
स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रवृत्ति मिश्रा ने बताया नवजात को मां का पहला गाढ़ा व पीला दूध अवश्य पिलायें. यह एंटीबॉडीज व प्रोटीन से भरपूर होता है और बीमारियों से रक्षा करता है. समुचित स्तनपान करने वाले बच्चों में मोटापा, उच्च रक्त चाप एवं डायबिटीज होने की संभावना कम होती है. यह मां के स्वास्थ्य की भी रक्षा करता है. लेबर रूम इंचार्ज माधुरी कुमारी ने बताया गर्भवती महिला के प्रसव के 1 से 3 मिनट के अंदर शिशु कौड को काटते हैं और काटने के बाद बच्चे को तुरंत मां के पेट पर ही रखकर ब्रेस्टफीडिंग करवाते हैं वैसा बच्चा जो तुरंत नहीं रोता है उसको वार्मर में रखा जाता है जहां 1 घंटे के बाद बच्चे की स्थिति को देख मां का दूध पिलाने के लिए प्रेरित करते हैं।
मां को स्तनपान के लिए किया जाता है प्रेरित:
माधुरी कुमारी ने बताया प्रसव कक्ष में ही प्रसव के तुरंत बाद मां को बताते हैं कि 6 माह तक शिशु को सिर्फ मां का दूध देना है बाहरी आहार कुछ भी नहीं देना है। स्तनपान कराने से माँ का वजन प्राकृतिक रूप से कम होता है। साथ ही स्तनपान कराने से स्तन कैंसर का खतरा नहीं होता है और बच्चे का प्रतिरोधक क्षमता बढ़ता है।
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