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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की पुण्य स्मृति में विद्यापति सेवा संस्थान ने किया श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की पुण्य स्मृति में विद्यापति सेवा संस्थान ने किया श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

विद्यापति

अजित कुमार सिंह

सेवा संस्थान के तत्वावधान में रविवार को एमएमटीएम काॅलेज के सभागार में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की दूसरी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। सभा में उपस्थित लोगों ने दिवंगत पुण्यात्मा के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
सभा को संबोधित करते हुए स्नातकोत्तर भूगोल विभाग के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ टुनटुन झा अचल ने स्वर्गीय वाजपेयी के सपनों का मिथिला बनाने के लिए संगठित होकर मिथिला-मैथिली के विकास की मांगों को सही प्लेटफार्म पर रखे जाने को समय की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि अष्टम अनुसूची में शामिल भाषा के अधिकारों का चिंतन करते हुए मिथिला को विकास की पटरी पर लाने के लिए हमें एकजुट होकर प्रयास करना होगा। उन्होंने मौके पर वाजपेयी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर केन्द्रित अपनी कविता का पाठ भी किया।
वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा ने कहा कि वाजपेयीजी के अथक प्रयास से मैथिली को मिला संवैधानिक अधिकार अब मूर्त्त रूप पाने लगा है। नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक शिक्षा में मैथिली की पढ़ाई को जगह मिलने से धरोहर लिपि मिथिलाक्षर के संरक्षण व संवर्धन सहित मैथिली के राजकाज की भाषा बनने का मार्ग भी सुगम होने की उम्मीदें अब बढ़ गई हैं । लेकिन इसके लिए मिथिला और मिथिला के बाहर रहने वाले सभी मैथिलीभाषी को अपने अधिकार एवं कर्तव्य का बोध करना होगा ।
प्रवीण कुमार झा ने बदले हालातों में मिथिला ने क्या खोया और क्या पाया, इस पर विचार-विमर्श करते हुए अपने अधिकार के प्रति मैथिलों से मातृभूमि, मातृभाषा एवं मातृलिपि के उत्थान के लिए एकनिष्ठ भाव से आगे आने का आह्वान किया। विनोद कुमार झा ने स्वर्गीय वाजपेयी को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें मैथिली व मिथिला के विकास का पैरोकार बताया।
इससे पूर्व विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डाॅ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने द्वितीय राजभाषा के रूप में मैथिली को दर्जा देकर राजकाज की भाषा के रूप में इसे स्थापित करने, आकाशवाणी व अन्य दूरसंचार माध्यमों में अन्य भाषाओं के साथ-साथ मैथिली में भी अनिवार्य रूप से उद्घोषणा शुरू किए जाने सहित मिथिला क्षेत्र के सभी प्रमुख संस्थानों में अन्य भाषाओं के साथ मिथिलाक्षर में भी नामपट लगाये जाने का प्रस्ताव रखा। अपने संबोधन में उन्होंने कवि कोकिल विद्यापति एवं पं सुरेन्द्र झा सुमन के प्रतिमा स्थल के रखरखाव के प्रति प्रशासनिक उदासीनता की बात भी रखी। जिस पर विद्यापति सेवा संस्थान के सचिव प्रो जीवकांत मिश्र, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अमलेन्दु शेखर पाठक एवं कवि दिनेश झा ने साथ मिलकर इस कार्य को पूरा करने की घोषणा की।
अध्यक्षीय संबोधन में एमएलएसएम काॅलेज के प्रधानाचार्य डॉ विद्यानाथ झा ने मातृभाषा मैथिली के प्रति मिथिला के लोगों में कम हो रहे भावनात्मक आकर्षण के प्रति चिंता जाहिर की।
स्वर्गीय वाजपेयी के कृतित्व एवं व्यक्तित्व से संदर्भित सूचनाओं की प्रस्तुति के साथ साहित्यकार डॉ अमलेन्दु शेखर पाठक के कुशल संचालन में आयोजित कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन एमएमटीएम कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ उदय कांत मिश्र ने किया। इस अवसर पर प्रो जीवकांत मिश्र, प्रो विजय कांत झा, प्रो चन्द्र शेखर झा बूढाभाई, डॉ गणेश कांत झा, राजन कुमार झा, दिलीप कुमार झा आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

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