मिथिला मखान के लिए गांव-गांव में जन जागरण अभियान चलायेगा विद्यापति सेवा संस्थान
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मिथिला
के सांस्कृतिक एवं भौगोलिक पहचान के प्रतीक मखान का जीआई टैग ‘मिथिला मखान’ के नाम से दर्ज कराने के लिए विद्यापति सेवा संस्थान जन सहयोग और जन जागरण के केंद्र में ‘ग्रामशक्ति’ को रखते हुए आगामी 25 सितम्बर से दो अक्टूबर गांधी जयंती तक गांव-गांव मे जन जागरण अभियान चलायेगा। यह घोषणा मंगलवार को विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने की।
उन्होंने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना को ध्यान में रखते हुए शासन प्रशासन द्वारा निर्धारित सभी नियमों का पालन करते हुए मिथिला के जन-जन के मत को ग्रामीण इकाई के जन प्रतिनिधियों यथा, मुखिया, सरपंच एवं वार्ड सदस्यों से अभिमत पत्र संकलित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि संस्थान के जन जागरण अभियान का प्रतीक चिह्न ‘एक आंजुर मखान’ होगा। जिसका प्रदर्शन आगामी गांधी जयंती के अवसर पर दुनिया भर में रह रहे मिथिलावासी सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर अधिक से अधिक लोगों के बीच शेयर कर करेंगे।
मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमला कांत झा ने कहा कि जन जागरण अभियान के तहत संस्थान की ओर से प्रत्येक गांव में अपनी बात रखी जाएगी तथा बाढ़ आपदा और पलायन की समस्या के साथ-साथ मखान उत्पादन तथा मिथिला मखान के विभिन्न पहलुओं पर मिथिला के हर घर, समाज और बाजार आदि में व्यापक चर्चा के माध्यम से मिथिला मखान ‘ नाम से जीआई टैग के लिए जनमत तैयार किया जाएगा।
एमएलएसएम कालेज के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ अनिल कुमार झा ने कहा कि हालांकि संस्थान ने इस अभियान के तहत ग्राम-शक्ति को केन्द्र में रखा है। लेकिन, साथ ही सभी सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, व्यावसायिक, छात्र संगठन, किसान और मत्स्य कल्याणकारी संस्था के साथ-साथ मिथिला-मैथिली से जुड़े विभिन्न नगरों एवं महानगरों में सक्रिय सभी संस्थानों व मंच से ‘मिथिला मखान’ के विषय पर मुखर होकर अपना पक्ष व्यापक रूप से प्रेषित करने पर भी विशेष जोर रहेगा।
उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान मिथिला के आमलोगों को जागरूक किया जाएगा कि किस प्रकार मखान के वैश्विक उत्पादन का 85% मिथिला में होता है। जल प्रलय से प्रभावित मिथिला क्षेत्र की मृदा मिट्टी और जलवायु की विशिष्टता इसका प्रमुख कारण है। इस दुर्लभ वनस्पति के उत्पादन से जुड़े किसान तथा मत्स्य पालक को अपने श्रम का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है और वह बेहद कठिन परिस्थितियों में हमारी इस धरोहर को संजोए हुए हैं।
संस्थान के सचिव प्रो जीवकांत मिश्र ने कहा कि जिस लोक संस्कृति को हमारे ग्रामीण समाज में अनेक अभाव होते हुए भी सहेज कर रखा गया, उसका जीआई टैग केवल क्रय-विक्रय के उद्देश्य से किया जाना सर्वथा अनुचित है। उन्होंने कहा कि इस जन जागरण का मुख्य आधार लोक संस्कृति के गौरव का अवसर सभी को समान रूप से मिलने के प्रति अलख जगाने पर केन्द्रित होते हुए मखान के जीआई टैग के लिए ‘मिथिला मखान’ के नाम पर जनमत संग्रह करना होगा।
मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने कहा कि इस जन जागरण के दौरान लोगों को बताया जाएगा कि जीआई टैग के लिए उत्पाद के साथ क्षेत्र विशेष का नाम भौगोलिक पहचान के लिए कैसे प्रयोग होता है और इससे उत्पाद की विशिष्टता और क्षेत्र की विविधता किस प्रकार उजागर होती है। उन्होंने कहा कि लोगों को बताया जाएगा कि ‘सिलाव खाजा’ और ‘मगही पान’ को किस प्रकार उसके भौगोलिक पहचान के आधार पर उनके नाम से जीआई टैग दिया गया, लेकिन जब मिथिला के मखान की बारी आई तो मिथिला के भूगोल एवं संस्कृति के प्रतीक मखान के नाम पर किस प्रकार की साजिश रची जा रही है।
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