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Darbhanga सावधान रहें खतरा अभी टला नहीं, अनलॉक में भी हो सकता है संक्रमण अजित कुमार सिंह की रिपोर्ट

सावधान रहें खतरा अभी टला नहीं, अनलॉक में भी हो सकता है संक्रमण
– लॉकडाउन खत्म होने के बाद भी विशेष सवाधानी की है जरुरत
– संक्रमण से बचाव के लिए सरकारी गाइडलाइन का रखें ध्यान

दरभंगा,
कोरोना के संक्रमण के बीच आम जन जीवन पटरी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इसके लिए हर एक इंसान का जागरुक होना जरुरी है। अनलॉक में खतरा टला नहीं है और इस कारण सरकार द्वारा सभी गाइडलाइन का पालन काफी आवश्यक है। अनलॉक 4 की शुरुआत के साथ अब धीरे-धीरे बस, कैब, ट्रेन सहित सभी सार्वजिन वाहनों को चलाने की अनुमति दी जा रही है। ऐसे में कोरोना की चेन को तोड़ना भी बड़ी चुनौती है। इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो संक्रमण का ग्राफ बढ़ सकता है। ऐसे में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरुक करने में लगा। सार्वजनिक स्थानों पर मास्क लगाने के साथ शारीरिक दूरी बनाने की अपील की जा रही है।

– यात्रा के दौरान और भी सतर्कता ज़रूरी
बसों और ट्रेनों में सबसे ज्यादा संक्रमण का खतरा है। डीएमसीएच के कोरोना नोडल आफिसर डॉ अहसन हमीदी ने बताया कि एक बस में एक कोविड-19 संक्रमित व्यक्ति अन्य सवार को संक्रमित कर सकता है। बस के अंदर संक्रमण का खतरा बहुत ही ज्यादा होता है। बसों और ऐसे सार्वजनिक वाहन जहां का वातावरण बंद हो या फिर जहां-जहां एयर यानी हवा का वेंटिलेशन कम हो वहां संक्रमण का खतरा दोगुना हो जाता है। ऐसी स्थिति में अब अनलॉक के दौरान सार्वजनिक वाहनों की सवारी काफी सावधानी से करना होगा। अनलॉक में कोरोना वायरस का सबसे ज्यादा खतरा पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर ही है और लापरवाही में यहीं से तेजी से कोरोना फैल सकता है। इसलिए यात्रा के दौरान हमें बहुत ही ज्यादा सतर्कता बरतने की आवश्यकता है, या फिर अगर संभव हो तो ज्यादा से ज्यादा अपने निजी वाहनों से ही यात्रा करें जो कि संक्रमण के खतरे से दूर रख सकता है।

– बिना लक्षण वालों से अधिक है संक्रमण का खतरा
डॉ हमीदी ने बताया कि एसिम्प्टोमैटिक’ मामले में कोरोना के कोई लक्षण मौजूद नहीं रहते हैं। किसी को बुख़ार, खासी, सांस की शिकायत नहीं रहती। उनको पता ही नहीं रहता कि वो कोरोना लेकर घूम रहे हैं। ये और भी ख़तरनाक है। कोरोना फैल चुका है और किसी को पता भी नहीं चलता कि वो कोरोना के शिकार हो चुके हैं। डॉ हमीदी ने बताया कि डब्लूएचओ के मुताबिक़ कोरोना संक्रमण फैलने के ये कारण सकते हैं।

1. सिम्प्टोमैटिक-
वे लोग जिनमें कोरोना के लक्षण देखने को मिले और फिर उन्होंने दूसरों को इसे फैलाया। ये लोग लक्षण दिखने के पहले तीन दिन में लोगों को कोरोना फैला सकते हैं।
2. प्री सिम्प्टोमैटिक –
वायरस के संक्रणम फैलाने और लक्षण दिखने के बीच भी कोरोना का संक्रमण फैल सकता है। इसकी समय सीमा 14 दिन की होती है, जो इस वायरस का इंक्यूबेशन पीरियड भी है। इनमें सीधे तौर पर कोरोना के लक्षण नहीं दिखते, लेकिन हल्का बुख़ार, बदन दर्द जैसे लक्षण शुरुआती दिनों में दिखते हैं।
3. एसिम्प्टोमैटिक –
जिनमें किसी तरह के लक्षण नहीं होते लेकिन वो कोरोना पॉज़िटिव होते हैं और संक्रमण फैला सकते है। दुनिया के बाक़ी देशों में भी एसिम्प्टोमैटिक मामले देखने को मिले हैं और भारत में इनकी संख्या अधिक है।

– कोरोना से बचाव के लिए दूसरों को भी करें प्रेरित
कोरोना वायरस का संक्रमण अभी कम नहीं हो रहा है। जबकि अनलॉक-4 में सरकार ने लोगों को तमाम सुविधा देनी शुरु कर दी है। बाजार, दुकानें, प्रतिष्ठान आदि खुल रहे हैं। बाजारों में भीड़भाड़ है। ऐसे में सतर्ककता और विशेष सावधानी से ही कोरोना से बचा जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में अब अधिक फैलना शुरु हो गया है। ऐसे में शासन की गाइड लाइन का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए। कोरोना के संक्रमण से बचाव को लेकर सावधानी बरतने के लिए दूसरों को भी प्रेरित करना चाहिए। इस वायरस को लेकर फैल रही भ्रांतियों के प्रति भी लोगों को जागरुक करना जरूरी है।

– मास्क का इस्तेमाल अब और भी ज़रूरी
लाकडाउन समाप्त होने के बाद लोगो को और भी सतर्कता बरतनी चाहिए। इस परिस्थिति में पहले से ज़्यादा सावधानी बरतनी होगी। कोरोना से पूरी तरह से बचाव के लिए बिना मास्क व बिना वजह घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचाए जाए तथा कोरोना के प्रति सतर्कता जरूरी है। किसी कार्यक्रम आदि में जाने से बचा जाए। अगर जरुरी है तो संक्रमण को लेकर जागरुक रहें और मास्क आदि लगाकर ही घर से बाहरनिकलें। इसके अलावा सैनिटाइजर का प्रयोग किया जाना चाहिए तथा हाथों को बार-बार साबुन या हैंडवॉश से धोया जाना चाहिए।

– चिकित्सक से सलाह के लिए अस्पताल से करें संपर्क
कोरोना काल में किसी भी शारीरिक परेशानी होने पर निकट के पीएचसी या डीएमसीएस से संपर्क किया जा सकता है। अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टर एवं कर्मियों की ड्यूटी सुनिश्चित की गई है, जो मरीजों को परामर्श देने के लिए मौजूद रहते हैं। वहां पहुंचने पर कोरोना संदिग्ध मरीज की पूछताछ की जाती है। किसी प्रकार की यात्रा एवं अन्य कोरोना संक्रमितो के संपर्क में आने की बावत जानकारी ली जाती है, उसके उपरांत संबंधित व्यक्ति की कोरोना जांच या सामान्य चिकित्सा शुरू की जाती है।

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