वर्चुअल मोड में शुरू हुआ मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान का 7 वां स्थापना दिवस समारोह
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सितंबर से शुरू हुआ यह समारोह 11 अक्टूबर तक चलेगा।
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मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के सातवें स्थापना दिवस के अवसर पर वर्चुअल मोड में आयोजित पाक्षिक समारोह का शुभारंभ बृहस्पतिवार की देर शाम शहर के शुभंकरपुर स्थित श्मशान काली मंदिर परिसर में किया गया। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ वरिष्ठ साहित्यकार व भारत निर्वाचन आयोग के दरभंगा जिला स्वीप आईकाॅन मणिकांत झा, आकाशवाणी दरभंगा के चर्चित गायक दीपक कुमार झा एवं मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के वरिष्ठ संरक्षक प्रवीण कुमार झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
मौके पर मणिकांत झा ने कहा कि वर्तमान समय में मिथिला, मैथिली और मिथिलाक्षर के सूरत-ए-हाल मिथिलावासियों को आत्मावलोकन करने की जरूरत है। यदि हम अपनी मातृलिपि का प्रयोग दैनिक कार्यों में नहीं करेंगे, तो यह पुनः मृतप्राय हो जाएगी। उन्होंने विलुप्ति की कगार पर खड़ी हो चुकी मिथिला की धरोहर लिपि मिथिलाक्षर को सोशल मीडिया के माध्यम से पुनर्जीवित करने में मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के संस्थापक पं अजय नाथ झा शास्त्री के योगदान को अविस्मरणीय बताते कहा कि इस कार्य के लिए मिथिला के इतिहास में उनका नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। मौके पर उन्होंने मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान से संदर्भित रचनाओं के अतिरिक्त अन्य रचनाएं भी गाकर सुनाया।
मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के वरिष्ठ संरक्षक प्रवीण कुमार झा ने अभियान के गतिविधियों की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि मिथिलाक्षर की शत-प्रतिशत साक्षरता के प्रति इस अभियान से जुड़ा एक-एक अभियानी कृतसंकल्प है। लेकिन, मिथिलाक्षर को व्यवहार में लाना संपूर्ण मिथिलावासी की जिम्मेवारी है। उन्होंने मिथिलाक्षर के प्रचार के लिए आमलोगों के साथ ही व्यवसायिक एवं शैक्षणिक संस्थानों को आगे आने का आह्वान किया। अपने संबोधन में उन्होंने 24 सितंबर से 11 अक्टूबर तक चलने वाले स्थापना दिवस समारोह की विस्तृत जानकारी देते बताया कि इस दौरान अनेक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
अभियान के संरक्षक जगत रंजन झा के संचालन में आयोजित समारोह में गंधर्व कुमार ने वेद ध्वनि प्रस्तुत किया। जबकि दीपक कुमार झा के गाए गणेश वंदना, मिथिला वर्णन एवं नचारी गीतों को देश-विदेश से जुड़ने वाले दर्शकों ने काफी पसंद किया। कार्यक्रम के आयोजन में कृष्ण कांत झा, हरे कृष्ण झा, उग्रनाथ झा आदि की उल्लेखनीय सहभागिता रही। धन्यवाद ज्ञापन अभियान के निर्देशक नरेंद्र झा ने किया।
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