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विद्यापति सेवा संस्थान के प्रस्ताव पर नीति आयोग ने लिया संज्ञान। अजित कुमार सिंह की रिपोर्ट

विद्यापति सेवा संस्थान के प्रस्ताव पर नीति आयोग ने लिया संज्ञान
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नेशनल एग्रो कॉरिडोर की स्थापना के संभावनाओं की समीक्षा के लिए खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय को अग्रसारित किया प्रस्ताव
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कृषि क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं को नया आयाम देने के लिए ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर की तर्ज पर नेशनल एग्रो कॉरिडोर की स्थापना किए जाने संबंधी विद्यापति सेवा संस्थान के प्रस्ताव पर नीति आयोग ने त्वरित संज्ञान लेते हुए इस दिशा में अग्रेतर कार्यवाही के लिए प्रस्ताव को खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय को अग्रसारित कर दिया है । उक्त आशय का पत्र नीति आयोग की वरिष्ठ सलाहकार डॉ नीलम पटेल ने संस्थान के महासचिव के नाम प्रेषित किया है।
यह जानकारी देते हुए विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने बताया कि भारत में सर्वाधिक रोजगार के अवसर कृषि क्षेत्र में है और कृषि की उन्नति से बहुआयामी सकारात्मक प्रभाव पड़ना निश्चित है। यदि हम बिहार और मिथिला क्षेत्र की बात करें तो हमारे यहां उपजाऊ मिट्टी, अनुभवी व मेहनती किसानों के साथ-साथ जल स्रोत के रूप में दर्जनों नदियां हैं। बस, इसे सुव्यवस्थित करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि बिहार में हॉर्टिकल्चर की अपार संभावनाएं हैं। ऐसे में देश की संसद द्वारा कृषि बाजार में उदारीकरण के लिए पारित बिल हमारे उत्पाद को देश भर की बाजार में लाभ दिलाने में सक्षम है और ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर जैसी आधारभूत संरचनाओं से कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार की संभावना जगी है और इस दिशा में नेशनल एग्रो कोरिडोर की स्थापना से इन संभावनाओं को बल मिलना निश्चित है।
नेशनल एग्रोकाॅरिडोर की स्थापना के संदर्भ में संस्थान की ओर से तकनीकी मसौदा तैयार करने वाले अर्थशास्त्री एवं एमएलएसएम कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य डाॅ अनिल कुमार झा ने कहा कि नेशनल एग्रोकाॅरिडोर एक ऐसी परिकल्पना है जिससे ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर के समीपवर्ती इलाके में आधुनिक कृषि की संभावनाओं को काफी बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि यदि डिब्रूगढ़ अथवा सिलचर से उत्तर प्रदेश के लखनऊ तक ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर के क्षेत्र को नेशनल एग्रोकाॅरिडोर घोषित किया जाए तो वार्षिक बजट में वरीयता एवं निजी निवेश के सुनिश्चित लाभ अनिवार्य रूप से प्राप्त हो सकेंगे। साथ ही इसका लाभ गंगा-ब्रह्मपुत्र तथा उनकी सहायक नदियों के क्षेत्र उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम व असम के करोड़ों लोगों को मिलना तय है।
नीति आयोग द्वारा की गई त्वरित कार्यवाही पर प्रसन्नता जताते हुए मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने कहा कि नेशनल एग्रोकाॅरिडोर बनने से उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम सहित बाढ़ प्रभावित बिहार एवं असम के करोड़ों किसानों को सीधा फायदा मिलेगा। उन्होंने बताया कि बिहार में एग्रोकॉरिडोर की लंबाई के 500 किलोमीटर क्षेत्र में दर्जनों नदियां, आधा दर्जन से अधिक विकसित जिले, दो स्मार्ट सिटी एवं दो सौ से अधिक रेलवे स्टेशन, दरभंगा एवं पूर्णिया एयरपोर्ट सहित राजेंद्र केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं बिहार कृषि विश्वविद्यालय और अनेक कृषि संस्थान स्थापित हैं। जो इसकी स्थापना के लिए जरूरी मानक को पूरा करते हैं।
तकनीकी संयोजक आशीष चौधरी ने कहा कि नेशनल एग्रोकॉरिडोर बनने से आत्मनिर्भर बिहार आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को नई शक्ति प्राप्त होने के साथ ही इस क्षेत्र से होने वाले प्रतिभा पलायन को भी सहज ही रोका जा सकेगा। इससे फसलों की पैदावार बढ़ने के साथ ही राज्य के राजस्व में बेतहाशा वृद्धि होना अवश्यंभावी है।

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