22 करोड़ 15 लाख की लागत से बनेगा अस्पताल 100 सैय्या वाला एमसीएच विंग
– गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को मिलेगी एक ही छत के नीचे सारी सुविधाएं
– तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करते हुए बीएमएसआईसीएल को निर्माण करने की स्वीकृति दी गई है

मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत सदर अस्पताल में अलग से मातृ-शिशु अस्पताल का निर्माण किया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ मिशन (एनएचएम) के तहत करीब 22 करोड़ 15 लाख की लागत से बनने वाले इस अस्पताल में जच्चा-बच्चा को बेहतर चिकित्सा सेवा व सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके लिए राज्य स्वास्थ समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने 18 अगस्त को शासी निकाय के 30वें बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर बीएमएसआईसीएल को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान किया है. यह जिले का पहला मातृ-शिशु अस्पताल होगा। परियोजना का वित पोषण राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के राज्य सरकार को प्राप्त आवंटन से कराया जाएगा.
100 बेड का होगा एमसीएच(मैटरनल चाइल्ड एवं हेल्थ):
सदर अस्पताल में बनने वाले एमसीएच (मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य) जिसमें एक ही भवन के नीचे प्रसूताओं के प्रसव पूर्व जांच, प्रसव, प्रसव के दौरान होने वाली जांच, एवं प्रसव के बाद होने वाली जांच तथा परिवार नियोजन सेवाएं एवं शिशु स्वास्थ्य से संबंधित सभी सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे। सिविल सर्जन डॉ. सुनील कुमार झा ने बताया वर्तमान में लक्ष्य प्रमाणिक कृत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग काफी कम जगह में संचालित है और जिसका छत मानक कम ऊंचाई पर आ चुका है क्योंकि जलजमाव से बचने के लिए इसके फर्श को वर्ष 2011-12 में ऊंचा किया गया था एवं एमसीएच में शिशु स्वास्थ्य सेवाएं उसी भवन में संचालित ना होकर अन्यत्र संचालित है जिसके कारण जन्म के बाद शिशु के प्राथमिक जांच के लिए दूसरे भवन में ले जाना पड़ता है.
यह मिलेंगे सुविधाएं:
नए एमसीएच में प्रसव पूर्व के लिए अलग विंग प्रसूताओं के लिए माइनर एवं मेजर ओटी की अलग-अलग व्यवस्था तथा प्रसव पूर्व एवं प्रसव के बाद वार्ड की समुचित संख्या जिसमें पर्याप्त संख्या में बेड उपलब्ध रहेगा. विदित हो कि 50 बेड का प्रसव पूर्व तथा 50 बेड प्रसव के बाद का होगा मातृ-शिशु अस्पताल में 100 बेड की क्षमता होगी।
आधुनिक तरीके से बनाया जाएगा अस्पताल:
सिविल सर्जन डॉ. सुनील कुमार झा ने बताया सदर अस्पताल में बनने वाले मातृ एवं शिशु भवन को आधुनिक तरीके से तैयार किया जाएगा। जहां मरीजों को आरओ का पीने का पानी, इलेक्ट्रॉनिक टोकन सिस्टम दिया जाएगा. साथ ही अलग प्रसूति वार्ड, शिशु वार्ड, ऑपरेशन थियेटर, प्रसवगृह के अलावा कॉटेज श्रेणी के वार्ड भी बनेंगे।
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