परिवार नियोजन के स्थाई एवं अस्थाई साधन का डाटा लोड करने को लेकर दिया गया प्रशिक्षण
सभी प्रखंड के प्रखंड अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी एवं प्रसव कक्ष के एएनएम को दिया गया प्रशिक्षण

मधुबनी जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है सरकार द्वारा संचालित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सिर्फ जनसंख्या स्थिरीकरण ही नहीं बल्कि इसके माध्यम से प्रजनन स्वास्थ्य को सुदृढ़ करते हुए स्वस्थ परिवार निर्मित करना है।

इसी को ध्यान में रखते हुए जिले के सभी प्रखंड के प्रखंड अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी, प्रसव कक्ष के एएनएम तथा डाटा एंट्री ऑपरेटर का एक दिवसीय प्रशिक्षण जिले के एक स्थानीय होटल में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में डाटा अपलोड करने तथा परिवार नियोजन के स्थाई एवं अस्थाई साधनों के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा की गयी।
प्रशिक्षण में 12 प्रकार के स्थाई और अस्थाई साधनों पर हुई चर्चा:
प्रशिक्षण में बताया कि परिवार नियोजन को लेकर 12 प्रकार की स्थाई व अस्थाई सामाग्रियां मौजूद हैं। इनमें कंडोम, अंतरा इंजेक्शन, छाया गोली, माला एन स्थाई साधनों में पीपीआईयूसीडी, महिला बंध्याकरण पुरुष नसबंदी आदि शामिल है, जिसकी विस्तार पूर्वक चर्चा की गयी। जापाईगो के जिला समन्वयक राजीव कुमार गुप्ता ने बताया परिवार नियोजन के गर्भनिरोधक साधनों की आपूर्ति व खपत तथा डाटा संधारण की जानकारी प्रशिक्षण में दी गई।
प्रशिक्षण में इन बिंदुओं पर हुई चर्चा:
जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी सुनील कुमार ने बताया प्रशिक्षण में परिवार नियोजन के साथ डाटा अपलोड पर विस्तार पूर्वक चर्चा किया गया, जिसके तहत प्रसव पूर्व जांच की स्थिति, सिजेरियन प्रसव, परिवार नियोजन परामर्श, प्रसव पूर्व अवधि में आईयूसीडी के लिए परामर्श, महिला बंध्याकरण, प्रसव के पश्चात बंध्याकरण की संख्या (प्रसव के 7 दिन तक) गर्भपात के पश्चात बंध्याकरण, पुरुष नसबंदी, गर्भनिरोधक गोली, कंडोम वितरण, आईयूसीडी की संख्या, स्तनपान, छाया गोली को लेकर विस्तार पूर्वक चर्चा किया गया तथा तथा रजिस्टर में अपलोड करने को लेकर प्रशिक्षण दिया गया।
क्या है पीपीआईयूसीडी
एसीएमओ डॉ सुनील कुमार ने बताया बच्चों में अंतराल रखने तथा अनचाहे गर्भ से निजात के लिए प्रसव के 48 घंटे के अंदर पीपीआईयूसीडी(प्रसवोपरांत कॉपर-टी) लगाया जाता है. गर्भनिरोधक का यह एक सुरक्षित साधन है। इसका कोई साइडइफेक्ट नहीं होता है. इससे लाभार्थी को न ही दर्द होता है ना ही कोई अतिरिक्त ब्लीडिंग होती है. थोड़ा ब्लीडिंग हो सकती है जो एक सामान्य प्रक्रिया है. इससे गर्भधारण की समस्या से लंबे समय तक छुटकारा पाया जा सकता है. पीपीआईयूसीडी दो तरह के होते हैं. एक 5 साल के लिए तथा दूसरा 10 साल के लिए के लिए होता है। सभी सरकारी यह अस्पतालों में मुफ्त लगाई जाती है।
एमपीए (अंतरा):
एसीएमओ डॉ सुनील कुमार ने बताया अंतरा बहुत असरदार विधि है. एक इंजेक्शन से 3 महीने तक गर्भधारण की संभावना नहीं होती है. इसे स्तनपान कराने वाली मां भी ले सकती है जिससे दूध की मात्रा और गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ता, ना ही शिशु पर कोई हानिकारक प्रभाव पड़ता है. यदि महिला ठीक 3 महीने बाद इंजेक्शन लगवाने नहीं आती तो निर्धारित तिथि से 14 दिन पहले 28 दिन बाद तक भी इंजेक्शन लगा सकती है. अंतरा महिलाओं के लिए एक सरल व सुरक्षित असरदार साधन है जिसे प्रत्येक 3 महीने के अंतराल पर महिला को एक इंजेक्शन लेना होता है. अगर सुई लगवाने में कोई भी गलती ना हो तो 100 में से एक से भी कम महिला ने गर्भाधान किया है यानी गर्भधारण रोकने में यह 99.7% प्रभावी होता है. तिमाही लगने वाली इंजेक्शन इसका पूरा नाम मेड्रोक्सी प्रोजेस्ट्रोन एसीटेट है. अंतरा का प्रयोग बंद करने के कुछ माह बाद महिलाओं को पहले की तरह माहवारी होने लगती है और वह पुनः गर्भधारण कर सकती है.
मौके पर जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी सुनील कुमार तथा सभी प्रखंड के डाटा एंट्री ऑपरेटर एवं प्रसव कक्ष के ए एन एम उपस्थित थे.
Darbhanga News24 – दरभंगा न्यूज24 Online News Portal