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मधुबनी आयुष ग्राम को लेकर दूसरे दिन दिया गया प्रशिक्षण – अजित कुमार सिंह DN 24 LIVE

आयुष ग्राम को लेकर दूसरे दिन दिया गया प्रशिक्षण

– आशा, आंगनवाड़ी सेविका एवं आयुष चिकित्सकों ने लिया भाग
– कैंप आयोजन कर लोगों का किया जाएगा उपचार
– 18 दिसंबर को पंडौल प्रखंड के हाईस्कूल मैदान में लगेगा शिविर
– कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए आयुष चिकित्सकों को दिया गया प्रशिक्षण

मधुबनी आयुष विधि से उपचार एवं रोकथाम के विभिन्न रोगों को के बारे में जागरूकता के लिए जिले का स्थानीय होटल में आंगनवाड़ी सेविका, आशा कार्यकर्ता, शिक्षा विभाग के कर्मी, कृषि विभाग के कर्मी को दूसरे दिन प्रशिक्षण दिया गया। राज्य स्तरीय पर्यवेक्षक डॉक्टर अजीत कुमार सिंह ने बताया जिले के दो प्रखंड को आदर्श आयुष ग्राम के लिए चयनित किए गए हैं, जिसमें कैंप लगाकर आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथिक तथा योगा पद्धति से मरीजों का इलाज किया जाएगा। जिला देसी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर हरेंद्र कुमार लाल दास ने बताया 18 दिसंबर को पंडौल प्रखंड के हाई स्कूल मैदान पर स्वास्थ्य कैंप लगाया जाएगा, जिसमें चिन्हित पंचायत सहित पूरे प्रखंड के लोगों को देशी चिकित्सा का लाभ मिलेगा तथा आयुष ग्राम लोहट में 19 व पटवारा में 21 दिसंबर को शिविर लगाया जाएगा।

क्या है आयुष ग्राम योजना:
जिला देसी चिकित्सा पदाधिकारी डॉक्टर हरेंद्र कुमार लाल दास ने बताया, आयुष मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आम जनता को आयुष चिकित्सा सेवाएं सहज रूप से उपलब्ध करवाए जाने एवं उनके आधार पर स्वास्थ्य सूचकांकों के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से आयुषग्राम योजना ”आयुष मिशन” के तहत प्रारंभ की है। इस योजना के तहत 5 गांव के लगभग 10,000 जनसंख्या को शामिल किया गया है। आयुर्वेदिक भारतीय चिकित्सा प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जिनमें स्वस्थ जीवन-यापन रोगों की रोकथाम तथा उपचार के लिए अथाह भंडार है। आयुष चिकित्सा पद्धति में आयुर्वेदिक, योग, यूनानी, होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धतियों का समावेश है। इस योजना से ग्राम वासियों के स्वास्थ्य का स्तर सुधरेगा जिसके फलस्वरूप उनका जीवन स्तर भी सुधरेगा।

आयुष ग्राम योजना के उद्देश्य:
आयुष ग्राम योजना के तहत संचारी रोग रोग जैसे हेपेटाइटिस बी, सी, मलेरिया, डेंगू, ट्यूबरक्लोसिस, एचआईवी, कोविड-19, चिकनगुनिया, वायरस, इनफ्लुएंजा एवं गैर संचारी रोग जैसे डायबिटीज, एनीमिया, मानसिक तनाव, ब्लड प्रेशर, थायराइड आदि बीमारियों का इलाज, रोकथाम एवं उपचार करना है तथा रोकथाम के और उपचार के लिए उपाय बताना है।

कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए इन विभागों का लिया जाएगा सहयोग:
कार्यक्रम को सफल संचालन के लिए आयुष विभाग के अतिरिक्त चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, कृषि विभाग, वन विभाग, आईसीडीएस एवं एनजीओ का सहयोग लिया जाएगा। जिसमें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग स्वास्थ्य योजनाओं की प्रदर्शनी तथा जानकारी उपलब्ध करवाएंगे एवं प्राथमिक उपचार के लिए ओपीडी तथा इमरजेंसी सेवाएं प्रदान करेंगे, शिक्षा विभाग सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों के छात्र छात्राओं को शिविर में स्वास्थ्य प्रदर्शनी का अवलोकन तथा स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध करवाएंगे, कृषि विभाग औषधीय पादपों के कृषि से संबंधित जानकारियां उपलब्ध करवाएंगे, वन विभाग औषधीय वनस्पति की प्रदर्शनी तथा वनस्पतियों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना पौधे वितरण करवाना, विद्यालय में पौधारोपण करवाना आदि कार्य करेंगे. आईसीडीएस विभाग महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य पोषण संबंधी प्रदर्शनी एवं जानकारी उपलब्ध करवाएंगे।

मौके पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला समन्वयक डॉ. कमलेश शर्मा ट्रेनर डॉ. रमेश पासवान, डॉ. सुजीत पासवान आदि उपस्थित थे।

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