म अ रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय दरभंगा, बाबा साहेब राम संस्कृत महाविद्यालय पचाढी दरभंगा, एवं शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास,विहार के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रिय गणित दिवस के अवसर पर गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन् का व्यक्तित्व एवं कृतित्व विषय पर एक दिवसीय वेविनार का आयोजन

आनलाईन एवं आफलाईन के माध्यम से रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय दरभंगा में किया गया जिसमें आनलाईन के माध्यम से पचास से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया । कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय के सहायक प्राचार्य डॉ प्रमोद कुमार मिश्र ने किया। वैदिक मंगलाचरण डा राज किशोर मिश्र जी ने अपने शिष्यो के साथ किया वही सरस्वती वन्दना डा निशा ने की। दीप प्रज्वलन पूर्वक उपस्थित मुख्य अतिथि प्रो शशिनाथ झा कामेश्वरसिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय, तथा संस्कृत विश्वविद्यालय के ही छात्र कल्याण अध्यक्ष कार्यक्रम के सारस्वत अतिथि प्रो शिवाकांत झा महोदय को माल्यार्पण के द्वारा सम्मान महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ दिनेश झाजी ने किया। स्वागत भाषण डा निशा ने की वही विषय प्रवर्तन डा विजय कुमार मिश्र ने किया। वर्तमान समय मे गणित की प्रासंगिकता को व्यक्त करते हुए कुलपति महोदय ने श्रीनिवास रामानुजन् के उन प्रमेय सिद्धान्त रूपी कृतित्वो के विषय मे ध्यनाकर्षण करते हुए कहा किं उनकी कृति आज भी एक अवूझ पहेली वनी हुयी है। सारस्वत अतिथि महोदय ने कहा कि गणित के क्षेत्र मे नयी नयी विविधताओं से व्याप्त गभीर सोच के कारण वहुत ही कम समय मे उस शिखर पर आसीन हो गये जिसको सभी नमन करते है।विशिष्टातिथि के रूप मे आनलाईन के माध्यम से उपस्थित रहे विश्वविद्यालय सेवा आयोग पटना, क्षेत्र संयोजक शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रो डा विजय कान्त दास जी ने उनके व्यक्तित्वो को व्यक्त करते हुए कहा कि वे अपने समय को सदा ही गणित के लिए समर्पित कर दिये थे इसी के परिणाम स्वरूप वे गणितमय के रूप मे जाने जाते है। राजकीय संस्कृत महाविद्यालय पटना से समागत प्रधानाचार्य डा मनोज झाजी ने विशिष्टातिथि पदं को अलंकृत करते हुए दृढ संकल्प सही दिशा को यदि केन्द्र बिन्दु मान ले तो कुछ भी असंभव नही है इसी के उदाहरण स्वरूप हमारे गणितज्ञ रामानुजन् साहव थे। महाविद्यालय के सह प्राचार्य सारस्वत वक्ता डा निहार रञ्जन सिन्हा जी ने विषम से विषम परिस्थितियों मे घवराना नहीं चाहिए यह उक्ति अक्षरसः उनका आदर्श रहा और इसीकारण वे सवके आदर्श पुरुष वन गये, वही महाविद्यालय के सह प्राचार्य सारस्वत वक्ता डा पवन कुमार झाजी ने उनके कुछ प्रमेय सिद्धान्तो को सवके समक्ष रखा । अपने अध्यक्षीय उद्बोधनो मे सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए महाविद्यलय के प्रधानाचार्य डा दिनेश झाजी ने कहा कि रायल सोसायटी की सदस्यता प्राप्त करने वाले सदस्यों मे सवसे कम उम्र के सदस्य वनने की गरिमा हमारे ही युगपुरुष श्रीनिवास रामानुजन् जी को मिला वही ट्रीनीटि कालेज से फेलोशिप पानेवाला भी पहला भारतीय थे। वीजगणित के क्षेत्र मे इनका योगदान अतुलनीय है और रहेगा। कार्यक्रम मे महाविद्यालय के सभी प्राध्यापक एवं प्राध्यापिकाओं ने सहभागिता निभाया,आनलाईन तकनीकि संचालन डा ध्रुव मिश्र जी अन्त मे धन्यवाद ज्ञापन शालिनी त्रिपाठी जी ने की राष्ट्रगान से सभा को समापन किया गया।
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