सी एम कॉलेज के प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में ‘साहित्य की ओर लौटें’ कार्यक्रम का हुआ आयोजन
विलक्षण
प्रतिभा संपन्न प्रो विभूति आनंद मैथिली साहित्य के एकांत साधक- प्रो विश्वनाथ*
प्रो विभूति आनंद ने अपनी 31 महत्वपूर्ण पुस्तकें मैथिली विभाग को किया समर्पित
साहित्य अकादमी से पुरस्कृत प्रोफेसर विभूति आनंद के साथ सी एम कॉलेज,दरभंगा के हिंदी, मैथिली,अंग्रेजी,उर्दू तथा संस्कृत विभाग के शिक्षकों के साथ संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रधानाचार्य प्रो विश्वनाथ झा की अध्यक्षता में “साहित्य की ओर लौटें”(रिटर्न टू लिटरेचर) कार्यक्रम का आयोजन प्रधानाचार्य कक्ष में हुआ,जिसमें प्रो इंदिरा झा,प्रो मंजू राय,डा आर एन चौरसिया,डा संजीत कुमार झा,डा रूपेंद्र झा,प्रो रागिनी रंजन,प्रो अभिलाषा कुमारी,डा प्रीति कनोडिया,डा अब्दुल हई,विपीन कुमार सिंह तथा डा जिया हैदर आदि ने भाग लिया।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य प्रो विश्वनाथ झा ने कहा कि प्रो विभूति आनंद बहुमुखी प्रतिभा के धनी तथा मैथिली-साहित्य के एकांत साधक रहे हैं। ये सृजनात्मक प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं जो मैथिली साहित्य के प्यारे और दुलारे रहे हैं। प्रोफेसर विभूति मिथिला विश्वविद्यालय के प्रख्यात मैथिली प्राध्यापक तथा आर एन कॉलेज,पंडौल के यशस्वी प्रधानाचार्य रहे हैं। इस अवसर पर प्रो विभूति आनंद ने अपनी लिखित 31 महत्वपूर्ण पुस्तकों को महाविद्यालय के मैथिली विभाग को समर्पित किया। आरंभ में साहित्यकार विभूति आनंद ने अपने जीवन के संघर्ष,पारिवारिक पृष्ठभूमि तथा राजनीतिक विचारधारा के संबंध में अपने आत्मकथ्य को प्रस्तुत किया।उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके जीवन में गहरा जख्म रहा है और वे अराजकता के दौर से भी गुजरे हैं,परंतु साहित्य-साधना के कारण उनकी जीवनी- शक्ति बची हुई है।उन्होंने कहा कि आरंभ में उनका जुड़ाव साम्यवादी विचारधारा के साथ रहा और वे जयप्रकाश के ‘समग्र क्रांति आंदोलन’ में सक्रियता पूर्वक भाग लेकर जेल भी गए। परंतु उन्होंने राजनीति का परित्याग कर साहित्य रचना हेतु समर्पित हुए। इस अवसर पर उन्होंने अपने ग्रंथों के विषय वस्तु की संक्षिप्त जानकारी देते हुए उनकी उपयोगिता की चर्चा की। प्रो विभूति ने बताया कि अवकाश ग्रहण के बाद मैं अपनी आत्मकथा मैथिली भाषा में लिख रहा हूँ।
प्रो इंदिरा झा ने कहा कि इनसे मुझे लेखन की प्रेरणा मिली है।2022 में अवकाश के बाद मैं भी लेखन-कार्य करूंगी। सदस्यों का स्वागत मैथिली प्राध्यापिका प्रो अभिलाषा कुमारी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डा आर एन चौरसिया ने किया।
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