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स्नातकोत्तर गणित विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा द्वारा आयोजित सेमिनार का उदधाटन हुआ।

सेमिनार से स्वमूल्यांकन का एक मौका मिलता है। इन्ही मूल्यांकन से हमलोग अपनी कमजोरियो को अवसर में बदल सकते है। ये बाते आज स्नातकोत्तर गणित विभाग, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा द्वारा आयोजित सेमिनार के उदधाटन।के अवसर पर माननीय कुलपति प्रोफेसर सुरेन्द्र प्रताप सिंह ने कही। उन्होंने कहा देश मे बिहार एक ऐसा राज्य है जहाँ विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर विभाग में केवल स्नातकोत्तर शिक्षा के साथ शोधकार्य किये जाने का परिनियम है। उन्होंने कहा कि इस डिजिटल युग मे लोग चाहे तो अच्छा और उपयोगी रिसर्च प्रोजेक्ट बनाकर शोध कर सकते हैं जो देश और समाज के हित में हो। इस प्रोजेक्ट के लिये बहुत सी एजेंसी फण्ड भी मुहैया कराने को तैयार रहती है। SWOT का नियम हर संकाय में लागू होता है। एस का अर्थ स्ट्रेंथ और डब्लू का अर्थ वीकनेस है। अपने वीकनेस को कैसे स्ट्रेंथ में बदल सकते है। ओ का अर्थ ओपोरचुनिटी है और टी का अर्थ थ्रेट होता है। डर को अवसर में बदल सकते हैं। माननीय कुलपति ने विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एन के अग्रवाल को ऐसे सामयिक विषय पर सेमानर आयोजित करने के लिये साधुबाद देते हुए कहा द सो मस्ट गो ऑन।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। सभी मंचासीन अतिथियों को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एन के अग्रवाल ने कहा कि गणित में रिसेंट डेवलपमेंट एंड एप्लीकेशन ऑफ़ मैथेमेटिक्स पर जो सेमिनार आयोजित किया गया है वो सभी वर्गों के लिये उपयोगी साबित होगा। जीवन के हर मोड़ पर गणित की उपयोगिता है। मुख्य वक्ता रांची विश्वविद्यालय, रांची के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एन के अग्रवाल ने गणित का उपयोग जो कि विभिन्न क्षेत्रों में होता है, पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में, जासूसी क्षेत्र सहित गणित के विभिन्न आयामो की चर्चा की। प्रतिकुलपति प्रोफेसर डॉली सिंन्हा ने कहा कि गणित के एप्पलीकेशन से मानव जीवन को सभ्य बनाने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा बच्चा भी बोलने से पहले गणित के भाव का इजहार करता है। एक और ज्यादा टॉफी रखने पर बच्चा अधिक की ओर जाता है। जीवन के हर काम मे गणित का प्रयोग किया जाय तो जीवन जीने का आनंद बदल सकते हैं। बायो मैथेमेटिक्स से चिकित्सा के क्षेत्र क्रांति आई है। मूर्तिकार अनपढ़ होकर भी अपने गणित की सहायता से अपना काम कुशलतापूर्वक करता है। कुलसचिव डॉ मुश्ताक अहमद ने कहा बदलती दुनिया के साथ चलने पर पहचान बनती है जिसका रास्ता गणित बनाता है। ऐसे सेमिनार हो जिसकी जरूरत समाज को हो। संकायाध्यक्ष विज्ञान प्रोफेसर रतन कुमार चौधरी ने कहा कि सभ्यता का विकास कई काल खंडों में हुआ है जिसमे गणित की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य प्रोफेसर विनोद कुमार चौधरी ने ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम कराने की लिये कुलपति महोदय की प्रशंसा की और कहा कि ऐसा आयोजन लगातार जारी रहना चाहिए। विभाग के सभी शिक्षक प्रोफेसर जे एल चौधरी , डॉ एस एन रॉय, कार्यक्रम के संजोयक डॉ अभिमन्यु , विपुल स्नेही एवं विभाग के सभी शोध छात्र मौजूद थे। विभिन्न महाविद्यालय के शिक्षक सहित विश्वविद्यालय के ऑफिसर भी उपस्थित थे।

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