सर्दियों में बढ़ जाती है एलर्जी की समस्या, रखें सावधानी
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग व बच्चों की विशेष देखभाल आवश्यक
गांव की अपेक्षा शहर में अधिक समस्या
शारिरिक समस्या होने पर निकट के अस्पतालों में करें सम्पर्क
दरभंगा तापमान में गिरावट होने के कारण प्रदूषक और एलर्जी तत्व हवा से जल्दी हट नहीं पाते, जिससे अस्थमा, एलर्जी राइनाइटिस और अन्य प्रकार के एलर्जी होने की आशंका बढ़ जाती हैं। ठंड से बचने के लिए ज्यादातर लोग अधिकांश समय घर या ऑफिस में बिताते हैं. यही आदत एलर्जी का कारण बनती है। इसे इनडोर एलर्जी कहा जाता है. हवा में मौजूद धूल के कण, इनडोर मोल्ड (फफूंद), पालतू जानवरों की रूसी और कॉकरोच ड्रॉपिंग एलर्जी के मुख्य कारण हैं। कोरोना संक्रमण में समस्या अधिक होने की सम्भावना है। इसे लेकर अधिक सतर्कता ज़रूरी है। खासकर बुजुर्ग, गर्भवती व बच्चों को अधिक देख रेख आवश्यक है।
एलर्जी का है अधिक खतरा
जिनकी त्वचा संवेदनशील होती है, उन्हें स्किन एलर्जी होने का खतरा बना रहता है। ठंड में रक्त नलिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इससे हाथ व पैर में ब्लड सर्कुलेशन बाधित होता है। इसी के कारण खून की कमी से उंगलियों में सूजन होने लगता है. इस मौसम में फंगल इन्फेक्शन होने से खाज या खुजली होने की आशंका रहती है। इससे बचने के लिए धूप में निकलें रात में सोने से पहले मॉइश्चराइजर लगाएं। इससे त्वचा में नमी बरकरार रहेगी। मौसमी फल, हरी सब्जी, गाजर आदि का सेवन करें. पानी पर्याप्त मात्रा में पीएं.
ऐसे करें बचाव
घर में वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें.
धूल व धुएं से बचें।
तापमान में अचानक परिवर्तन न हो, इसका ख्याल रखें।
धूल से बचने के लिए मुंह और नाक पर मास्क या रूमाल बांधें।
पर्दे, चादर, बेडशीट व कालीन को नमी से बचाने के लिए धूप में रखें।
बाल वाले पालतू जानवरों से दूर ही रहें. जानवरों को एलर्जी है, तो घर में न रखें।
जिन पौधों के पराग कणों से आपको एलर्जी है, उनसे दूर रहें।
घर में मकड़ी वगैरह का जाल न लगने दें. समय-समय पर घर की सफाई जरूर करते रहें।
घर को हमेशा बंद न रखें. घर को हवादार बनाएं, ताकि साफ हवा आती रहे।
हाइजीन हाइपोथीसिस बच्चों को बना सकती है बीमार
निज़ी चिकित्सक डॉ. विनय कुमार ने बताया गांवों के मुकाबले शहरों में रहने वालों में एलर्जी की समस्या अधिक पायी जाती है. जिन बच्चों को ज्यादा साफ-सफाई के वातावरण में पाला जाता है, उनमें भी यह समस्या अधिक होती है. जिन चीजों से बच्चों को परहेज करने के लिए कहा जाता है, वही चीजें उन्हें अधिक बीमार बना देती हैं. हाइजीन के नाम पर हम बच्चों को धूल, मिट्टी, बारिश आदि में खेलने से रोकते रहते हैं. इसे ही ‘हाइजीन हाइपोथीसिस’ कहते हैं.
बच्चों को कभी चारदीवारी में बंद करके न रखें. उन्हें धूल-मिट्टी और धूप में खेलने दें. ये बच्चों को बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं. हालांकि, धूल-मिट्टी में खेलने के बाद उनके हाथ व पैर अच्छे से धोना न भूलें. वहीं, कई मामलों में एलर्जी वंशानुगत होती है. ऐसे परिवार के लोग अपने बच्चों की उचित देखभाल करें.
सरकारी अस्पतालों में करें सम्पर्क
डॉ विनय ने कहा किसी प्रकार की समस्या होने पर निकट के अस्पताल में संपर्क करना चाहिए. वहां 24 घन्टे डॉक्टर व कर्मी मौजूद रहते है. शारिरिक समस्याओं में लापरवाही बरतना खतरनाक साबित हो सकता है. इसके अलावा निकट के आंगनबाड़ी में सम्पर्क कर सकते है. आंगनबाड़ी सेविकाएं या आशा कार्यकर्ता सहयोग करेगी.अधिक समस्या होने पर उन्हें हायर सेंटर में रेफर कर दिया जाएगा.
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