मधुबनी सदर अस्पताल में अप्रैल से दिसंबर तक 4148 गर्भवती महिलाओं का संस्थागत प्रसव
– 2100 महिलाओं को मिला जननी बाल सुरक्षा का लाभ
– संस्थागत प्रसव कराएं, जच्चा-बच्चा रहेंगे सुरक्षित
– मातृ व शिशु मृत्यु दर को कम करने में पूर्ण सहायक संस्थागत प्रसव
– अस्पताल में मिलती है बेहतर आकस्मिक सेवाएं

मधुबनी गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित संस्थागत प्रसव बेहद ज़रूरी है। संस्थागत प्रसव से शिशु व मातृ मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सुरक्षित प्रसव कुशल चिकित्सक और कर्मचारियों की देखरेख में सरकारी अस्पतालों में कराना ही सही होता है। संस्थागत प्रसव का मुख्य उद्देश्य मातृ और शिशु मृत्यु दर को रोकना है। संस्थागत प्रसव से किसी भी परेशानी को समय रहते दूर किया जा सकता है। सरकार द्वारा संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएँ चलायी जा रही हैं। साथ ही संस्थागत प्रसव से संबंधित प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान व जननी सुरक्षा योजना की जानकारी आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से चिन्हित गर्भवती महिलाओं व उनके परिजनों को दी जा रही है।
प्रसव से जुड़ी मिथ्यात्मक बातों की रखें जानकारी:
लोगों में यह मिथ्या है कि घर पर प्रसव कराना आसान व कम खर्च वाला होता है। यह सिर्फ एक मिथक है और घरों पर प्रसव के दौरान आपातकालीन सुविधाएं नहीं होने से सुरक्षित प्रसव में परेशानी उत्पन्न हो सकती है। वहीं कोविड 19 संक्रमण को लेकर लोगों के दिमाग में और भी मिथ्यात्मक बातें है लेकिन उन बातों पर ध्यान न देकर आवश्यक उपायों को अपनाने में ही भलाई है।
जननी सुरक्षा योजना:
एसीएमओ डॉ.सुनील कुमार ने बताया राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने एवं मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य जननी योजना की शुरुआत की गई। इस योजना के अंतर्गत सरकारी अस्पताल में प्रसव कराने वाली महिलाओं को प्रोत्साहन राशि दी जाती है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को 1400 रुपये और शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1000 रुपये दिये जाते हैं। साथ ही योजना के अंतर्गत मुफ्त एंबुलेंस सेवा, मुफ्त खाना, मुफ्त सी सेक्शन ऑपरेशन, मुफ्त में खून चढ़ाना आदि शामिल हैं। एसीएमओ ने बताया जो भी महिला सरकारी अस्पताल में प्रसव के लिए आती हैं वह स्वयं ही जननी सुरक्षा योजना के लिए पात्र हो जाती हैं।
2100 महिलाओं को मिला जननी बाल सुरक्षा का लाभ:
जिले के सदर अस्पताल में 1 अप्रैल से 31 दिसंबर तक 1969 ग्रामीण महिलाओं को प्रसव के बाद 1400 की दर से 27 लाख 56 हजार 600 का भुगतान किया गया है। वहीं शहरी क्षेत्र के 131 लाभ को 131000 का भुगतान किया गया है।
संस्थागत प्रसव से संबंधित सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं अस्पताल में:
अस्पताल प्रबंधक अब्दुल मजीद ने बताया संस्थागत प्रसव से संबंधित सभी सुविधाएं सभी सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध हैं। आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं के माध्यम से संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए चिह्नित गर्भवती को संस्थागत प्रसव के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में प्रसूति विशेषज्ञ व प्रशिक्षित नर्स प्रसव कार्य कराती हैं। सिजेरियन की सुविधा सदर अस्पताल में मौजूद है। संस्थागत प्रसव के दौरान कोविड 19 से जुड़ी आवश्यक गाइडलाइन का पालन किया जाता है। गृह प्रसव कहीं से भी सुरक्षित नहीं है और कई जटिलताओं को जन्म दे सकता है। जिससे जच्चा बच्चा दोनों के प्राण संकट में आ सकते हैं।
क्या कहते हैं सदर अस्पताल के आंकड़े:
सदर अस्पताल में अप्रैल से दिसंबर 2020 तक 4148 गर्भवती महिलाओं का संस्थागत प्रसव कराया गया। जिसमें अप्रैल में 315, मई में 318,जून में 424, जुलाई में 426, अगस्त में 513, सितंबर में 546, अक्टूबर में 536, नवंबर 520, दिसंबर 550 संस्थागत प्रसव कराया गया।
संस्थागत प्रसव के फायदे:
• कुशल एवं प्रशिक्षित डॉक्टर की देखरेख में होता है, किसी भी परिस्थिति से निपटने में सक्षम होते हैं
• दवा और उपकरण की सुलभता
• किसी भी गंभीर स्थिति की समय रहते पहचान
• जच्चा और बच्चा की समुचित देखभाल
• शिशु और मातृ मृत्यु दर पर अंकुश
• प्रसव के बाद माँ और बच्चे की सम्पूर्ण देखभाल
गर्भवती महिलाएं इन बातों का जरूर रखें ध्यान:
• अपने क्षेत्र की आशा एवं ए.एन.एम के संपर्क में रहें
• प्रसव की संभावित तिथि को लेकर रहें सजग एवं परिवारजनों को इसकी जानकारी दें
• एम्बुलेंस का नंबर अपने पास रखें
• प्रसव के समय बच्चों एवं किसी बीमार व्यक्ति के साथ अस्पताल न जाएँ
• अस्पताल में लागू कोरोना के मापदंडों से खुद को और परिवार के लोगों को अवगत कराएँ
• किसी भी आपातकालीन स्थिति में नजदीकी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आशा से संपर्क करें।
कोरोना काल में इन उचित व्यवहारों का करें पालन,-
– एल्कोहल आधारित सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
– सार्वजनिक जगहों पर हमेशा फेस कवर या मास्क पहनें।
– अपने हाथ को साबुन व पानी से लगातार धोएं।
– आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें।
– छींकते या खांसते वक्त मुंह को रूमाल से ढकें.

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