.श्रुतिधर झा स्मृति ग्रंथ का हो भव्य लोकार्पण:- कुलपति । मिथिला विभूतियों की भूमि । गुरुओं का स्मरण हमारा पुनीत कर्तव्य । सारस्वत यज्ञ में मेरा पूर्ण सहयोग । उक्त बातें प्रो.श्रुतिधर झा स्मृति ग्रंथ प्रकाशन समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सुरेंद्र प्रताप सिंह

ने कहीं । आगे उन्होंनें मिथिला की पावन धरती को मनीषियों की तपोभूमि की संज्ञा दी । विषय प्रवेश करते हुए डॉ.जयशंकर झा ने अपने गुरु श्रुतिधर झा के विराट व्यक्तित्व एवं कर्तृत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए इस स्मृति ग्रंथ को वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बताया । साथ ही उन्होंनें इस ग्रंथ के प्रकाशन में उच्चस्तरीय गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई । इस अवसर पर पूर्व कुलपति डॉ.राजकिशोर झा ने प्रो. श्रुतिधर झा के साथ बिताए क्षणों को याद करते हुए उनकी सहजता ,सरलता एवं निष्ठा की सराहना की । डॉ. मित्रनाथ झा ने कहा कि डॉ. जयशंकर झा न केवल श्रुतिधर झा के पट्ट शिष्य रहे है अपितु उनके समग्र व्यक्तित्व के सकारात्मक पक्षों को अपने जीवन मे अक्षरशः उतारने में पूरी सफलता पाई है । साथ ही उनके आदर्शों को ब्यबहारिक धरातल पर उतारने के क्रम में डॉ. झा ने पूअर होम, गौशाला, अहिल्यास्थान आदि धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अपनी समग्र ताकत झोंक दी हैं । डॉ.सोमेश्वर झा दधीचि ,डॉ. राजेश्वर पासवान तथा डॉ.रिपुसूदन झा द्वारा प्रस्तुत वैदिक मंगलाचरण से प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ.मुश्ताक अहमद,चौधरी हेमचंद्र राय,कुलपति के सचिव कौशल नंदन श्रीवास्तव प्रभाष कुमार ,उज्ज्वल कुमार उपस्थित थे ।
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