डीएमसीएच के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग में एफआईएमएनसीआई की ट्रेनिंग शुरू
11 दिवसीय ट्रेनिंग में बच्चों के मृत्यु दर कम करने को ले दी जाएगी जानकारी चार ज़िला के प्रतिभागियों ले रहे हिस्सा

दरभंगा डीएमसीएच के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग में एफआईएमएनसीआई की ट्रेनिंग शुरू हुई, इसमें 4 जिलों के प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर तथा बेगूसराय से चार चार कुल 16 प्रतिभागी आज इस ट्रेनिंग में भाग लेने पहुंचे हैं. प्राचार्य डॉ केएन मिश्रा, अधीक्षक डॉक्टर मणि भूषण शर्मा, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉक्टर हेमकांत झा और प्रशिक्षक डॉ ओम प्रकाश डॉक्टर एनपी गुप्ता एवं सुनील शर्मा ने सम्मिलित रूप दीप प्रज्वलित कर आईएमएनसीआई का विधिवत उद्घाटन किया।
इस ट्रेनिंग के दौरान 5 साल के नीचे के बच्चों की मृत्यु दर कम करने के लिए एक बहुत ही सरल विधि सिखाई जाएगी। यह 13 दिन की आवासीय प्रशिक्षण है, जिसमें शुरू के दिनों में उन्हें आईएमएनसीआई की ट्रेनिंग दी जाएगी।
बच्चों के रोग व उपचार की दी जाएगी जानकारी
ट्रेनिंग के दौरा बच्चों की मृत्यु के प्रमुख कारण सांस की दिक्कत, दस्त, मलेरिया, मिजेलस, नवजात शिशु के रोगों के बारे में बताया जाएगा. उन बच्चों को इलाज की जरूरतों के अनुसार अलग करना सिखाया जाएगा. जो गंभीर रोग के बच्चे होंगे उन्हें आगे उच्च सुविधा प्राप्त अस्पताल में भेजने के प्रक्रिया बताई जाएगी। वैसे बच्चे जिनका इलाज पीएससी में किया जा सके उन्हें वहां पर रोककर समुचित उपचार की विधि बताई जाएगी। साथ ही कुछ बच्चों का इलाज घर पर संभव होगा उन्हें सलाह देकर घर भेज दिया जाएगा. ट्रेनिंग के दौरान वे मरीजों को मॉनिटर के द्वारा जांच कर सकेंगे उनके खून जांच कर सकेंगे और उन्हें सूई और मशीन द्वारा इलाज भी किया जाएगा।
शिशु रोग विशेषज्ञों की कमी
उद्घाटन सत्र प्राचार्य डॉ केएन मिश्रा ने बताया कि हमारे देश में शिशु रोग विशेषज्ञों की बहुत ज्यादा कमी है। बिहार में प्रति जिले में एक दो विशेषज्ञ हैं और बीमार बच्चों की संख्या ज्यादा है. इसलिए जो भी उपलब्ध डॉक्टर हैं उन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर शिशुओं के मृत्यु के कारण वाले बीमारियों का इलाज सिखाया जाएगा। अधीक्षक डॉ मणि भूषण शर्मा ने बताया कि अगर कम जरूरत वाले बच्चों को पीएचसी में ही इलाज संभव कर लिया जाए तो बड़े अस्पतालों पर बोझ घटेगा. तय किया गया कि पीएसी में जो भी डॉक्टर हैं, एडिशनल पीएचसी में जो भी डॉक्टर ने उन्हें इस मॉड्यूल ट्रेनिंग से सीख कर वहां जाकर बच्चों की जान बचा सकेंगे. डॉ शर्मा ने कहा अगर बच्चों का उपचार पीएचसी में संभव हो जाए तो मरीजों को भी परेशानी कम होगी। आज से शुरू हुई यह ट्रेनिंग 11 दिन चलेगी।
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