विद्यापति सेवा संस्थान ने मातृभाषा के लिए शहीद हुए युवाओं को नमन किया
अंतर्राष्ट्रीय
मातृभाषा दिवस के अवसर पर विद्यापति सेवा संस्थान की ओर से सभी मातृभाषा अनुरागियों को शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने 1952 ई0 में बांग्लादेश में भाषा आंदोलन के दौरान अपनी मातृभाषा के लिए शहीद हुए युवाओं को नमन किया। इस मौके पर उन्होंने मैथिली भाषा के उन्नयन के प्रति बरती जा रही संवेदनहीनता पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए मैथिली भाषा के विकास की लड़ाई में युवाओं से आगे आने का आह्वान किया। मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमला कांत झा ने कहा कि मैथिली भाषा के विकास को लेकर आज जो माहौल है, उसके समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस जैसे अवसर बहुत प्रासंगिक हो जाते हैं।
संस्थान के सचिव प्रो जीव कांत मिश्र ने कहा कि मातृभाषा दिवस लोगों में अपनी व अन्य जनों के मां की भाषा के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना उत्प्रेरित करते हैं। वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार मणिकांत झा ने कहा कि मातृभाषा अभिव्यक्ति की क्षमता को मजबूती प्रदान करती है। यह हमारे विचारों को अच्छी तरह से पेश कर दूसरों पर अच्छा प्रभाव डालने के काबिल बनाता है। इस लिहाज से मातृभाषा मैथिली को शिक्षा का प्रमुख माध्यम बनाने से इसके अच्छे परिणाम सामने आना निश्चित है।
मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने विश्व की लगभग तीन हजार भाषाओं के अस्तित्व पर विलुप्तता के मंडरा रहे खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मातृभाषा किसी भी व्यक्ति के संस्कारों की संवाहक होती है और इसके माध्यम से किसी भी देश अथवा समाज की संस्कृति को मूर्त रूप मिलता है। महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान के चेयरमैन हीरा कुमार झा ने कहा कि मातृभाषा यानी माँ की भाषा नौनिहालों में अपनी संस्कृति को मजबूत करने को प्रेरित करती है। इसलिए स्वयं के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए मातृभाषा के अधिकाधिक उपयोग की आज के दिन शपथ लेनी चाहिए । प्रो विजय कांत झा, विनोद कुमार झा, डाॅ उदय कांत मिश्र, डाॅ गणेश कांत झा, पंकज कुमार, प्रो चंद्रशेखर झा बूढ़ा भाई, दुर्गा नन्द झा, आशीष चौधरी आदि ने मातृभाषा को मानव जीवन से संबद्ध सभी विषयों को सीखने, समझने एवं ज्ञान की प्राप्ति का सबसे सरल माध्यम बताया।
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