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लाइलाज नहीं है टीबी, समय से कराएं उपचार – जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डा. आर के सिंह

लाइलाज नहीं है टीबी, समय से कराएं उपचार
– जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डा. आर के सिंह

Edit” By – Ajit kumar singh

से खास बातचीत
यह फेफड़े सहित शरीर के हर अंग को प्रभावित करती है
मधुबनी बदलती जीवन शैली व अतिव्यस्तता के बीच हम हर दिन एक नए रोग के शिकार होते जा रहे हैं। इन्हीं में से एक है यक्ष्मा रोग। यह एक गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो माइक्रो बैक्ट्रीरिया के विभिन्न प्रकार की वजहों से होती है। इसे टीबी भी कहते हैं। यह आम तौर पर फेफड़ों पर हमला करती है, लेकिन उससे शरीर के अन्य अंग भी प्रभावित होते हैं। यह हवा के माध्यम से तब फैलता है, जब वे लोग जो सक्रिय टीबी संक्रमण से ग्रसित हैं, खांसी, छींक या अन्य प्रकार से हवा के माध्यम से अपना लार संचारित कर देते हैं। यह जानकारी जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डा. आर के सिंह ने सोमवार को खास बातचीत में दी ।
*टीबी का लक्षण क्या है। शुरुआती दौर में इसकी पहचान कैसे हो सकती है।*
-टीबी का सामान्य लक्षण बुखार आना है। दो सप्ताह से अधिक समय तक लगातार खांसी होना, खांसी के साथ कफ का आना, बुखार, वजन में कमी या भूख में कमी, शाम के समय पसीना आना इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं। यह फेफड़े सहित शरीर के हर अंग को प्रभावित करती है। बोन टीबी में हड्डी ज्यादा प्रभावित होती है। यदि इनमें से कोई भी लक्षण तीन सप्ताह से अधिक अवधि तक बना रहे, तो पीड़ित व्यक्ति को नजदीकी डॉट्स टीबी केंद्र या स्वास्थ केंद्र जाना चाहिए और अपने कफ की जांच करानी चाहिए। रोगी के बलगम से खून भी आ सकता है। सांस फूलने की शिकायत हो सकती है। फेफड़ा क्षतिग्रस्त भी हो सकता है।
*क्या घर वगैरह में धूल-कण आदि से खांसी होती है। या कोई व्यक्ति धूल-कण के संपर्क में रहता है,तो टीबी हो सकती है?*
– लंबे समय तक धूल-कण विशेषकर पत्थर, कोयला आदि के धूल-कण या अन्य खानों में काम करने वाले व्यक्ति को शुरुआती दौर में न्यूमोओनियस की बीमारी होती है। अंतत: उक्त व्यक्ति को टीबी की बीमारी हो जाती है। इसी कारण से ऐसे स्थानों पर काम करने वाले व्यक्ति को टीबी होने की संभावना अधिक रहती है।
*बोन टीबी के क्या लक्षण हैं। वह क्यों होता है।*
-यदि किसी व्यक्ति को लगातार दो-तीन हफ्ते के बाद भी पीठ में दर्द रहे तो उसे तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। कई बार कई बीमारियों की पहचान एक्सरे से भी नहीं हो पाती है। कुछ बीमारियों का पता लगाने के लिए एमआरआई करानी होती है। टीबी का जीवाणु फेफड़े से खून में पहुंचता है और जीवाणु रक्त प्रवाह के जरिए रीढ़ तक पहुंच जाता है। जो लोग सही समय पर इलाज नहीं कराते या इलाज बीच में छोड़ देते हैं, उनकी रीढ़ गल जाती है।

*ब्रेन टीबी क्या है, यह कैसे होती है।*
टीबी के कीटाणु रक्त के माध्यम से ब्रेन के किसी भी हिस्से में पहुंच कर उसे प्रभावित कर देते हैं। इस कारण कई बार मरीज की जान को खतरा बढ़ जाता है। इसका मुख्य कारण दिमाग में मौजूद पानी की थैली में वाटर सर्कुलेशन रुक जाना होता है। ऐसे में दिमाग की कोशिकाओं पर लगातार दबाव बढ़ने से मरीज की जान जा सकती है। लेकिन अब दूरबीन विधि से इस पानी को आसानी के साथ निकाल कर मरीज की जान बचाई जा सकती है।
*फेफड़े में टीबी की बीमारी हो गई थी, जो अभी पूर्णत: ठीक है। क्या यह बीमारी दुबारा भी हो सकती है।*
हां, टीबी की बीमारी दुबारा हो सकती है, या वही पुरानी बीमारी पुन: जागृत हो सकती है। इसके लिए जरूरी है कि मरीज को दुबारा खांसी हो, वजन घट रहा हो या बुखार रहे तो टीबी संबंधित बलगम की जांच या एक्सरे अवश्य कराएं।
*एमडीआर टीबी की जांच कहां संभव है।*
इस जांच की सुविधा सदर अस्पताल मधुबनी में स्थित जिला यक्ष्मा केंद्र में प्रतिदिन निःशुल्क उपलब्ध है। यहां जांच के साथ-साथ टीबी के मरीजों को दवा भी निःशुल्क दी जाती है।

– *टीबी से ठीक होने के बाद मरीज के पैर में दर्द की शिकायत रहती है। क्या यह टीबी से संबंधित है।*
नहीं सीधे तौर पर यह टीबी की बीमारी से संबंधित नहीं है। परंतु टीबी की बीमारी के चलते विटामिन या कैल्सियम की कमी हो जाती है। जिसके चलते इस तरह का लक्षण मिल सकता है। ऐसे रोगी को शक्तिदायक भोजन व कैल्सियम युक्त पदार्थ जैसे दूध, सेब इत्यादि का सेवन कराने से लाभ होता है।

*किस प्रकार के लोगों में टीबी होने की संभावना अधिक होती है*
अच्छा खान-पान न करने वालों को टीबी होने की ज्यादा संभावना रहती है। क्योंकि कमजोर इम्युनिटी से उनका शरीर बैक्टीरिया का वार नहीं झेल पाता। जब कम जगह में ज्यादा लोग रहते हैं तब इंफेक्शन तेजी से फैलता है। डायबिटीज के मरीजों, स्टेरॉयड लेने वालों और एचआईवी मरीजों को भी संभावना ज्यादा रहती है।

*क्या टीवी मरीज को सरकार द्वारा कोई प्रोत्साहन राशि मिलती है*
टीबी के मरीजों को बेहतर पोषण उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की तरफ से निक्षय पोषण योजना चलायी गयी है। जिसमें टीबी के मरीजों को उचित पोषण के लिए 500 रुपये प्रत्येक महीने दिए जाते हैं। यह राशि उनके खाते में सीधे पहुंचती है। सरकार की मंशा है कि टीबी के मरीजों में 2025 तक 90 प्रतिशत की कमी लायी जा सके।

*कोरोना काल में टीबी मरीजों को किन बातों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है?*
टीबी बीमारी किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है इसीलिए हर उम्र के लोगों को इससे बचना एवं सतर्क रहने की जरूरत है| ऐसे मरीजों को साफ सफाई, शारीरिक दूरी, मास्क पहनना से संबंधित उपायों का पालन करना चाहिए। यह टीबी से बचाव के साथ-साथ कोरोना संक्रमण से भी निजात दिलाएगा। टीबी मरीज को घर से निकालने वक्त मास्क जरूर लगाना चाहिए.

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