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लाॅकडाउन में सोशल मीडिया पर खूब सज रही मिथिलाक्षर की पाठशाला

लाॅकडाउन में सोशल मीडिया पर खूब सज रही मिथिलाक्षर की पाठशाला

– देश-विदेश के हजारों लोग सीख रहे मातृलिपि
कोरोना महासंकट के कारण चल रहे लाॅक डाउन में जहां एक बार फिर देश-विदेश की विभिन्न गतिविधियां प्रभावित हुई है, वहीं सोशल मीडिया पर सजने वाली मिथिलाक्षर की पाठशाला में अपनी मातृलिपि सीखने वालों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। नतीजा है कि मधुबनी जिला के सौराठ गांव निवासी पंडित अजय नाथ झा शास्त्री द्वारा विलुप्तप्राय हो चुकी मिथिला की धरोहर लिपि मिथिलाक्षर को संरक्षित व संवर्धित करने के उद्देश्य से वर्ष 2013 में शुरू किए गए मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान को बीते आठ वर्षों में जो अपेक्षित सफलता नहीं मिली, वह कोरोना महामारी के कारण एक बार फिर कायम हुए लॉक डाउन पीरियड में मिल रही है।
जानकारी देते हुए मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के स्थानीय वरिष्ठ संरक्षक प्रवीण कुमार झा ने बताया कि इस समय दुनिया के दर्जनभर देशों के करीब छह हजार मैथिली भाषी लोग सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से मिथिलाक्षर सीख रहे हैं। विदेशों में रहनेवाले प्रवासी मिथिलावासी के लिए लाॅक पिरियड में अनेकानेक विशेष समूह संचालित हो रहे हैं। जिसमें त्रैमासिक पाठ्यक्रम पूरा कर अद्यतन हजारों लोग विदेश से मिथिलाक्षर प्रवीण हो चुके हैं। जिसमें सभी आयु, जाति व धर्म के लोग शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि अभियान के संस्थापक एवं नासिक से प्रकाशित ‘मैथिल पुनर्जागरण प्रकाश’ पत्रिका के संपादक पं अजय नाथ झा शास्त्री के नेतृत्व में सोशल मीडिया पर सजने वाली मिथिलाक्षर की पाठशाला के समुचित क्रियान्वयन की बागडोर अभियान के संरक्षक समूह के विभिन्न लोगों ने बखूबी थाम रखी है। उनसे मिली जानकारी के अनुसार इंग्लैंड में रमेश कुमार झा ने तथा अरब में शाहनवाज हुसैन ने अभियान की बागडोर थाम रखी है। जबकि यूनाइटेड स्टेट में स्वाति मिश्रा, साउथ कोरिया में अरुण कुमार मेहता, ऑस्ट्रेलिया में खुशी शिशुरेंद्र झा आदि संरक्षक के रूप में अभियान की कमान संभाले हुए हैं।
दिल्ली में अभियान की कमान वरिष्ठ संरक्षक राघव मिश्र, पंकज कुमार कर्ण, शंभूनाथ झा, अशोक कुमार झा, गोपाल कुमार झा आदि थामे हैं, जबकि मुंबई में अभियान के संचालन की बागडोर धर्मेंद्र कुमार झा, अनिल मिश्र व जगत रंजन झा, कटक में उग्रेश कुमार झा, जमशेदपुर में रूनू मिश्र व उमा झा, रांची में दीपक आनंद मलिक और बिहार में कृष्ण कांत झा, उग्रनाथ झा, आशीष कुमार मिश्र, विवेक चन्द्र मिश्र आदि मिथिला वासियों को मिथिला की धरोहर लिपि सिखाने में लगे हैं।
उन्होंने बताया कि इस अभियान के माध्यम से अब तक करीब चार लाख लोग अपनी मातृ लिपि सीख चुके हैं, जिन्हें अद्यतन आठ जगहों क्रमशः मधुबनी, मुम्बई, दिल्ली, दरभंगा, जमशेदपुर, सहरसा, पटना आदि जगहों पर सम्मान समारोह आयोजित कर प्रमाण पत्र प्रदान किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अभियान का नौवां समारोह जानकी नवमी के दिन बीते 20 मई को माँ जानकी की जन्मस्थली सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में प्रस्तावित था जिसे लाॅकडाउन की वजह से तत्काल स्थगित कर दिया गया है।

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