भाकपा(माले) ने मनाया नक्सलवाड़ी दिवस।
विनाशकारी मोदी सरकार और कोविड नरसंहार के खिलाफ लड़ाई में नक्सलवाड़ी की क्रांतिकारी भावना को बुलंद करे- भाकपा(माले)

दरभंगा 25 मई 1967 को दुनिया ने पहली बार नक्सलवाड़ी वज्रनाद को सुना था। न्याय मांगने के कारण ग्रामीण दार्जिलिंग में 11 किसान जिसमे 8 महिला, 1 पुरुष व 2 बच्चा थे को राज सत्ता के द्वारा गोलियों से भून डाला। इस घटना के बाद ही नक्सलवाड़ी के क्रांतिकारी जागरण की चिंगारी फुट पड़ी। भारतीय राज सत्ता को चकित करते हुए नक्सलवाड़ी की यह चिंगारी समूचे मुल्क के सर्वाधिक वंचित और हासिये के तबकों के बीच दमन और अन्याय के खिलाफ आग की लहर बनकर भरक उठी।
आज उन्ही किसानों की याद में भाकपा(माले) पूरे देश मे नक्सलवाड़ी दिवस मना रही है। इसी कड़ी में आज भाकपा(माले) जिला कार्यालय नक्सलवाड़ी दिवस मनाया गया। इस अवसर पर मृत किसानों को श्रधांजलि दी गई।
कार्यक्रम में भाकपा(माले) जिला सचिव बैद्यनाथ यादव, लक्ष्मी पासवान, सदीक भारती, शिवन यादव, प्रिंस राज, उपेंद्र राम शामिल थे।
इस अवसर पर भाकपा(माले) जिला सचिव बैद्यनाथ यादव ने कहा कि 2020 की शुरुआत से ही पूरी दुनिया इस प्राणघाती कोविड महामारी से लड़ने के लिए प्रभाव वैक्सीन का इंतजार कर रही थी। ताकतवर देश मे उसी समय अंतरराष्ट्रीय उत्पादन और आपूर्ति का बड़ा हिस्सा हथिया लिया। आज दुनिया वैक्सीन संबंधी गैर बराबरी व अन्याय के तले पीस रही है। देश को दुनिया का दवाखाना बताने वाली मोदी सरकार ने वैक्सीन संबंधी इस गैर बराबरी से लड़ने के लिए कुछ नही किया। युद्ध स्तर पर देश के हर नागरिक को वैक्सीन मिल जाय उतनी वैक्सीन बनाने या हासिल करने के लिए सरकार ने कुछ नही किया। आत्म निर्भर भारत का नारा जुमला निकला।
हम भारत में राज्य द्वारा थोपा गया कोविड जनसंहार देख रहे है। इस जनसंहार के खिलाफ ताकतवर प्रतिरोध के युद्ध मे नक्सलवाड़ी की क्रांतिकारी भावना निश्चित ही हमे प्रेरित करेगी। और राह दिखाएगी।
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