DMCH बचाओ वेबिनार का आयोजन।
सभी ने मिलकर DMCH बचाने को लिया संकल्प।
कोरोना महामारी में बिहार के अंदर एक मजबूत मेडिकल टीम गठन करने की जरूरत है- डॉ अजित चौधरी
डॉक्टर, नर्स, सफाईकर्मी बेहद अमानवीय व्यवस्था में काम करने को मजबूर है – डॉ सब्बीर अहमद
धीरेन्द्र झा ने कहा कि डीएमसीएच बचाओ जन स्वास्थ्य अभियान का आंदोलनात्मक संघटन बनाने की जरूरत।
1जून को पूरे मिथिलांचल में एक बड़े अभियान की शुरुआत होगी।
बदहाली की मार झेल रहे DMCH को व्यवस्थित करने की जरूरत है- प्रो मुनेश्वर यादव

दरभंगा 28 मई 2021 DMCH बचाओ वेबिनार का आयोजन आज गूगल मीट के जरिये किया गया। जिसमें दरभंगा शहर के प्रसिद्ध डॉक्टर,प्रोफेसर,शोशल कार्यकर्ता, छात्र, युवा में भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन आइसा एक्टिविस्ट संदीप कुमार चौधरी ने किया। कार्यक्रम में वक्त के बतौर DMCH के रिटायर्ड पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अजित कुमार चौधरी, रिटायर्ड सिविल सर्जन डॉ सब्बीर अहमद, मिथिला इतिहास संस्थान के सचिव प्रो धमेंद्र कुमर, भाकपा(माले) ब्यूरो सदस्य धीरेन्द्र झा, पीजी राजनीति विज्ञान विभाग के शिक्षक प्रो मुनेश्वर यादव, जसम के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य प्रो सुरेंद्र प्रसाद सुमन थे। जबकि कार्यक्रम में राजनीति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो जितेंद्र नारायण, प्रो विजय कुमार, प्रो बदरे आलम, मोहम्मद नुरुल्लाह, डॉ. रामा शंकर, डॉ सूरज, डॉ. बच्चा रजक, इंसाफ मंच राज्य उपाध्यक्ष नेयाज अहमद, डॉ संतोष कुमार यादव, रजनीतिकी विज्ञान के सहायक प्रोफेसर शबनम कुमारी, आलोक रंजन तिवारी, भाकपा(माले) राज्य कमिटी सदस्य अभिषेक कुमार, अशोक पासवान, आइसा जिला अध्यक्ष प्रिंस राज, जिला सचिव विशाल कुमार माझी, जिला कार्यकारी सचिव मयंक कुमार यादव, संदीप कुमार, राजू कर्ण, निखिल कुमार, सामाजिक कार्यकर्ता अजित मिश्रा, इनौस जिला सचिव गजेंद्र नारायण शर्मा, युवा पत्रकार पुष्परंजन, शिक्षक नेता फतह आलम, विनोद भारती, छात्र जाप के दीपक कुमार झा, सहित कई लोग शामिल थे। पूरे कार्यक्रम का टेक्निकल संचालन आइसा नेता सिदार्थ राज में किया।
वेबिनार का विषय प्रवेश करते हुए डॉ अजित चौधरी ने कहा कि सबसे पहले भाकपा माले और आइसा सहित आप तमाम लोगों को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आपलोगों ने वर्तमान समय के सबसे महत्वपूर्ण सवाल पर वेबिनार आयोजित किया।
डीएमसीएच भारत व बिहार के पुराने अस्पतालों में एक है इसका पुराना इतिहास है। यह उत्तर बिहार का सबसे पुराना अस्पताल के रूप में जाना जाता है। मिथिलांचल में डीएमसीएच का अपना एतिहासिक योगदान व पहचान रही है। डीएमसीएच से पढ़ाई कर अनेकों डॉक्टर देश-विदेश में कार्यरत है।
इस महामारी के दौर में डीएमसीएच व सरकार की स्थानीय स्तर पर हेल्थ एडुकेशन देने की जरूरत है ताकि बीमारियों के प्रति आम लोगों को जागरूक किया जा सके।
बिहार के अंदर एक स्ट्रॉग मेडिकल टीम गठन करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि सीनियर डॉक्टर को देखकर मरीजो का हौसला बुलंद होता है। इस लिए सीनियर डॉक्टर को इस महामारी में विशेष मेहनत करने की जरूरत है।
डॉ सबीर अहमद ने कहां कि डीएमसीएच को मैंने बहुत नजदीक से देखा व समझा हूँ. डीएमसीएच का अपना एक ऐतिहासिक योगदान रहा है. यहां से अनेकों डॉक्टर देश-विदेश में अपना योगदान दे रहे है और डीएमसीएच का नाम रौशन कर रहे है. डीएमसीएच का मिथिला में ही नहीं पूरे बिहार में अपने कार्यों के बदौलत जाना जाता है.
लेकिन कुछ कारणों व उसकी बदहाली की वजह से हमेशा डीएमसीएच सुर्खियों में रहता है.
वहां के डॉक्टर, नर्स, सफाई कर्मी बेहद ही अमानवीय व्यवस्था में काम को मजबूर है, उनके पास कोई सुरक्षा कीट नहीं है. जिसको ठीक करने की जरूरत है, हमारी मांग है कि डीएमसीएच में एक स्थाई पुलिस चौकी की जरूरत है, ताकि आएं दिन जो कुछ उपद्रवियों द्वारा घटनाएं होती है उसपर रोक लगाई जाएं.
वही प्रो धर्मेंद्र कुमर ने कहां कि दरभंगा के नागरिक होने के नाते बहुत चिंता होती है. जिस तरह से हाल के दिनों में डीएमसीएच की इतिहास, साख़, छवि व प्रतिष्ठा खत्म हो रही है इसको बचाने के लिए और डीएमसीएच की बेहतरी के लिए हम सभी को एकजुट होकर एक कमिटी बनाकर जनजागरण चलाते हुए डीएमसीएच को बचाने की जरूरत है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार ने कभी सही ढंग से ध्यान नहीं दिया यही उदासीनता के कारण अस्पतालों की यह हालत है।
डॉक्टर, नर्स व तकनीकी स्टाफ के अभाव में हमारे यहां आईसीयू जैसे अन्य उपकरण बर्बाद हो रहे है।
समय की मांग है कि अविलंब डॉक्टर, नर्स व तकनीकी स्टाफ सहित तमाम जरूरतों को बहाल करते हुए अपने अस्पतालों ठीक किया जा सके।
वही भाकपा(माले) पोलित ब्यूरो सदस्य धीरेन्द्र झा ने कहा कि हार्ड वेयर और सॉफ्ट वेयर दोनों ही स्तर और DMCH का डिक्लाइन हुआ हैं। जो कोरोना काल मे सामने आया है। DMCH के पास संसाधनों की कमी नही है। लेकिन उसका सही प्रबंधन नही रहने के कारण यह परेशानी बढ़ी है।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि स्वास्थ्य तंत्र पर सरकारी तंत्र हावी है। डिपार्टमेंट और प्रोफेसर, कर्मचारी की ऑटोनोमी नही है। वर्ग कल्चर में भारी गिरावट आई है। इस लिए DMCH में गिवरावत आई है। अभी बहुत अनुकूल समय है। 100 वर्षो पहले भी ऐसी स्थिति नही आई थी। वैज्ञानिक और डॉक्टर की सलाह को सरकार में नकार दिया। जिसके बजह से दूसरा फेज की तैयारी नही हो सकी। संसाधन रहने के बाबजूद हम मरीजो को सुविधा नही दे पा रहे है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के प्रश्न को लेकर समाज के अंदर जगरूकता अभियान में जाना चाहिए। वही उन्होंने कहा कि DMCH बचाओ जन स्वास्थ्य अभियान का आन्दोलमत्मक संघटक बनाने की जरूरत है। और 1 जून को मिथिलांनचल में एक बड़े अभियान की शुरुआत होगी।
वही प्रो मुनेश्वर यादव ने कहा कि
यह वेबिनार डीएमसीएच बचाओ अभियान नहीं है बल्कि नागरिकों की जान बचाओ अभियान है। यह अभियान नागरिकों के राइट टू लाइफ के अधिकार बचाने के लिए है। यह समय की मांग भी है कि जिस तरह से बदहाल स्वास्थ्य तंत्र के वजह से इस कोविड महामारी में लोग डीएमसीएच के बहार तड़प-तड़प कर दम तोड़ चुके है. इसलिए दरभंगा में एम्स बने कोई दिक्कत नहीं लेकिन इससे पहले बदहाली की मार झेल रहे डीएमसीएच को व्यवस्थित करने की जरूरत है।
वही सुरेंद्र प्रसाद सुमन ने वेबिनार में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उसे दुरुस्त करने पर बल दिया। साथ ही DMCH में बह रही गंगोत्री को साफ करने पर बल दिया।
वही प्रो जितेंद्र नारायण ने कहा कि इस बेहतरीन मुद्दा सेमिनार करने के लिए बधाई दिया साथ ही साथ उन्होंने DMCH को बचाने के सवाल पर दलगत भावना से ऊपर उठकर सभी लोगो को साथ आने की जरूरत है।
वेविनार से डॉ. अजित कुमार चौधरी के नेतृत्व में DMCH बचाओ अभियान को संचालन करने का निर्णय लिया गया।
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