कोरोना के आंकड़े को लेकर
आत्मचिंतन का समय: डाॅ बैजू

कोरोना से संक्रमित कसरौर पंचायत के पूर्व मुखिया बच्चन झा एवं इसी गांव के निवासी पटना उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जज धरणीधर झा की पत्नी के निधन पर दुख जताते हुए विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने शुक्रवार को कहा कि इस घटना ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सरकारी आंकड़े चाहे जो कहते हों, कोरोना को लेकर स्थिति अभी भी भयावह बनी हुई है। खासकर, गांव के हालात अभी भी काफी बदतर बने हुए हैं। गांव के हर गली-टोले में जहां लोग संक्रमण के शिकार हैं, वहीं शासन व प्रशासन को इसकी कोई फिक्र नहीं है। न तो गांवों में सही तरीके से जांच की व्यवस्था बहाल है और ना ही इन जगहों पर समुचित उपचार के संसाधन ही उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें सूचना मिली है कि स्वयं धरणीधर झा भी कोरोना से संक्रमित हैं और स्वास्थ्य विभाग की कुव्यवस्था से नाराज होकर होम आइसोलेशन में अपना यथोचित उपचार करने को मजबूर हैं।
डाॅ बैजू ने कहा कि समाचारों में कोरोना के गिरते के आंकड़े पढ कर आमजन की प्रतिक्रिया है कि जांच ही कम हो रही होगी या फिर सरकारें आंकड़ों को कम कर के दिखा रहीं हैं। उनके संदेहों की पुष्टि गावों में कोरोना के बढ़ते कहर से हो रही है। उन्होंने कहा कि महामारी के आंकड़े यदि संदूषित और असत्य होंगे तो निस्संदेह हमारी योजनायें, रणनीतियां, बजट आवंटन से ले कर तमाम तरह की तैयारियां उतनी ही खोखली होंगी। उनके बेअसर और नाकाम होने की गारंटी भी उतनी ही ज्यादा होगी। इनके आधार पर लगाये जाने वाले आपदा प्रबंधन के अनुमान और आकलन यदि फेल हो जायेंगे तो हम लाखों लोगों की जान बचाने में भी विफल हो जायेंगे।
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