मातृभाषा की बनाई जा रही सूची के प्रति सचेत रहने का विद्यापति सेवा संस्थान ने किया आह्वान
मामला: राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद् के निर्देश पर तैयार की जा रही मातृभाषा सूची का

विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डाॅ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने मैथिली भाषा के संवैधानिक महत्व एवं जनगणना में मैथिली भाषा दर्ज किए जाने के लाभ की ओर आम मिथिलावासी का ध्यान खींचते हुए नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद् के निर्देश पर प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर तक के विद्यालयों में पढ़ रहे विद्यार्थियों द्वारा घर में बोली जाने वाली भाषा यानी मातृभाषा की बनाई जा रही सूची के प्रति सचेत रहने का आह्वान किया है। रविवार को उन्होंने कहा कि राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद् के निर्देश पर तैयार की जा रही इस सूची के आधार पर ही चूंकि बच्चों के लिए पाठ्य सामग्री तैयार की जानी है, इसलिए इस सूची में मातृभाषा के रूप में मैथिली भाषा का दर्ज होना खास मायने रखता है। उन्होंने शिक्षकों से भी इस मामले में पारदर्शिता अपनाते हुए बच्चों को जागरूक करने की अपील की।
मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा ने कहा कि विद्यालय स्तर पर तैयार की जा रही इस सूची के प्रति बच्चों के अभिभावकों को विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है। प्रो जीवकांत मिश्र ने कहा कि मातृभाषा के माध्यम से सहज ज्ञान अर्जन की बात को अब सरकार ने भी स्वीकार कर लिया है। लेकिन इसके क्रियान्वयन में बच्चों के मातृभाषा की सूची अत्यंत महत्त्व रखेगी। इसके लिए उन्होंने अभिभावकों से जागरूक रहने की अपील की।
संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष सह वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ बुचरू पासवान ने राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद् के निर्देश तैयार किए जा रहे मातृभाषा/स्थानीय भाषा/क्षेत्रीय भाषा से संबंधित सर्वेक्षण रिपोर्ट को लेकर विभिन्न स्कूलों के प्रधानाध्यापकों व शिक्षक संगठनों से अपील की है कि सर्वेक्षण रिपोर्ट में बच्चों के घर में बोली जाने वाली भाषा मैथिली को अनिवार्य रूप से दर्ज करें। क्योंकि मिथिला क्षेत्र के आमजन की भाषा केवल और केवल मैथिली ही है।
मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने केन्द्र सरकार की नई शिक्षा नीति के तहत मातृभाषा को प्राथमिक शिक्षा का मूल आधार बताते हुए समाज के सभी वर्गों से अपनी भाषा मैथिली के प्रति जागरूक होने की अपील करते कहा कि अपने बच्चों के बीच हो रहे इस सर्वेक्षण कार्य के प्रति सतर्क रहें।
साहित्यकार डाॅ महेन्द्र नारायण राम ने मैथिली भाषा एवं साहित्य के विकास के लिए कार्य कर रही संस्थाओं से भी इस मामले में एकजुटता का प्रदर्शन करने का आह्वान किया है।
मालूम हो कि “नई शिक्षा नीति 2020” के प्रावधान के अनुसार संपूर्ण भारत में प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य रूप से अपनी मातृभाषा में ही दी जाएगी। जिसमें
प्राथमिक तथा मध्य विद्यालय के साथ-साथ माध्यमिक विद्यालय को भी सम्मिलित किया गया है। क्षेत्रीय आधार पर मातृभाषा की सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करने हेतु सरकार सर्वेक्षण करवा रही है। जिसमें राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद् के संयुक्त निदेशक (प्रशासन) ने जिला शिक्षा पदाधिकारी तथा जिला डीपीओ को आदेशित किया है कि वे अपने जिला के विद्यालयों में बच्चों द्वारा घर में बोली जाने वाली मातृभाषा के संदर्भ में विस्तृत जानकारी दें।
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