मैथिली कविता-संग्रह ‘अभिसारिका’ का कुलपति ने किया विमोचन

समाज और साहित्य परस्पर एक दूसरे के पूरक होते हैं। साहित्य में यदि जन मनोरंजन के साथ लोक कल्याण का भाव निहित हो तो, यह समाज के उत्तरोत्तर विकास में विशेष रूप से सहायक होता है। ये बातें बुधवार को एनएईएमडी काॅलेज, नोएडा (उत्तर प्रदेश) की प्राध्यापिका जयंती कुमारी के मैथिली कविता-संग्रह ‘अभिसारिका’ का विमोचन करते हुए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र प्रसाद सिंह ने कही। दिल्ली प्रवास में रहते हुए भी अपनी मातृभाषा के प्रति प्रेम व आकर्षण का भाव अपनी रचनाओं के माध्यम से जाहिर करने के लिए उन्होंने कवयित्री की खुले मन से प्रशंसा की तथा मैथिली के विकास के लिए सभी को साथ मिलकर काम करने की जरूरत पर बल दिया।
मौके पर अपने संबोधन में विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव एवं लनामिवि के सिंडिकेट सदस्य डाॅ बैद्यनाथ चौधरी ‘बैजू’ ने कहा कि मिथिला के पारंपरिक गीतों में निहित भावों को अपनी कविताओं के माध्यम से प्रकट करते हुए कवयित्री ने यह सहज ही साबित कर दिखाया है कि वह कवयित्री मन की कल्पनाशीलता के साथ-साथ सुललित एवं संतुलित शब्द भंडार से भी संपन्न हैं। मैथिली साहित्य जगत के नवोदित रचनाकारों का इस गुण से संपन्न होना निश्चित रूप से मैथिली साहित्य जगत के लिए आह्लादपूर्ण है।
कुलपति के प्रति आभार प्रकट करते हुए कवयित्री जयंती कुमारी ने कहा कि अपने व्यस्ततम दिनचर्या से बहुमूल्य समय निकाल पुस्तक का विमोचन एवं आशीर्वचनों से अभिसिंचित कर उन्होंने कृतकृत्य कर दिया है। उन्होंने बताया कि अनुप्रास प्रकाशन से प्रकाशित इस कविता-संग्रह में मैथिली की कुल 127 कविताएं संग्रहित हैं। इस अवसर पर वैद्य गणपति नाथ झा, समाजसेवी शरत झा, विद्यापति सेवा संस्थान के मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा, मैथिली सेवी मणिभूषण राजू आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
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