विश्वविद्यालय बचाओ संघर्ष मोर्चा ने दिया धरना
कुलपति-कुलसचिव की बर्खास्तगी तक आन्दोलन जारी रहेगा- संघर्ष मोर्चा

दरभंगा विश्वविद्यालय बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले छात्र संगठन एआईएसएफ, आइसा व जन अधिकार छात्र परिषद के कार्यकर्ताओं ने कुलपति-कुलसचिव हटाओ विश्वविद्यालय-बचाओ अभियान के तहत एक दिवसीय धरना मिथिला विश्वविद्यालय मुख्यालय स्थित धरना स्थल पर दिया। धरना की अध्यक्षता संयुक्त रुप से जन अधिकार छात्र परिषद के प्रदेश प्रवक्ता दीपक झा, एआईएसएफ के जिला अध्यक्ष शशि रंजन प्रताप सिंह, आइसा के राज्य सह सचिव सह जिला अध्यक्ष प्रिंस राज ने किया। धरना के दौरान उपस्थित छात्रों ने भ्रष्ट कुलपति और कुलसचिव सहित राज्यपाल की इस्तीफा की मांग कर रहे थे। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन, राजभवन व बिहार सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। मौके पर सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में केंद्र-राज्य सरकार व राजभवन बिहार के उच्च शिक्षा को अपना चारागाह समझ रखी है। राज्यपाल से लेकर बिहार के सभी विश्वविद्यालय के कुलपति विश्वविद्यालय को लूट का अड्डा बना कर छोड़ दी है। सभी कुलपति व कुलाधिपति को छात्र कर्मचारी व शिक्षक हितों से कोई मतलब नहीं है ये लोग सिर्फ शिक्षा के मंदिर विश्वविद्यालय को लूट का दुकान बना कर रख दी है। बिहार के विश्वविद्यालयों में कुलपति व कुलसचिव के द्वारा किए गए लूट के कारण बिहार के उच्च शिक्षा पूरे देश दुनिया में बदनाम हो गई है। बिहार के विश्वविद्यालयों से उच्च शिक्षा लेकर जब छात्र बाहर निकलते हैं तो उन्हें नौकरी नहीं मिलती। वही मिथिला विश्वविद्यालय में डाटा सेंटर व विश्वविद्यालय के आपसी लड़ाई के कारण विश्वविद्यालय में नामांकित छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। विगत 1 महीने से डाटा सेंटर में ताला लगा हुआ है जिस कारण छात्रों के परीक्षा फॉर्म, नामांकन व रिजल्ट में देरी हो रही है। कई महीनों से डिग्री पार्ट थर्ड का परीक्षा परिणाम लंबित है। जिसके कारण दूसरे बड़े केंद्रीय विश्वविद्यालयों सहित बाहर के विश्वविद्यालय के नामांकन परीक्षा व नौकरी निकाल कर बैठे छात्र परीक्षा परिणाम नहीं आने के कारण दूसरे जगह ना तो नामांकन ले पा रहा है और ना ही नौकरी ले पा रही है। इससे साफ जाहिर होता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। वही पूरे बिहार में मिथिला विश्वविद्यालय का सत्र नियमित था। इस झगड़े के कारण सत्र भी अनियमित हो गया है। वही वक्ताओं ने कहा कि मिथिला विश्वविद्यालय में भी बड़े पैमाने पर आर्थिक लूट हुई है। परीक्षा विभाग के अकाउंट से शिक्षा माफियाओं के अकाउंट पर सीधा पैसा ट्रांसफर किया गया है। वही टेंडर में भी बड़े पैमाने पर लूट हुई है। कुलसचिव के द्वारा डेली वेजेस मजदूरों की भर्ती में भी मोटी रकम की उगाही की गई है। विगत कई वर्षों से कोसी छात्रावास बंद पड़ा हुआ है। इस छात्रावास को छात्रों के लिए आवंटित करने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन शादी-विवाह-मुंडन में इसे भाड़े पर लगाती है। वही संघर्ष मोर्चा के द्वारा कुलाधिपति को कुलपति के द्वारा एक आवेदन दिया गया है। जिसमें कहा गया कि 14 दिसंबर तक अगर कुलसचिव व कुलपति की बर्खास्तगी या इस्तीफा नहीं होता है तो फिर आगे सभी छात्र संगठन आम छात्रों को लामबंद कर विवश होकर उग्र आंदोलन करेगी। धरना को एआईएसएफ के जिला सचिव शरद कुमार सिंह, शंकर यादव, विजय कुमार यादव, आदर्श कुमार, मन्टू कुमार, कर्ण कुमार, आइसा के राज्य सह सचिव राजू कर्ण, राज्य परिषद सदस्य चंदन कुमार आजाद, मोहम्मद तालिब, संतोष रजक, गोलू सिंह, रोहित कुमार, अभिनव कुमार, जन अधिकार छात्र परिषद के जिलाध्यक्ष दीपक स्टार, सोशल मीडिया जिला अध्यक्ष आसीफ आदील, साईं कुमार निरूपम, विकास मिश्रा, गोरव कुमार किट्टू, नटवर ठाकुर, जितेन्द्र यादव, कृपानन्द मिश्रा, गणेश यादव, विकास साहू, निशांत कुमार श्रीवास्तव, चमन राज, मुकेश कुमार, कुलदीप मिश्रा आदि ने संबोधित किया।
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