मैथिली कथा वैश्विक कथा के समतुल्य :अशोक

विश्वविद्यालय मैथिली विभाग में विभागाध्यक्ष प्रो. दमन कुमार झा की अध्यक्षता में ‘आधुनिक मैथिली कथा :दशा ओ दिशा’ पर एक विशिष्ट चर्चा हुई। इसमें वक्ता के रूप में आधुनिक मैथिली कथा के स्तंभ विभूति आनन्द, शिवशंकर श्रीनिवास, कथाकार अशोक एवं अभिलाषा उपस्थित थे। अपने वक्तव्य में कथाकार अशोक ने ‘समकालीन मैथिली कथा के परिदृश्य’ पर विस्तृत से व्याख्यान प्रस्तुत किया । उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज मैथिली कथा अपनी विशिष्टता संग वैश्विक कथा के समतुल्य खड़ी है। शिवशंकर श्रीनिवास ने ‘मैथिली कथा लेखन के आरम्भिक स्वर’, ‘कथा में पुनर्जागरण’उदारीकरण- भूमंडलीकरण के दौर में मैथिली कथा आदि पर विस्तारपूर्वक चर्चायें की। अपने संबोधन में कथाकार विभूति आनन्द ने एकैसम सदी की मैथिली कथा की विशिष्टता पर वक्तव्य दिया। वहीं कथाकार डॉ अभिलाषा ने समकालीन मैथिली कथा के ट्रेंड पर चर्चा की। अन्त में अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में विभागाध्यक्ष प्रो दमन कुमार झा ने कहा की इसतरह की परिचर्चा समय समय पर विभाग में होनी चाहिए। इससे विभिन्न विषयों में शोध करने बाले शोधार्थीयों को लाभ मिलेगा। और इससे वर्तमान मैथिली गतिविधियों से सभी लाभान्वित भी होंगे।अन्त में सभी आगत अतिथियों को विभाग की ओर से विभागीय शोध पत्रिका प्रदान किया गया।वरीय एवं कनीय शोधप्रज्ञ सत्यनारायण प्रसाद यादव, दीपक कुमार, नीतू कुमारी, दीपेश कुमार, शालिनी कुमारी, राज्यश्री कुमारी, भोगेन्द्र प्रसाद सिंह के कई जिज्ञासाओं को विशिष्ट विद्वानों द्वारा शांत किया गया।इस अवसर पर ज्ञानी कुमार, गुड्डू कुमार कर्ण, भाग्यनारायण झा आदि उपस्थित थे। धन्यवाद ज्ञापन सत्यनारायण प्रसाद यादव ने किया।
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