बाल श्रमिकों की मुक्ति के मसीहा कैलाश सत्यार्थी को नोबेल शांति पुरस्कार मिलने की नवमी वर्षगांठ पर जताई खुशी, बच्चों के बिच मिठाई का वितरण कर बाल अधिकार के प्रति किया जागरूक

सीतामढ़ी: सीतामढ़ी जिला में बाल शोषण के खिलाफ जमीनी स्तर पर कार्यरत संगठन बचपन बचाओ आंदोलन के संस्थापक नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी को नोबेल मिलने की नवमी वर्षगांठ पर राजोपट्टी स्थित किड्स सेक्रेड वैली स्कूल के निदेशक राॅविन कुमार के नेतृत्व में श्री सत्यार्थी को नोबेल मिलने की नवमी वर्षगांठ समारोह का आयोजन किया गया। निदेशक राॅविन कुमार के द्वारा इस अवसर पर बच्चों के बिच मिठाई का वितरण कर खुशी जाहिर करते हुए बताया कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी बच्चों के शोषण के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में सबसे बड़े नेताओं और सबसे ऊंची आवाज में से एक हैं। कई जानलेवा हमलों सहित कई बाधाओं का सामना करने के बावजूद, वह यह सुनिश्चित करने के लिए अपने संघर्ष में निडर होकर आगे बढ़े हैं कि हर बच्चा सुरक्षित, स्वस्थ और शिक्षित हो। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से हजारों बच्चों को गुलामी के संकट से बचाया है। बच्चों के खिलाफ हिंसा को खत्म करने की दिशा में श्री सत्यार्थी के निडर और अविश्वसनीय नीतिगत प्रयासों के परिणामस्वरूप विश्व स्तर पर पथ-प्रदर्शक कानून बने हैं। प्रत्येक बच्चे को अपने बच्चे की तरह सुरक्षित रखने के उनके अथक प्रयासों के कारण उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया । राॅविन कुमार ने बताया कि समारोह का उद्देश्य बाल श्रम, बाल तस्करी, बाल विवाह व बाल शोषण जैसे कुरितयो के अंत को लेकर बच्चों के बिच जागरुकता करना है ताकि बाल शोषण के खिलाफ बच्चे भी दूसरों बच्चों के लिए अपनी आवाज बुलंद कर सकें, श्री सत्यार्थी ने नोबेल शांति पुरस्कार मिलने पर विश्व के उन बच्चों को समर्पित किया था , जिनकी पहचान बाल श्रमिकों के रूप में होती है , उन्होंने कहा कि जब तक गरीब का बच्चा-बच्चा शिक्षित नहीं होगा तब तक बाल मजदूरी को पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता है। इस दिशा में बचपन बचाओ आंदोलन का प्रयास जारी है जरूरत है की हमसभी सामुहिक रुप से प्रयास करे ताकि बाल श्रम, बाल विवाह जैसी कुरीतियों का अन्त हो सकें। समारोह में बचपन बचाओ आंदोलन के मुकुंद कुमार चौधरी सहित छात्र छात्रा शामिल थे।
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