भ्रातृद्वितीया समारोह का भव्य आयोजन

भ्रातृद्वितीया के सांस्कृतिक महत्व को सहेजने के उद्देश्य से रविवार को शुभंकरपुर में ‘भ्रातृद्वितीया समारोह का भव्य आयोजन किया गया। गंधर्व कुमार झा के वेदध्वनि से शुरू हुए समारोह में बहनें भरोशा देवी, आराधना, संयोगिता, वंदना, जागृति, आकृति, मुस्कान, खुशी, रानू, प्रानू, तुलिका, जया, राधिका, दिप्ति, सर्वनिष्ठा आदि ने भाइयों मणिकांत झा, अमरकांत झा, संदीप झा, मुक्तिनाथ चौधरी, गंधर्व झा, पुष्पक, केशव, सुमित, आदर्श, अनय, माधव, तत्सम, अभिनव आदि का हस्तपूजन कर उनके दीर्घायु होने की कामना की। बहनों ने अपने भाईयों की लंबी आयु के लिए उनके माथे पर तिलक लगाया और पान, सुपारी, कुम्हर का फूल और रुपया आदि भाई के हाथों में रख उनका पूजा करते हुए ‘गंगा नोतय छथि यमुना के, हम नोतैय छी अपना भाई के…’मंत्र पढ़ भाई के लंबी आयु की कामना की।
मौके पर उपस्थित विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कहा कि सद्भावना यात्रा समिति द्वारा मिथिला के प्रसिद्ध लोक पर्व भ्रातृद्वितीया को समारोह पूर्वक मनाना भावी पीढ़ी को अपने संस्कार तथा सभ्यता को संरक्षित रखने मे मील का पत्थर साबित होगा।
वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा के संयोजन में आयोजित समारोह में महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान के चेयरमैन हीरा कुमार झा ने कहा कि हिन्दू धर्म में भ्रातृद्वितीया एक ऐसा पर्व है, जो भाई के प्रति बहन के स्नेह को अभिव्यक्त करता है एवं बहनें अपने भाई की खुशहाली के लिए कामना करती हैं। संतोष कुमार झा ने कहा कि रक्षाबंधन के बाद, भ्रातृद्वितीया मिथिला का ऐसा दूसरा त्योहार है, जो भाई बहन के अगाध प्रेम को समर्पित है।
समारोह में मणिकांत झा ने मान्य परंपराओं का जिक्र करते हुए बताया कि यमुना व यमराज के अटूट संबंध की तरह यह रिश्ता हर भाई-बहन के साथ कायम रहे, इसी कामना के साथ यह त्योहार मनाया जाता है। कई जगहों पर बहनें अपने भाइयों को बजरी खिलाकर स्वस्थ्य व दीर्घायु जीवन की कामना करती है। साथ ही उसके बलशाली होने की ईश्वर से मन्नतें मांगती हैं। भाई-बहन के पर्वों में इसका पौराणिक व आध्यात्मिक आधार है।
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