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माले के वरिष्ठ नेता का. लक्ष्मी पासवान का दूसरा स्मृति दिवस मनाया गया। 

 

माले के वरिष्ठ नेता का. लक्ष्मी पासवान का दूसरा स्मृति दिवस मनाया गया।

 

भाकपा–माले, दरभंगा के संस्थापक सदस्य वरिष्ठ नेता का. लक्ष्मी पासवान के दूसरे स्मृति दिवस के अवसर पर भाकपा(माले) कार्यालय, पंडासराय में श्रद्धांजलि सह संकल्प सभा का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का संचालन युवा नेता रंजीत राम ने किया।

 

इस अवसर पर का. लक्ष्मी पासवान जी को याद करते हुए भाकपा(माले) के वरिष्ठ नेता आर. के. सहनी ने कहा कि लक्ष्मी पासवान व्यापक जनसंपर्क के नेता थे। वे सचमुच जन–जन के नेता थे। जीवन की तमाम जरूरतों के लिए वे जनता पर निर्भर थे, जनता के अलावा उन्होंने किसी ओर मुड़ कर नहीं देखा। पक्के होलटाइमर थे। जब वे पार्टी कार्यालय में रहते थे तो विभिन्न राजनीतिक–सामाजिक मुद्दों पर बहस छेड़ते थे। उन्होंने हमेशा भाजपा को मनुष्यता विरोधी विचारधारा के पोषक के रूप में देखा। दरभंगा में पार्टी के स्थापना काल में तरौनी, एकमी से महाराजी तक के सभी गांवों में लक्ष्मी जी का काम–काज था। हमलोगों ने मिलकर व्यापक आंदोलनों के माध्यम से पार्टी को विस्तार दिया। आज पार्टी को आगे बढ़ा कर, जनता के मुद्दों पर जारी आंदोलनों को आगे बढ़ा कर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है!

 

भाकपा(माले) जिला सचिव बैद्यनाथ यादव ने कहा कि मौजूदा समय में न्याय और इंसाफ की आकांक्षा रखने वाले तमाम लोगों की पार्टी के रूप में भाकपा–माले जानी जाती है। लक्ष्मी जी जनता की सेवा करने वाली पार्टी माले के हमेशा प्रेरणास्रोत रहेंगे। पार्टी ने उनके राजनीतिक–सामाजिक अवदानों को जन–जन की स्मृति में बनाए रखने के उद्देश्य से उनके नाम पर दोनार स्थित लोहिया चरण सिंह कॉलेज प्रांगण में साभागार का निर्माण करेगी। उद्घाटन तिथि की जल्दी ही घोषणा की जाएगी। इसके अलावा लक्ष्मी जी के गांव में उनकी आदमकद मूर्ति लगवाने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। हमारा मानना है कि जिस पार्टी को स्थापित करने के लिए लक्ष्मी जी जीवनपर्यंत संघर्ष करते रहे, आज उनकी अनुपस्थिति में उनके आदर्शों को सामने रख कर, वह स्वप्न पूरा किया जाए। लक्ष्मी जी के राजनीतिक जीवन का बड़ा हिस्सा सामंती जातिवादी सांप्रदायिक शक्तियों से संघर्ष करने में बीता। जिस भाजपा को वे जनशत्रु के रूप में देखते थे, वो आज खुलेतौर पर जनविरोधी राजनीति कर रही है। उसे रोक कर ही लक्ष्मी जी को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकेगी।

 

जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य प्रो. सुरेंद्र सुमन ने कहा कि का. लक्ष्मी जी दरभंगा में माले के पर्याय के रूप में जाने जाते थे। इससे उनकी प्रसिद्धि का अंदाजा लगाया जा सकता है। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है कि उन्होंने सैकड़ों लोगों को कम्युनिस्ट बनाया। आज का दिन संकल्प की घड़ी है। आइए लक्ष्मी जी को याद करते हुए पार्टी के निर्माण और विस्तार का संकल्प लें। जनांदोलनों में बढ़–चढ़ कर हिस्सा लें।

 

राज्य कमिटी सदस्य का.अभिषेक कुमार ने कहा कि लक्ष्मी जी की अनुपस्थिति से पार्टी के अंदर एक बहुत बड़ा खालीपन उभर आया है। उनका समाज से तथा पार्टी सदस्यों से बहुत ही आत्मीय संबंध था। वे चाहते तो सिद्धांत से समझौता कर क्या नहीं पा सकते थे? लेकिन वे हमेशा जनमुक्ति के लिए संघर्ष पथ पर अडिग रहे। पार्टी अभियानों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अनुकरणीय है। युवा सदस्यों को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। उनके जाने से जो वैक्यूम बन गया है, उसे पार्टी के कामकाज को बढ़ा कर, जनसंपर्क को मजबूत कर ही भरा जा सकता है। हम आने वाले समय में इस खालीपन को जरूर भरेंगे!

 

माले के राज्य कमिटी सदस्य सह इंसाफ मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष नेयाज अहमद ने कहा कि आज चरम साम्प्रदायिकता के इस दौर में धर्मनिरपेक्ष, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने वाली न्यायप्रिय शक्तियों को एकजुट करना होगा। समाज में बढ़ते धार्मिक व जातीय विभाजन को रोकने में का. लक्ष्मी जी जैसे परिवर्तनकामी धारा के नेताओं की हमें सख्त जरूरत है। लक्ष्मी जी को याद करते हुए आज सांप्रदायिकता के विरुद्ध जारी संघर्ष को अधिक व्यापक करने की जरूरत है।

 

इस अवसर पर वरिष्ठ नेता आर के सहनी, जिला सचिव बैद्यनाथ यादव, राज्य कमिटी सदस्य नेयाज अहमद, अभिषेक कुमार, प्रो सुरेंद प्रसाद सुमन, हरि पासवान, विनोद सिंह, मोहम्मद जमालुद्दीन, शनिचर पासवान, समीर, भोला पासवान, प्रवीण यादव, राजेश पासवान, अशोक महतो, अमर पासवान, रानी शर्मा, अवधेश सिंह, मोहम्मद रोजिड, विजय यादव, रामलाल सहनी, हरिश्चंद्र पासवान, प्रिंस राज सहित कई लोग शामिल थे।

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