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राम जानकी नवमी पर महिला संवाद का 19वां दिन बना महिला शक्ति का प्रतीक

 

राम जानकी नवमी पर महिला संवाद का 19वां दिन बना महिला शक्ति का प्रतीक

सीता माता की प्रेरणा से महिलाओं ने उठाई अधिकारों की आवाज़, रखीं अपनी मांगें

मंगलवार को राम जानकी नवमी के पावन अवसर पर दरभंगा जिले में आयोजित महिला संवाद कार्यक्रम का 19वां दिन किसी पर्व-त्योहार से कम नहीं रहा। इस दिन को सीता माता के अवतरण दिवस के रूप में मनाते हुए कार्यक्रम की शुरुआत महिलाओं द्वारा कलश पूजन के साथ की गई। कार्यक्रम में ग्राम संगठन क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और इसे एक सामूहिक उत्सव का स्वरूप दिया। महिलाओं ने सीता माता के आदर्शों—प्रेम, श्रद्धा, विश्वास और त्याग—को स्मरण करते हुए परिचर्चा के माध्यम से महिला अधिकारों और उनकी सामाजिक, आर्थिक आवश्यकताओं पर विस्तार से संवाद किया।

इस अवसर पर बेनीपुर प्रखंड की पशुपालन और दुग्ध उत्पादन से जुड़ी महिलाओं ने अपनी मांगें रखते हुए कहा कि पशु शेड और दुग्ध संग्रह केंद्रों की स्थापना की जाए ताकि उनके व्यवसाय को संगठित रूप से आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने पशुओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को प्रमुख मुद्दा बताया और पशु चिकित्सा केंद्रों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया। महिलाओं का कहना था कि खेती के बाद पशुपालन ही इस क्षेत्र में आय का सबसे बड़ा स्रोत है और इसके सुदृढ़ीकरण से सैकड़ों परिवारों की आजीविका सशक्त हो सकती है।

वहीं अलीनगर से आईं जन्नत बेगम ने कहा कि वे मुर्गी पालन व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं, परंतु इसके लिए उन्हें उचित प्रशिक्षण और प्रारंभिक पूंजी की आवश्यकता है। उन्होंने कार्यक्रम मंच से प्रशासन से अनुरोध किया कि ऐसे इच्छुक महिलाओं को स्वरोजगार हेतु मार्गदर्शन और सहायता प्रदान की जाए।

दरभंगा जिले के अंतर्गत 780 ग्राम संगठनों में अब तक 25 प्रचार रथों के माध्यम से महिला संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जा चुका है, जिसमें एक लाख पचास हजार से अधिक महिलाओं ने भागीदारी निभाई है। इनमें से सोलह हजार से अधिक महिलाओं ने अपनी व्यक्तिगत समस्याओं, संघर्षों और भविष्य की योजनाओं को खुलकर सामने रखा है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि महिलाएं अब केवल श्रोता नहीं रहीं, बल्कि मुखर वक्ता और सामाजिक परिवर्तन की वाहक बन चुकी हैं।

कार्यक्रम में महिलाओं ने केवल शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और रोजगार की मांग नहीं रखी, बल्कि उन्होंने संसाधनों की उपलब्धता, सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ लड़ाई, और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता का भी प्रदर्शन किया। कई महिलाओं ने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ शपथ ली और समावेशी, न्यायपूर्ण तथा समानता आधारित समाज निर्माण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।

महिला संवाद के दौरान सामने आई प्रेरणादायक कहानियाँ न केवल अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं, बल्कि यह भी प्रमाणित कर रही हैं कि अब महिलाएं अपनी पहचान खुद गढ़ रही हैं। इन कहानियों के माध्यम से यह स्पष्ट हो रहा है कि महिलाएं अब सिर्फ आश्रित भूमिका में नहीं, बल्कि निर्णय लेने और नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। दरभंगा जिले में चल रहा यह कार्यक्रम महिलाओं की आत्मनिर्भरता, सामाजिक भागीदारी और अधिकार चेतना को एक नई दिशा देने में सफल हो रहा है।

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