• मिथिला विश्वविद्यालय के एनएसएस कोषांग द्वारा ‘विश्व साइकिल दिवस’ के अवसर पर ‘साइकिल जागरूकता रैली’ आयोजित
• साइकिल प्रयोग से मांसपेशियां मजबूत, रक्त संचार नियमित, हृदय एवं फेफड़ा स्वस्थ तथा वजन का नियंत्रण संभव- डॉ चौरसिया
• साइकिल सस्ता, सरल, सुलभ एवं उपयोगी वाहन जो अच्छा व्यायाम एवं मानसिक तनाव का रक्षक – डॉ सोनू राम शंकर

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के राष्ट्रीय सेवा योजना कोषांग के तत्वावधान में ‘विश्व साइकिल दिवस’ के अवसर पर प्रातः काल में “साइकिल जागरूकता रैली” का आयोजन किया गया, जिसमें एनएसएस के कार्यक्रम समन्वयक डॉ आर एन चौरसिया, स्नातकोत्तर विभाग के एनएसएस पदाधिकारी डॉ सोनू राम शंकर, आरबी जालान कॉलेज, दरभंगा के एनएसएस पदाधिकारी प्रो शिव नारायण राय, पीजी के वरीय स्वयंसेवक अक्षय कुमार झा एवं स्नातकोत्तर विभाग, सीएम साइंस कॉलेज, सीएम कॉलेज, मारवाड़ी कॉलेज, आरबी जालान आदि कॉलेजों से विवेक भारती, समरेश कुमार, आशीष रंजन, सुजीत कुमार, विवेक कुमार राम, अमन कुमार, विक्रम कुमार ठाकुर, विवेक कुमार सिंह, भावेश कुमार, रितिक कुमार, आयुष पराशर, लक्ष्य कुमार ठाकुर, रजनीश कुमार, सोनू कुमार सहनी, विकास कुमार, विशाल कुमार, सुमेधा श्रीवास्तव, सुलेखा कुमारी, सानिया परवीन, सुनिधि गुप्ता, वर्षा कुमारी तथा निशा कुमारी आदि स्वयंसेवकों ने सक्रियता पूर्वक भाग लिया, जिन्हें प्रमाण पत्र भी दिया गया। जागरूकता रैली विश्वविद्यालय परिसर तथा आसपास के सड़कों, गलियों एवं मोहल्लों से गुजरते हुए ‘साइकिल चलाएं- स्वस्थ जीवन बनाएं’, साइकिल हमारी शान है- स्वस्थ जीवन की पहचान है’, जन-जन को जगाना है- साइकिल को अपनाना है’ आदि प्रेरक नारा लगाते हुए जगह- जगह पर रुककर आमलोगों को साइकिल चलाने के महत्व को बताते हुए उन्हें जागरूक किया।
साइकिल जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ करते हुए एनएसएस के विश्वविद्यालय समन्वयक डॉ आर एन चौरसिया ने कहा कि साइकिल का हमारे जीवन में काफी महत्व है, जिसके उपयोग से मानवीय स्वास्थ्य तथा हमारा पर्यावरण बेहतर बन सकता है। साइकिल चलाने से हमारी मांसपेशियां मजबूत, रक्त संचार नियमित, हृदय एवं फेफड़ा स्वस्थ तथा शरीर का वजन भी नियंत्रित रहता है। उन्होंने कहा कि साइकिल एक पर्यावरण मित्र जैसा वाहन है जो वायु एवं ध्वनि प्रदूषण को कम करने में मदद करती है। हमें अपने दैनिक जीवन में साइकिल को अधिक से अधिक अपनाना चाहिए, ताकि हम एक बेहतर और टिकाऊ भविष्य की ओर बढ़ सकें। डॉ चौरसिया ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2018 में 3 जून को ‘विश्व साइकिल दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की थी।
डॉ सोनू रामशंकर ने कहा कि साइकिल चलाना एक अच्छा व्यायाम है, जिससे हमारे मानसिक तनाव में कमी आती है और मन भी प्रसन्न रहता है। यह एक सरल, सस्ता, सुलभ एवं उपयोगी वाहन है जो ईंधन की बचत और रखरखाव की कम जरूर के कारण आर्थिक लाभ प्रदान करता है। उन्होंने दैनिक जीवन में साइकिल का अधिक से अधिक उपयोग करने का आह्वान करते हुए कहा कि मैं प्रतिदिन साइकिल का प्रयोग करता हूं। खासकर कम दूरियों के लिए साइकिल सुविधाजनक, विश्वसनीय एवं लचीला परिवहन का साधन है। प्रो शिव नारायण राय ने कहा कि साइकिल एक आदर्श वाहन है जो हमारे जीवन को बेहतर बनाने में मदद करती है। यह छोटे-बड़े, गरीब-अमीर, स्त्री-पुरुष, बच्चे-वृद्ध सबके लिए अति उपयोगी वाहन है। साइकिल अपने आविष्कार से लेकर आज तक एक लोकप्रिय एवं सुविधाजनक साधन है। अक्षय कुमार झा ने बताया कि इस वर्ष के विश्व साइकिल दिवस का थीम- ‘साइकिलिंग के माध्यम से स्वास्थ्य, समानता और स्थिरता को बढ़ावा देना’ है। आज चीन, जापान, स्विट्जरलैंड आदि विकसित यूरोपीय देशों में साइकिल का अत्यधिक प्रयोग किया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन 30 मिनट या उससे अधिक साइकिल चलाने से मधुमेह का खतरा 40% तक कम हो सकता है। उन्होंने आह्वान किया कि हमारे शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं अधिक से अधिक साइकिल का उपयोग कर इसे समाज में बढ़ावा दें।
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