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अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू – LNMU प्रशासन के विरुद्ध छात्रों की निर्णायक लड़ाई

 

अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू – LNMU प्रशासन के विरुद्ध छात्रों की निर्णायक लड़ाई

 

मिथिला विश्वविद्यालय में व्याप्त अव्यवस्था, अनियमित शैक्षणिक सत्र, महाविद्यालयों में फैली शैक्षणिक अराजकता एवं छात्रों की उपेक्षा के खिलाफ मिथिला स्टूडेंट यूनियन (MSU) ने आज से विश्वविद्यालय मुख्यालय स्थित धरना स्थल पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन की निरंतर उदासीनता, बार-बार की गई मांगों की अनदेखी और छात्रों की समस्याओं पर कार्रवाई न होने के कारण यह कठोर कदम उठाया गया है।

 

 

भूख हड़ताल पर बैठने वाले अनशनकारी साथियों में विश्वविद्यालय महासचिव आदर्श मिश्रा विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष एमडी सेराज, JN कॉलेज मधुबनी अध्यक्ष आनंद पासवान, LNJ कॉलेज अध्यक्ष कुंदन भारती और शिवम ठाकुर शामिल हैं। ये सभी छात्र नेता लगातार प्रशासन को छात्रों की समस्याओं से अवगत कराते रहे हैं, परंतु जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो MSU ने सामूहिक निर्णय लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की घोषणा की।

 

 

MSU की मुख्य 11 माँगें

छात्र संघ चुनाव की तिथि अविलंब प्रकाशित की जाए, ताकि छात्र लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेकर अपने प्रतिनिधि चुन सकें।

स्नातक और स्नातकोत्तर सत्र नियमित किए जाएँ, जिससे पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम एक निश्चित कैलेंडर के अनुसार संचालित हों।

सभी महाविद्यालयों में नए छात्रावास बनाए जाएँ, तथा बंद पड़े छात्रावासों को तुरंत पुनः चालू किया जाए।

विश्वविद्यालय परिसर में प्रतीक्षालय, स्वच्छ शौचालय व शुद्ध पेयजल की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

K.S कॉलेज का नामांकन काउंटर सड़क किनारे से हटाकर परिसर में स्थानांतरित किया जाए, जिससे छात्र-छात्राओं को सुरक्षा व सुविधा मिल सके।

LNJ कॉलेज झंझारपुर, MRM कॉलेज, JN कॉलेज नेहरा के प्रधानाचार्यों को हटाया जाए, क्योंकि इनके नेतृत्व में शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।

सभी महाविद्यालयों का नाम मिथिला अक्षर में अंकित किया जाए, ताकि क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक गर्व को सम्मान मिले।

MMTM, RB जालान, LCS, NJM एवं MG कॉलेज को सरकारी कॉलेज का मान्यता प्रदान की जाए।

महारानी कल्याणी महाविद्यालय में कॉमर्स की पढ़ाई तुरंत शुरू की जाए।

सभी महाविद्यालयों का नामांकन ऑनलाइन प्रणाली से हटाकर ऑफलाइन किया जाए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को राहत मिले।

मिथिला विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा प्रदान किया जाए, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता, संसाधन और पारदर्शिता में वृद्धि हो सके।

 

 

आंदोलन स्थल पर मौजूद रहे कई छात्र-छात्राएँ , अनशनकारियों का हौसला बढ़ाने तथा विश्वविद्यालय में व्याप्त अव्यवस्था के विरोध में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित हुए। जिनमें प्रमुख रूप से – राष्ट्रीय अध्यक्ष विद्या भूषण राय , जिज्ञासा सत्संगी, तुलसी कुमारी, मुस्कान कुमारी, आदित्य कुमार, शुभम ठाकुर, लाल बाबू साहनी, शिवम झा, वेदांत वत्स, प्रतीक सत्संगी, नारायण मिश्रा, प्रशांत मैथिल, अनिश कर्ण, शिन्तु कुमार, आयुष कुमार एवं आदर्श रॉय शामिल हैं।इन सभी छात्रों ने एक स्वर में कहा कि MSU का यह संघर्ष किसी संगठन या व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे मिथिला के छात्रों के भविष्य का संघर्ष है।

 

अनशनकारियों ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन वर्षों से छात्रों की सामान्य समस्याओं तक का समाधान नहीं कर पाया है। छात्रावास बदहाल, पेयजल व्यवस्था असंतोषजनक, प्राचार्यों की मनमानी बढ़ती जा रही है और सत्र पूरी तरह से अव्यवस्थित है। इसके बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यही कारण है कि छात्रों ने लोकतांत्रिक और अहिंसात्मक तरीके से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है।

 

 

 

राष्ट्रीय अध्यक्ष विद्या भूषण, विवि अध्यक्ष श्री अनिश चौधरी, नारायण मिश्रा ,ने स्पष्ट कहा है कि जब तक सभी 11 मांगों पर लिखित आश्वासन या कार्रवाई नहीं होती, तब तक भूख हड़ताल जारी रहेगी। संगठन ने सभी छात्रों, अभिभावकों, बुद्धिजीवियों एवं सामाजिक संगठनों से इस संघर्ष में समर्थन का आह्वान किया है। MSU का मानना है कि यह लड़ाई शिक्षा व्यवस्था की मर्यादा को बहाल करने, छात्रों को उनका अधिकार दिलाने और मिथिला विश्वविद्यालय को एक आदर्श संस्थान बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।

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