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22 जनवरी 2011 इसी दिन बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान की शुरूआत की गई थी।

22 जनवरी 2011 इसी दिन बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान की शुरूआत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य कन्याओं की सुरक्षा और उनके शिक्षा के प्रति जागरूक करना था । वही हमारे भारत देश में स्त्रियों को

लक्ष्मी ,दुर्गा का स्वरुप कहाँ जाता है । बड़े ही दुख के साथ आपको बता दूँ कि यह देश कन्या को लक्ष्मी ,दुर्गा सिर्फ बोलने के लिए है। मानने वाला कोई नहीं हैं। अगर ऐसा सच में होता तो इतने रेप नहीं होते हमारे भारत देश में शायद अब समझ आ रहा है कि एक वक्त में इतनी भ्रूण हत्याएं क्यों होती थी । ये तो सच है कि भारत की बेटियां हर क्षेत्र में अपना नया रिकॉर्ड अपने देश के लिए बना रही है। लेकिन क्या वो सुरक्षित हैं ? मैं भारत की सभी बेटियों की से पूछना चाहती हूं कि भारत सरकार रेप जैसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई सख़्त कदम क्यों नहीं उठाती। क्या यह कोई जरूरी मुद्दा नहीं ? सभी अभिभावक एवं लड़किया डर के साये मे शायद जी रही हैं। शाम या रात तो दूर कि बात ठहरी वह दिन में पढ़ने के लिए भी बाहर निकलने से डर रही हैं। और अब तो बेटियों को गर्ल्स हॉस्टल जैसी जगह भी असुरक्षित लगती है । वह तो अपने घर में भी अब सुरक्षित महसूस नहीं करती। ऐसा क्यों ? अपनी ही आजाद देश भारत की स्त्रियां कैद हो गई है । क्या यह देश सिर्फ पुरुषों के लिए आजाद हुआ है नारियों के लिए नहीं? क्या सिर्फ दीवारों पर बड़े – बड़े अक्षरों में लिखने के लिए हैं बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ ।

• बस अब नहीं—
ना डर, ना शर्म, ना समझौता।
लड़की होना अपराध नहीं,
हक़ है उसका सुरक्षित रहना,
हक़ है उसका मुस्कुराना।
बस अब आज़ाद रहने दो,
उसे इंसान की तरह जीने दो ।

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