Breaking News

प्रखंड के टटुआर पंचायत अंतर्गत विशौल गांव में अवस्थित अति प्राचीन श्री श्री 108 बाबा सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर इलाके में धार्मिक आस्था का केंद्र

सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश भी दे रहे बाबा सिद्धेश्वर नाथ।
———————————-
प्रखंड के टटुआर पंचायत अंतर्गत विशौल गांव में अवस्थित अति प्राचीन श्री श्री 108 बाबा सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर इलाके में धार्मिक आस्था का केंद्र

संवाददाता अजित कुमार सिंह

बिंदु होने के साथ-साथ सांप्रदायिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल भी बना हुआ है। मंदिर के प्रबंधन की बागडोर जहां गांव की हिंदुओं ने थाम रखी है वहीं, इस परिसर के साफ-सफाई की जवाबदेही गांव के समसुल मियां ने स्वेच्छा से अपने जिम्मे ले रखी है। मंदिर परिसर की अपने दोनों हाथों में झाड़ू थामे साफ सफाई करने वाले समसुल मियां कहते हैं कि मनोकामना सिद्धि के लिए इलाके में प्रसिद्ध बाबा सिद्धेश्वरनाथ मंदिर परिसर की साफ-सफाई करते हुए उन्हें गजब का सुकून मिलता है। इस कार्य से उन्हें धर्म लाभ तो हुआ ही है जो, गांव-समाज के लोगों द्वारा उनके सेवा भाव को सम्मान के नजरिए से देखा जाना, उनमें अभूतपूर्व सुकून का भाव जगा दिया है।

मंदिर परिसर में नवनिर्मित ‘इन्द्रकांत झा स्मृति द्वार’ भी न सिर्फ भक्तों के विशेष आकर्षण में है, बल्कि गंगा-जमुनी हुनर का नायाब मिसाल बना हुआ है। ग्रामीण इन्द्रकांत झा की पुण्य स्मृति में उनके पुत्रों द्वारा बनाये गये इस द्वार की खासियत है कि करीब 200 वर्षों पुराने इस मंदिर के बरामदे की अनुकृति के रूप में निर्मित इस द्वार का ढांचा जहां, लोक आस्था के महापर्व छठ में वर्षों से सूर्य अर्घ्य देने वाले अदलपुर के बुजुर्ग राजमिस्त्री सागर के हाथों ने तैयार किए हैं वही, इसकी कसीदाकारी जुमे व ईद की नमाज पर दुआओं के लिए उठने वाले गांव के युवा राजमिस्त्री मो0 फिरोज के हाथों ने किए हैं।इलाके में सैकड़ों निजी भवनों व घरों का निर्माण कर चुके मो0 फिरोज बताते हैं कि बाबा सिद्धेश्वर नाथ मंदिर के प्रवेश द्वार की कसीदाकारी कर उनमें अभूतपूर्व आत्मबल का संचार हुआ है। इस कार्य को करने के बाद इलाके के लोगों ने उनके हुनर को सम्मान के नजरिए से देखकर उनमें अद्भुत संतोष का भाव जगा दिया है, जो इलाके में हिंदू मुस्लिम भाईचारे की अद्भुत मिसाल मिसाल पेश कर रहा है। मंदिर के रंग-रोगन में गांव के पेंटर सुरेंद्र के हुनर का जादू सबका मन मोह रहा।
मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं पंचायत के पूर्व मुखिया प्रो जीव कांत मिश्र का कहना है कि मंदिर परिसर की सफाई में लगे समसुल मियां के हाथ व करीब 200 वर्ष पुराने इस मंदिर का नवनिर्मित प्रवेश-द्वार गंगा-जमुनी तहजीब को दर्शाने के साथ-साथ सांप्रदायिक सद्भाव का सदा से मिसाल बनते रहे इस गांव के लिए प्रेरणा स्रोत है।

Check Also

दरभंगा • डी एम सी एच में इलाज़रत पीड़ित से मिला माले नेताओं की टीम 

🔊 Listen to this   • डोमू राम के हमलावरो को गिरफ्तार करें पुलिस – …