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इण्डियन बिल्डिंग कौन्ग्रेस मे पथ निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता ने लहराया बिहार का परचम

इण्डियन बिल्डिंग कौन्ग्रेस मे पथ निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता ने लहराया बिहार का परचम

आपदा रोधी एवं पर्यावरण के अनुकूल समाज निर्माण को कृतसंकल्पित तथा विज्ञान एवं तकनीक के विभिन्न पहलुओं को समाज के अन्तिम पंक्ति के लोगों तक पहुंचाने को कटिबद्ध पथ निर्माण विभाग , बिहार के अधीक्षण अभियंता ,बिहार अभियन्त्रण सेवा संघ के पूर्व महासचिव एवं इण्डियन इन्जीनियर्स फेडरेशन (पूर्व) के पूर्व उपाध्यक्ष डा सुनील कुमार चौधरी ने चण्डीगढ मे आयोजित इण्डियन बिल्डिंग कौन्ग्रेस के मिड टर्म सेशन एण्ड नेशनल सेमिनार औन सर्विसेज इन हाई राइज बिल्डिंग में विडिओ कौन्फ्रेन्सिग के माध्यम से शोध पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि विकास ऐसा हो जो क्लाइमेट रिजीलिएन्ट हो, विकास ऐसा हो जो सस्टनेबल हो ।उनके शोध पत्र का विषय था- -सस्टनेबल कंस्ट्रक्शन थ्रू ग्रीन प्रैक्टिसेस टूवार्ड्स एचीविॅग सस्टनेबल डेवलपमेंट गोल।डा चौधरी ने निर्माण कार्य के दौरान उत्सर्जित होने वाले ग्रीन हाउस गैस के कारण जलवायु परिवर्तन जनित आपदा का सामाजिक असमानता पर पड़ने वाले प्रभाव, इससे निपटने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे उपाय एवं क्लाइमेट रिजिलिएन्ट समाज की परिकल्पना को साकार करने के लिए होलिस्टीक एप्रोच पर विस्तार से चर्चा की।2015 मे विश्व के विभिन्न देशो द्वारा सस्टनेबल डेवलपमेंट गोल को प्राप्त करने के लिए वैश्विक स्तर पर किए गए विभिन्न समझौतो जैसे पेरिस एग्रीमेंट, सेन्ड्इ फ्रेमवर्क औन डिजास्टर रिस्क रिडक्सन पर विस्तार से चर्चा की ।साथ ही मानव केंद्रित दृष्टिकोण के परिप्रेक्ष्य में क्लाइमेट रिजिलिएन्स , इन्वायरनमेंट, एडप्टीव एवं मीटिगेटीव एप्रोच की व्याख्या, एवं इसके विभिन्न पहलुओं पर बड़े ही रोचक ढंग से प्रकाश डाला। प्रस्तुतीकरण की शुरुआत करते हुए उन्होने विश्व, भारत एवं बिहार मे जलवायु परिवर्तन जनित विभिन्न तरह के आपदा, सस्टनेबल एण्ड ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्रिन्स पल, प्रैक्टिसेस, टेक्नोलॉजीज एवं सस्टनेबल डेवलपमेंट के बारे में विस्तार से चर्चा की ।उन्होने प्रूफ, रेसिस्टेन्ट एवं रेजिलिएन्ट स्ट्रक्चर के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि सस्टनेबल,ग्रीन, रेजिलिएन्ट निर्माण एवं प्रबंधन न केवल सस्ता है बल्कि ड्यूरेबल एवं पर्यावरण के अनुकूल भी है ।उन्होने क्लाइमेट रिजिलिएन्ट इन्वायरनमेंट के निर्माण में स्मार्ट मैटिरियल ,इनोवेटिव,कौस्ट इफेक्टिव, इन्वायरनमेंट फ्रेंडली, क्लाइमेट रिजीलिएन्ट एवं डिजास्टर रिजीलिएन्ट टेक्नोलॉजी/मैटिरियल के प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया ।उन्होने बताया कि ग्रीन बिल्डिंग प्रैक्टिसेस एक ऐसा नवाचार है जो इन्वायरनमेंट पर कार्बन डाई ऑक्साइड के भार को कम कर सस्टनेबल डेवलपमेंट गोल को प्राप्त करने मे मदद करता है।उन्होंने सस्ता एवं पर्यावरण के अनुकूल तकनीक के विभिन्न पहलुओं पर बड़े ही सहज-सरल एवं रोचक ढंग से प्रकाश डाला । साथ ही कौस्ट इफेक्टिव, इको फ्रेंडली, क्लाइमेट रिजीलिएन्ट एवं डिजास्टर रिजीलिएन्ट रूरल हाउस निर्माण के तकनीक की व्याख्या केस स्टडी के माध्यम से बड़े ही रोचक ढंग से की ।उन्होने बताया कि अगर सस्टनेबल डेवलपमेंट गोल को प्राप्त करना है तो ग्रीन कंस्ट्रक्शन एवं डिजास्टर रिजीलिएन्ट प्रैक्टिसेस को बढावा देना होगा।निर्माण तकनीक मे हाई भौल्यूम फ्लाइ ऐश कंक्रीट, बनाना फाइवर, बैम्बु,जुट एवं प्लास्टिक के प्रयोग को बढ़ावा देना होगा ।डॉ चौधरी ने बताया कि भारत एक बहुआपदा प्रवण देश है जहां सस्टनेबल एवं क्लाइमेट रिजिलिएन्ट इन्वायरनमेंट की परिकल्पना को साकार करने के लिए इन्टिग्रेटेड एप्रोच अपनाने की जरूरत है।इसके लिए समाज में लोगो को जागरूक करना होगा। डा चौधरी ने निर्माण कार्य में अभिकल्प एवं मटेरियल के विशिष्टयो एवं प्रबंधन नीतियों में बदलाव की जरूरत की जोरदार वकालत की एवं इस दिशा में शोध को बढ़ावा देने की जरूरत बताई ।उन्होने सस्टनेबल बिल्ट इन्वायरनमेंट के लिए डिजास्टर रेजिलिएन्ट निर्माण एवं प्रबंधन में नैनोटेक्नोलॉजी, बायो कंक्रीट, ग्रीन कंक्रीट एवं बायो इन्जिनियरिन्ग की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।उन्होने बताया कि ऐसे पौधों को लगाने की जरूरत है जो कार्बन डाई ऑक्साइड का शोषण कर सके।

 

उन्होंने स्थानीय शासन को मजबूत बनाने, संस्थागत क्षमता बढ़ाने, समावेशी नीति निर्माण, जलवायु परिवर्तन,सतत विकास व विकसित समाज के लिए उठाए जाने वाले आवश्यक कदम पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने लिए तकनीक आधारित, समावेशी और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी शासन व्यवस्था जरूरी है।

 

उन्होने बताया कि सस्टनेबल, ग्रीन, क्लाइमेट रिजीलिएन्ट एण्ड डिजास्टर रिजीलिएन्ट निर्माण एवं प्रबंधन पर समाज के हर तबके को जागरूक करने के अभियान को एक आन्दोलन का रूप देकर पूरा देश में फैलाने की जरूरत है ।डा चौधरी ने बताया कि उनके द्वारा समाज के विभिन्न स्टेकहोल्डर को बड़े पैमाने पर ग्रीन एवं सस्टनेबल कंस्ट्रक्शन प्रैक्टिसेस, आपदा प्रबंधन एवं आपदा रोधी भवन निर्माण पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है एवं ग्रीन एवं आपदा रोधी भवनों का निर्माण भी करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि डा चौधरी अन्तरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर के तकनीकी एवं सामाजिक संगठनों से जुड़कर विभिन्न प्रकार की आपदाओं से निपटने के लिए इनोवेटिव,डिजास्टर रेजिलिएन्ट एवं कौस्ट इफेक्टिव टेक्नोलॉजी को समाज के अन्तिम पंक्ति के लोगों तक पहुंचाने का काम करते रहे है ।डा चौधरी ने अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय जर्नल एवं कान्फ्रेस में 235 से ज्यादा शोध पत्र प्रस्तुत कर चुके हैं एवं उन्हें 28 अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा जा चुका है । उन्होंने अपनी बात इन पंक्तियों के साथ समाप्त की-

“हम लोग हैं ऐसे दीवाने, तकनीक बदलकर मानेंगे।

मंजिल को पाने निकले हैं, मंजिल को पाकर मानेंगे।।

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