गीतों के माध्यम से मणिकांत चला रहे कोरोना जागरुकता अभियान
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इससे पहले अभियान गीतों पर केन्द्रित अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है
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“साहित्य समाज का दर्पण होता है और साहित्य का कार्य समाज के लोगों को उचित राह दिखाना है।

” इस बात की गंभीरता को समझते हुए मैथिली के प्रख्यात गीतकार तथा भारत निर्वाचन आयोग के आईकाॅन सविदित हो कि इनके लिखे कोरोना से जागरुकता संबंधी अभियान गीतों को मैथिली मंच के ख्यातिलब्ध कलाकार स्वेता कुमारी , दीपक कुमार झा, रजनी पल्लवी, रागिनी मिश्र, आभा झा, केदारनाथ कुमर, जानकी ठाकुर, सुषमा झा,। नीरज कुमार झा आदि दर्जनो कलाकारों ने अपने निराले अंदाज की प्रस्तुति से लोगों के हृदय पटल पर उतारने मे सझम रहे हैं । सहज शब्दों मे भावों को संप्रेषित करना मणिकांत झा की विशेषता रही है । अभी कोरोना से प्रतिकार के लिए जिन गीतों को इन्होने प्रसारित किया है उनमे से कुछ के बोल हैं –
“बहुतो हैजा टुनकी देखल उठल बहुत अकूबा
भारत वासी बना क’ रखलक सब दिन अप्पन हूबा
ई कोरोनाक उठलै बिहरिया सगरे दुनियाँ मे
सबहक चौंकल नजरिया सगरे दुनियाँ मे ।”
“कोरोना सँ कियो डरु ना
सावधानी सँ सामना करु ना।
साफ सुथड़ा सँ अपने रहियौ
हाथ साबुन सँ खूब रगड़ियौ
बेर बेर नाक मूँह के छूबू ना
सावधानी सँ सामना करु ना।”
“हे रे करोना मन डरौना तूँ भागहि अपना देश रे
के बजेलकौए एत्त।
सुनैत सुनैत कानो पथरायल मन डेरायल जीह रे
ककर कहाँ के संकट तूँ छैं के रचलक ई बीह रे
के रचलक ई बीह रे
मूँह दूसौना अगि लगौना तूँ भागहि अपना देश रे
के बजौलकौए एत्त।” आदि ।
विदित हो कि मणिकांत झा अपने गीतों के माध्यम से इस तरह का जागरुकता अभियान पूर्व से ही चलाते आ रहे हैं। अभियान गीतों की कई पुस्तकों का प्रकाशन इनकी मणिशृँखला के अंतर्गत किया जा चुका है। यथा मतदाता जागरुकता हेतु ‘वोटमणि’ , स्वच्छता हेतु ‘स्वच्छमणि’ , शराबबंदी हेतु ‘मुक्तिमणि’ , दहेज मुक्ति हेतु “दहेजमुक्ति मणि”, जल संकट पर ‘जलमणि’ बाढ़ की समस्या पर ‘बाढ़िमणि’ आदि इनकी प्रमूख कृति है।
अभी जब पूरा विश्व कोरोना के आतंक से आतंकित है तब श्री झा के द्वारा मातृभाषा मैथिली मे सहज भाव से लोगों को कोरोना वाइरस से सावधान रहकर प्रतिकार करने का जो संदेश दिया जा रहा है उससे आमजन को काफी लाभ मिल रहा है ।
विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू बताते हैं कि मणिकांत झा को संस्थान ने वर्ष 2011 मे ही मिथिला के प्रतिष्ठित सम्मान “मिथिला विभूति सम्मान” से सम्मानित किया था। हमे इनके द्वारा किए जा रहे कार्यों पर गर्व है ।
समाजसेवी अमरेश्वरी चरण सिन्हा बताते हैं कि बहुत पूर्व से ही साहित्य समाज मे चेतना जागृत करने का कार्य करती आ रही है । वर्तमान मे मणिकांत झा उसी के प्रतीक हैं ।
मणिकांत झा के मणिशृँखला के प्रकाशक महात्मा गाँधी शिक्षण संस्थान के चेयरमैन हीरा कुमार झा बताते हैं कि श्री झा का समाज के प्रति नि:स्वार्थ भाव से किया गया यह योगदान स्वर्णाक्षर मे अंकित रहेगा । मिथिला मैथिली से जुड़े जीवकांत मिश्र ने मणिकांत झा के प्रति समाज की ओर से कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए इस कार्य की सराहना की है । सामाजिक तथा साहित्यिक क्षेत्र से जुड़े प्रवीण कुमार झा ने मणिकांत झा द्वारा चलाए जा रहे जागरण अभियान को असाधारण कहा है ।
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