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मधुबनी  देशव्यापी लाॅकडाउन के कारन दो दिन बाद ही बंद पड़े कालाजार प्रभावित क्षेत्रों में छिड़काव को विभाग ने फिर से शुरू करने का निर्णय लिया

कोरोना के बीच कालाजार प्रभावित क्षेत्रों मे फिर से होगा छिड़काव

– सोमवार से जिले के सभी प्रखंडों में होगी छिड़काव
– सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रख करेगें छिड़काव
– छिड़काव दल को दिया गया पीपीई किट, फेस मास्क, ग्लब्स,सेनेटाइजर और साबुन

मधुबनी

देशव्यापी लाॅकडाउन के कारन दो दिन बाद ही बंद पड़े कालाजार प्रभावित क्षेत्रों में छिड़काव को विभाग ने फिर से शुरू करने का निर्णय लिया

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है जिसमें पंडोल प्रखंड में छिड़काव की शुरुआत कर दी गई है। बाकी सभी प्रखंडों में सोमवार से छिड़काव होगा। जो अगले 60 दिनों तक चलेगा। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉक्टर एसपी सिंह ने बताया ने बताया कि मार्च माह में दो दिन के छिड़काव के बाद कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए देशव्यापी लाॅकडाउन शुरु हो गया था। जिसके कारण छिड़काव को बंद करना पड़ा था। फिर से विभागीय आदेश से इसे चालू करने का आदेश प्राप्त हुआ है मधुबनी जिला के 21 प्रखंड के 106 गांव में 139731 घरों में 701524 लोगों के बीच छिड़काव किया जाएगा। छिड़काव के लिए सिंथेटिक पाइरेथोराइड का प्रयोग किया जाएगा।

केटीएस और केबीएस को मिल चुका है प्रशिक्षण

छिड़काव करने के पहले जिले के केटीएस ओर केबीएस को जूम ऐप के माध्यम से छिड़काव के बारे में प्रशिक्षण दिया गया है। प्रशिक्षण में बताया गया कि छिड़काव करने से पूर्व घर के सदस्यों को घर से बाहर आने के लिए कहें। मास्क के साथ दल अंदर दिवाल के छह फीट की उचाईं तक छिड़काव करेगें । छिड़काव करने के एक घंटे के बाद ही घर में लोगों का प्रवेश करने को कहें। छिड़काव के पूरी प्रक्रिया के दौरान सोशल डिस्टेंस का पालन आवश्यक होगा।छिड़काव करने के लिए दल कर्मी को फेस मास्क, ग्लव्स, पीपीई किट दे दिए गए हैं। वहीं समय समय पर उपलब्ध कराए गए साबुन से बार-बार हाथ धोना और सेनेटाइजर का प्रयोग भी करने का आदेश मिला है।छिड़काव के बाद 3 महीने तक दीवार की लिपाई पुताई नही करनी है। इससे दवा का असर समाप्त हो जाता है।

छिड़काव के दौरान होगी रोगियों की भी खोज
छिड़काव के दौरान कर्मी घर-घर कालाजार के लक्षणों के आधार पर रोगियों की खोज करेगी। वहीं इसका प्रतिवेदन भी केटीएस को उपलब्ध कराएंगे। कार्यकर्ता छिड़काव किए गए घरों के दीवाल पर स्टेंसिल बनाएंगे तथा छिड़काव रजिस्टर में मकान मालिक का हस्ताक्षर लेंगे।

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार नीरज कुमार सिंह ने बताया कि जिले में वर्ष 2009 में 730 मरीज, 2010 में 630, वर्ष 2011 में 538, वर्ष 2012 में 415, वर्ष 2013 में 321, वर्ष 2014 में 256, वर्ष 2015 में 187, मरीज 2016 में 108, मरीज, 2017 में 85 मरीज, 2018 में 50, 2019 में 31,और 2020 में अब तक 7 मरीज कालाजार के मिले हैं।

प्रतिदिन कंट्रोल रूम को उपलब्ध कराएंगे रिपोर्ट

जिलों के द्वारा प्रत्येक दिन छिड़काव किए गए घरों की संख्या, दलों की संख्या, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की संख्या, गांव की संख्या एवं संदिग्ध मरीजों की संख्या पूर्व की भांति जिला के कंट्रोल रूम को मोबाइल संख्या 9955030943 पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित करेंगे। छिड़काव कर्मियों को दैनिक मजदूरी का भुगतान प्रत्येक सप्ताह कराना सुनिश्चित किया जाए। जिससे कि उनको आर्थिक कठिनाई नहीं हो।

सरकार द्वारा मिलती है आर्थिक मदद :

कालाजार मरीज को सरकार द्वारा ₹ 7100 आर्थिक मदद भी दिया जाता है। जिसमें राज्य सरकार का हिस्स 6600 और केंद्र का हिस्सा 500 रुपये होता है।

कालाजार के लक्षण
15 दिनों से ज्यादा बुखार होना एनेमिया किसी भी दवा से ठीक ना होना सब प्लीज और लीवर का बढ़ना शरीर का काला पड़ना, इन में लगातार कमी होना, त्वचा में खुजली, जलन, रेसेस या फिर सूखापन का होना इसके मुख्य लक्षणों में से एक है।

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