कोरोना काल में एसएनसीयू में हो रही है बच्चों की बेहतर देखभाल
– बच्चे

को फ्लू कॉर्नर में भेज लिया जाता है दाखिला
– प्रीटर्म बेबी की होती है गहन देखभाल की जरूरत
– हाथ धोने के बाद अपने बच्चों को दूध पिला रही मां
: वैश्विक महामारी कोरोनावायरस के संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से हम प्रयास किए जा रहे हैं इस संक्रमण से बचने के लिए लोग एहतियात बरत रहे वही ऐसे माहौल में जन्म लेने वाले बच्चों को लेकर अस्पताल पूरी तरह से सतर्क है सदर अस्पताल में प्रीटर्म बेबी या कम वजन वाले नवजात का जिनको एसएनसीयू में भेजा जाता है उन्हें दाखिला लेने से पूर्व सदर अस्पताल में बने फ्लू कॉर्नर में जांच के लिए भेजा जाता है उसके बाद ही बच्चे को एसएनसीयू में दाखिला मिलता है, जहां बच्चे का स्कैन किया जाता है,एवं बच्चे का इलाज करने वाले डॉक्टर एएनएम भी अपने हाथों को हैंडवास करते हैं एवं हाथों को सेनीटाइज करने के बाद ही बच्चों को छूते हैं बच्चे को दूध पिलाने वाली मां भी जब बच्चों को दूध पिलाने के लिए जाती हैं, तो उनके हाथों को स्वास्थ्य कर्मी द्वारा हैंडवॉश कराया जाता है, उसके बाद ही बच्चों को दूध पिलाने की अनुमति मिलती है।
एसएनसीयू में शुक्रवार 2 बच्चे भर्ती थे,
वहीं सोमवार को- 5,मंगलवार को-2बुधवार को-2 गुरुवार को-0 नवजात एसएनसीयू में भर्ती थे।
स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट में मिलती है सुविधा:
सदर अस्पताल के एसएनसीयू प्रभारी डॉ डीके झा ने बताया कि गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पूर्व जन्म लेने नवजात को अधिक खतरा होता है. ऐसे में उन्हें गहन देखभाल की जरूरत होती है. इसको लेकर जिला अस्पताल में स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट( एसएनसीयू) की स्थापना की गई हैं. चिकित्सकों की उपस्थिति के साथ बेहतर सुविधा भी उपलब्ध करायी जाती है. उन्होंने बताया प्रीटर्म बेबी को तीन श्रेणियों में रखा गया है. पहली श्रेणी में ऐसे नवजात आते हैं जिनका जन्म 32 से 37 सप्ताह के बीच होता है. दूसरी श्रेणी में 28 से 32 सप्ताह के बीच एवं तीसरी श्रेणी में 28 सप्ताह से पूर्व जन्मे नवजातों को रखा जाता है. दूसरी एवं तीसरी श्रेणी के बच्चों को गहन देखभाल की जरूरत होती है. इसलिए जटिलता के आधार पर ऐसे नवजातों को चिकित्सकीय परामर्श पर एसएनसीयू रेफर किया जाता है।
प्रीटर्म बेबी का रखें ऐसे ख्याल:
केयर इंडिया केडीपीएल महेंद्र सिंह सोलंकी बताते हैं कि प्रीटर्म बेबी को विशेष देखभाल की जरूरत होती है. इसके लिए नवजात को कंगारू मदर केयर देने की सलाह दी जाती है, जिसमें माता, पिता या कोई अन्य घर के सदस्य नवजात को अपनी छाती पर चिपकाकर रखते हैं. इस प्रक्रिया से नवजात को शरीर की ऊष्मा प्राप्त होती है एवं नवजात स्वस्थ रहता है.
• सामान्य से अधिक बार में करायें स्तनपान: सामान्यता शिशु को दिन भर में 8 से 10 बार स्तनपान कराने की जरूरत होती है. लेकिन प्री टर्म नवजातों को इससे अधिक बार स्तनपान कराना चाहिए. ऐसे नवजातों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कम होती है. इसलिए नवजात को अधिक से अधिक बार स्तनपान कराने की सलाह दी जाती है. इससे नवजात को संक्रमण जैसे डायरिया,निमोनिया से बचाव होता है ।
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