महाविद्यालय द्वारा साजिश के तहत मुख्य द्वार से उर्दू में लिखे नाम को हटा दिया गया। अफसोस की बात यह है कि कोई भी भाषा को किसी धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए क्योंकि भाषा का कोई धर्म नहीं होता।

नरगौना पैलेस स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति आवास पर दरभंगा प्रमंडल कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग एवं दरभंगा जिला कांग्रेस सेवा दल के जिला अध्यक्ष डॉ जमाल हसन के नेतृत्व में मिथिला आवामी फ्रंट,एनएसयूआई एवं छात्र जन अधिकार पार्टी के प्रतिनिधि कुलपति से मिले और सभी प्रतिनिधि ने कार्यकारी कुलपति राजेश सिंह के सामने सी०एम० विधि महाविद्यालय में उर्दू में लिखे नाम को हटाए जाने का विरोध जताया जिस पर कुलपति ने भी इस विरोध को जायज माना और कहा की जब नाम वहां लिखा गया था तो हटाने का औचित्य ही नहीं था और मैं बाहर था इस वजह से यह जानकारी मुझे सही से प्राप्त नहीं हुई इस मामले को लोग जानबूझकर घटिया राजनीति करने की कोशिश कर रहे है आप लोग निश्चिंत रहें वहां फिर से उर्दू में नाम लिखा जाएगा ।
कांग्रेस पार्टी के तरफ से अब्दुल हादी सिद्दीकी, राजा सोनी, महफूज हम्मादी रेहानउद्दीन ,एहसान सिद्दीकी , ओजैर अनवर मिथिला अवामी फ्रंट के तरफ से इकबाल हसन, कुशोथर महतो ,सफदर इमाम एनएसयूआई के तरफ से प्रदेश सचिव शादाब अख्तर, अंजुम जसीम, छात्र जन अधिकार पार्टी से सोनू यादव ,मोहम्मद एहसान, सहित कई लोग मौजूद थे।
दरभंगा प्रमंडल कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग एवं दरभंगा जिला कांग्रेस सेवा दल के जिला अध्यक्ष डॉ जमाल हसन ने कुलपति को अपना 4 सूत्री मांग पत्र सौंपा जिसमें उन्होंने कहा
जैसा कि आपको ज्ञात है कि बिहार राजभाषा (संशोधन) अधिनियम, 1980 के अंतर्गत “उर्दू” बिहार राज्य की दूसरी राजभाषा है और इसका इस्तेमाल सभी सरकारी कार्यालयों में ठीक वैसे ही होता है जैसे हिंदी का।
लेकिन ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में ही यहाँ की दूसरी राजभाषा का अपमान किया जा रहा है। मामला है, दरभंगा शहर के बीचों बीच ललित नारायण मिथिला विश्विद्यालय की अंगीभूत इकाई सी० एम० विधि महाविद्यालय का, जहाँ वर्षों से कॉलेज के मुख्य द्वार पर हिंदी, उर्दू व अंग्रेजी में महाविद्यालय का नाम लिखा हुआ था।
काफी पुराना हो जाने के कारण महाविद्यालय द्वारा नए सिरे से महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर हिंदी एवं उर्दू में महाविद्यालय का नाम लिखवाया गया।
उर्दू देखते ही कुछ नफरती संगठन इसका विरोध करने लगे और महाविद्यालय द्वारा साजिश के तहत मुख्य द्वार से उर्दू में लिखे नाम को हटा दिया गया। अफसोस की बात यह है कि कोई भी भाषा को किसी धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए क्योंकि भाषा का कोई धर्म नहीं होता।

हम

रिपोर्ट गुड्डु कुमार ठाकुर

अनुरोध करते हैं कि

1. महाविद्यालय के मुख्य द्वार पर बिहार की द्वितीय राजभाषा का सम्मान करते हुए उर्दू में नाम लिखवाना जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए।

2. सभी महाविद्यालय की मुख्य द्वार पर हिंदी,उर्दू और मैथिली में महाविद्यालय का नाम लिखवाया जाना सुनिश्चित करवाया जाए।

3. उक्त कृत्य की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्यवाही की जाए।

4. नफरती संग़ठन पर जल्द से जल्द प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्यवाही हो।

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