Breaking News

मधुबनी ज़िला अस्पताल प्रशासन की ओर से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराया जा रहा है।

सदर अस्पताल में पिछले माह 47 गर्भवती महिलाओं का हुआ सिजेरियन प्रसव

• बेहतर सुविधा के कारण मरीज़ को अब नहीं किया जाता रेफर
• सदर अस्पताल प्रशासन की ओर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध
• •एसएनसीयू में खराब वार्मर किए गए दुरुस्त

मधुबनी/ 02 जुलाई:

ज़िला अस्पताल प्रशासन की ओर से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराया जा रहा है। मरीज़ व परिजनो को सीमित संसाधन के बीच उचित चिकित्सा व्यवस्था प्रदान की जा रही है। इसी कड़ी में सदर अस्पताल में खराब रेडिएंट वार्मर को चेन्नई से आए फेनिक्स कंपनी के टेकनिशियन द्वारा बुधवार को ठीक किया गया.
अस्पताल प्रबंधक अब्दुल मजीद ने बताया खराब पड़े वार्मर को टेक्नीशियन द्वारा ठीक करा दिया गया है. अब एसएनसीयू में भर्ती नवजातों को वार्मर की पूरी सुविधा मिल सकेगी. इसे लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से ठोस पहल की जा रही है। इसके अलावा भी मरीज़ों के बेहतर स्वास्थ सुविधा बढाने को लेकर कार्रवाई की जा रही है।

जिले में उपलब्ध है एसएनसीयू की सुविधाएं:

सदर अस्पताल परिसर में 2016 से एसएनसीयू(स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट ) नया जीवन देने में कारगर साबित हो रहा है। एसएनसीयू इंचार्ज डॉ डीके झा ने बताया यहाँ 90 प्रतिशत से भी ज्यादा नवजातों का सफल इलाज होता है। एसएनसीयू वार्ड में 0 से 28 दिन तक के बच्चों को भर्ती किया जाता है। एसएनसीयू सेवा का लाभ सिर्फ अस्पताल में जन्म लेनेवाले नवजातों को ही नहीं मिल रहा है, अपितु सभी सरकारी व निजी शिशु रोग विशेषज्ञों द्वारा नवजातों को यहां बेहतर सुविधा को लेकर रेफर किया जाता है। एसएनसीयू में 24 घंटे एक चिकित्सक के साथ कई एएनएम तैनात रहते हैं, जो नवजात के एडमिट होने के साथ ही उनकी सेवा में तत्परता से जुट जाते हैं।

ऐसे नवजात एसएनसीयू में होते हैं भर्ती:

• 1800 ग्राम या इससे कम वजन के नवजात
• गर्भावस्था के 34 सप्ताह से पूर्व जन्में बच्चे
• जन्म के समय गंभीर रोग से पीड़ित नवजात( जौंडिस या कोई अन्य गंभीर रोग)
• जन्म के समय नवजात को गंभीर श्वसन समस्या( बर्थ एस्फ्यक्सिया)
• हाइपोथर्मिया
• नवजात में रक्तस्त्राव का होना
• जन्म से ही नवजात को कोई डिफेक्टस होना

बर्थ एसफिक्सिया के केस में आई कमी:

डॉ. डीके झा ने बताया सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के पहल से बर्थ एसफिक्सिया के कारण नवजात में होने वाली मौतों में कमी आई है. बर्थ एसफिक्सिया केस टोटल डिलीवरी का 10 से 15 प्रतिशत होता है .सिजेरियन प्रसव की सुविधा बहाल होने एवं एसएनसीयू में बेहतर सुविधा उपलब्ध होने के कारण बर्थ एसफिक्सिया के कारण शिशुओं में होने वाली मौत में कमी आई है. पहले बच्चे को डीएमसीएच किया जाता था. लेकिन अन रेफर केसेज में कमी आई है. पहले गर्भवती महिला को सिजेरियन प्रसव की स्थिति में डीएमसीएच रेफर किया जाता था ,जिसमें कमी आई है. उन्होंने बताया जो जरुरी दवाएं उपलब्ध नहीं है, उसके बदले दूसरे कंपोजिशन का मेडिसिन उपलब्ध कराया गया है. एसएनसीयू में रेडियंट वार्मर खराब होने के कारण एक बेड पर दो बच्चों को रखा गया था. लेकिन इसे आज ठीक करा दिया गया है.

सदर अस्पताल में उपलब्ध है सारी सुविधाएं:

सिविल सर्जन डॉक्टर सुनील कुमार झा ने बताया गम्भीर स्थिति में गर्भवती को अब प्रसव के लिए रेफर नहीं किया जाता। सदर अस्पताल में सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। जिले में जून माह में 47 सिजेरियन प्रसव हुए. डॉ. झा ने बताया प्रसव पूर्व जांच,उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाएं, गर्भावस्था के दौरान दी जाने वाली जरूरी दवाएं एवं गर्भवती महिलाओं की लाइन लिस्टिंग जैसे अन्य जरूरी स्वास्थ्य सेवाओं को कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पहले की तरह दिया जाता है। गर्भावस्था में प्रत्येक महिला को उसके हिमोग्लोबिन, आयरन एवं कैल्सियम की स्थिति पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है। आवश्यकता के अनुसार गर्भवती महिलाओं को जरूरी पोषक तत्व मिले, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी हो। सारी सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है। तीन माह से नौ माह के बीच की महिलाओं का नियमित स्वास्थ्य चेकअप किया जाता है। साथ ही गर्भवती महिलाओं को घर से अस्पताल लाने एवं उन्हें घर पहुंचाने के लिए 102 नंबर पर एंबुलेंस निशुल्क दिया जाता है।

Check Also

दरभंगा • डी एम सी एच में इलाज़रत पीड़ित से मिला माले नेताओं की टीम 

🔊 Listen to this   • डोमू राम के हमलावरो को गिरफ्तार करें पुलिस – …