जीवनपर्यंत लोगों की सेवा करती रहूंगी: एएनएम शबरुन खातून
• पांच

महीने से अपने घर- परिवार से दूर रह कर दे रही सेवा
• पहले भी बेहतर कार्यों के लिए हो चुकी हैं सम्मानित
• अब तक करीब 5000 लोगों की की हेल्थ स्क्रीनिंग एवं सर्वे
• रोज़ाना गर्भवती महिलाएं, बच्चे व बुजुर्ग के स्वास्थ्य का लेती है ब्यौरा
‘‘इस विपरीत समय में लोगों को मदद की जरूरत है. जब तक मैं स्वस्थ हूँ, लोगों की सेवा करती रहूंगी’’. यह कहना है सदर प्रखंड अस्पताल में कार्यरत एएनएम कोरोना योद्धा शवरून खातून का। विगत 5 महीने से अपने घर परिवार से दूर शबरून रोजाना कोरोना संदिग्ध लोगों के घर जाकर सर्वे कार्य को पूरा करती है। इस दौरान वह लोगों के हेल्थ स्क्रीनिंग भी करती हैं। अब तक करीब 5000 लोगों के स्क्रीनिंग कार्य को अंजाम दे चुकी है।इसके अलावा जिला प्रशासन के आदेश पर एएनएम गर्भवती महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्ग से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी लेती है. संबंधित कार्य का संपादन कर रिपोर्ट बनाकर अधिकारी को सौंप देती हैं. रिपोर्ट के आधार पर अधिकारी ज़रूरी होने पर कोरोना संदिग्ध का सैंपल जांच के लिए लेते है।
सदर प्रखंड में कार्यरत एएनएम शबरून खातून का घर समस्तीपुर जिला के रोसरा थाना अंतर्गत डगवर टोली पड़ता है। वह पिछले जनवरी को घर से आई थी। तब से वह लगातार जिला में कोना संक्रमण के मद्देनजर लोगो के चिकित्सकीय सेवा में जुटी हुई है, जिसकी प्रशंसा चिकित्सा पदाधिकारी, हेल्थ मैनेजर व कर्मी करते हैं। इससे पूर्व भी गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य सबंधित विवरणी वंडर ऐप पर करने को लेकर डीएम डॉक्टर त्यागराजन से पुरस्कृत भी हो चुकी है। इसके अलावा शबरून को अन्य कार्य के लिए भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं।
रोजाना 200 से 250 लोगों का करती सर्वे:
शबरून खातून रोजाना अपने इलाके में करीब 200 से 250 लोगों का सर्वे कार्य करती हैं। इस दौरान संदिग्ध लोगों की पहचान होने पर उनका हेल्थ स्क्रीनिंग भी करती हैं। संदिग्ध लोगों के थर्मल स्क्रीनिंग के अलावा अन्य कार्य को बखूबी अंजाम देती है। घर-घर जाकर पूछताछ करती है। खासकर कोरोना के लक्षण को लेकर परिवार के सदस्यों से जानकारी लेती है। जिला प्रशासन के निर्देशानुसार बाहर से हुए आए सदस्यों के बारे में ज़रूर पूछती है। पूछताछ के बाद वह परिवार के सदस्यों का नाम सहित स्वास्थ्य सबंधित जानकारी अंकित करती है।
फोन पर पिता करते हौसला अफज़ाई:
सदर पीएचसी में कार्यरत कोरोना योद्धा रुपी शबरून समय मिलने पर समस्तीपुर जिले में रहने वाले अपने मां पिताजी से बात करती है। जिला के पहले कोरोना संक्रमित मिलने पर अधिकारियों ने शबरून को उस इलाके में सर्वे व हेल्थ स्क्रीनिंग के लिए भेजा। शुरुआत में थोड़ा डर सा लगा, लेकिन जब पिता जी से बात हुई तो दूने उत्साह से शबरून अपने कार्य में लग गयी। शबरून खातून बताती हैं फोन पर बातचीत के दौरान उनके पिता ने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए कहा अस्पताल में डॉक्टर मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवा लिखते हैं, लेकिन मरीजों की सच्ची सेवा एएनएम व नर्स ही करती है। इसीलिए मानवीय सेवा से बढ़कर दूसरा कोई कर्म नहीं है। इससे बढ़कर दूसरा धर्म नहीं है. उनके पिता उन्हें बेफिक्र होकर ईश्वर को याद कर अपने कर्म पथ पर आगे बढ़ते रहने की सीख देते हैं. यह सुनकर शबरून को साहस मिलता है व सुबह सवेरे अपने अस्पताल की ओर चल पड़ती हैं.
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