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बिहार मधुबनी आपात की घड़ी में कोरोना वारियर्स निभा रहे अपना दायित्व, उनके हौसले को सलाम संपादकीय (दरभंगा news 24 live)

आपात की घड़ी में कोरोना वारियर्स निभा रहे अपना दायित्व, उनके हौसले को सलाम

•टीकाकरण के लिए विशेष समुदाय को किया जागरूक, मिली सफलता
•कोरोना को लेकर क्षेत्र के लोगों को कर रही जागरूक
•अपने पोषक क्षेत्र में सभी बच्चों का कराया जेई का टीकाकरण    कोरोना महामारी के खिलाफ लडाई में चिकित्सकों के साथ एएनएम व आशा भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है. संक्रमण के जोखिम के बावजूद भी आशा एवं एएनएम गांव में बच्चों व गर्भवती महिलाओं को जिस तन्मयता से टीकाकरण एवं लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक कर रही हैं, ग्रामीण इन कोरोना वारियर्स के जज्बे को सैल्यूट कर रहे हैं। पीएचसी बिस्फी के छोटे से ग्राम- बलहा में आशा फैसिलिटेटर के रूप में कार्य कर रही संजू कुमारी जो वर्ष 2006 से 2010 तक आशा के पद पर कार्य करने के उपरांत वर्ष 2011 से अभी तक आशा फैसिलिटेटर के रूप में 15 आशाओं एवं 18 केंद्र का संचालन कर रही हैं। इनके टीम के आशा कार्यकर्ता गांव में जाकर बच्चों को जीवन रक्षक टीके तथा गर्भवती महिलाओं की सेहत की भी जांच कर रही हैं। साथ ही लोगों को कोरोना वायरस से जागरूक रहने की सलाह दे रही हैं.

टीम बनाकर घर- घर जाकर किया सर्वे:

संजू कुमारी बताती हैं जब बड़ी संख्या में प्रवासी देश के विभिन्न कोनों से अपने गांव लौट रहे थे, तो ऐसे समय में उनकी टीम की आशा दीदियों ने 4 टीम का गठन कर प्रत्येक दिन 60 घरों का सर्वे किया। जिन घरों में प्रवासी आए हुए थे उन घरों में लगातार 14 से 15 दिनों तक विजिट किया। उनको सोशल डिस्टेंस, मास्क पहनने, हैंड वॉशिंग आदि जानकारी दी. अभी भी संजू क्षेत्र में लोगों के घर- घर जाकर कोरोना के लक्षण को लेकर बुखार, खांसी, सर्दी के बारे में लोगों से पूछती हैं एवं लक्षण पाए जाने पर कोविड-19 टेस्ट करवाने की सलाह देती हैं।

सर्वे के दौरान कई जगह हुआ विरोध का सामना:

संजू ने बताया सर्वे के दौरान कई जगह उन लोगों का विरोध भी हुआ। सर्वे नहीं करने दिया गया, परंतु उन लोगों ने स्वास्थ्य विभाग टीम के सहयोग से लोगों को समझाने में कामयाब भी हासिल की। लोगों से अनुरोध किया कि सर्वे कार्य में सहयोग करें. इससे बदलाव देखने को मिला एवं गाँव के लोगों ने कार्य में सहयोग करना प्रारंभ किया।

विशेष समुदाय वर्ग में टीकाकरण में होती है परेशानी:

संजू बताती है कि अभी जापानी इंसेफेलाइटिस का टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें उन लोगों ने अपने पोषक क्षेत्र के अलावा दूसरे क्षेत्र में जाकर भी टीकाकरण किया परंतु कुछ विशेष समुदाय के टोले में टीकाकरण के दौरान काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है. उन्होंने बताया उन्हें जापानी इंसेफेलाइटिस के बारे में जानकारी दी गयी. उन्हें बताया गया कि जापानी इंसेफेलाइटिस(जेई) बच्चों में होने वाला एक गंभीर दिमागी बुखार है जिसका एक मात्र ईलाज इसका टीका ही है. लोगों को जेई टीके के विषय में समझाने पर लोगों ने अपने बच्चों को टीका लगवाने के लिए राजी हुए. साथ ही उन्हें यह भी बताया जाता है कि टीके का कोई गंभीर साइड इफ़ेक्ट नहीं होता है एवं यह हर मायने में सुरक्षित है.

गर्भवती महिलाओं के लिए करती हैं एंबुलेंस की व्यवस्था:

संजू ने बताया स्वास्थ्य विभाग के द्वारा गर्भवती महिलाओं को लाने एवं ले जाने के लिए निशुल्क 102 नंबर पर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है, परंतु कभी-कभी आपात स्थिति में इस नंबर से संपर्क नहीं हो पाता है. वैसी स्थिति में वह सभी एंबुलेंस चालकों के पर्सनल मोबाइल नंबर ले रखी है. आपात स्थिति में ड्राइवर का निजी नंबर पर संपर्क कर एंबुलेंस को बुलाती है और समय से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाते हैं।

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